कोरबा। साउथ इस्टर्न कोल फिल्ड्स लिमिटेड ( South Eastern Coal Fields Limited ) कुसमुंडा परियोजना की परेशानी कम होती नजर नहीं आ रही है। नाराज ग्रामीणों पुनर्वास, नौकरी को लेकर कोयला उत्खनन कार्यों पर रोक लगा दिया है।

जब तक नौकरी नहीं तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा

विस्थापितों ने कहा है कि जब तक उनके लोगों को नौकरी नहीं मिलेगी, यह धरना प्रदर्शन बन्द नहीं होगा। कुसमुंडा कोयला खदान के अंतर्गत आने वाले ग्राम चंद्रनगर, जटराज, पाली, बरकूटा के अनेक लोगों की जमीनें कोयला खदान के लिए ली गईं मगर आज भी वे नौकरी से वंचित है। इन सभी को बीते 6 वर्षों से नौकरी के नाम पर घुमाया जा रहा है। प्रभावित जब भी आंदोलन की बात करते हैं तब आश्वासन देते हुए शांत कर दिया जाता है, मगर इनका कहना है कि हम इस बार चुप नहीं बैठेंगे और नौकरी मिलने तक अपना धरना प्रदर्शन जारी रखेंगे। इस दौरान खदान से भी उत्पादन नहीं होने दिया जाएगा।

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तीन दशक पहले ली जमीन, पर नौकरी अब तक नहीं..!

South Eastern Coal Fields Limited की कुसमुंडा कोयला खदान के मुहाने पर हो रहे आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विनोद यादव ने बताया कि केवल उनके गांव ही नहीं बल्कि आसपास के इलाके के दर्जनो लोगों को नौकरी के नाम पर घुमाया जा रहा है। ग्राम बरकूटा की जमीन तो तीन दशक पहले ही एस ई सी एल ने अधिग्रहित कर ली है, वही कुछ अन्य गावों की जमीन लगभग 10 साल पहले ली गई थी, और वहां कोयला खनन भी जारी है, मगर ऐसे अनेक भुविस्थपित हैं जिन्हें अब तक नौकरी नहीं दी गई है। तकनीकी पेंच फंसा कर उन्हें घुमाया जा रहा है।

भूविस्थापितों की मदद नहीं कर रहा प्रशासन

धरने पर बैठी निरूपा बाई का आरोप है कि एस ई सी एल उनके साथ नाइंसाफी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन भी उनकी मदद नहीं कर रहा है। इतने सालों बाद भी अगर प्रभावितों को नौकरी नहीं मिली है तो इसके लिए प्रशासन के अधिकारी भी जिम्मेदार हैं। प्रभावितों में अनेक महिलाएं भी शामिल हैं जिन्हें नौकरी नहीं दी जा रही है।

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प्रशासन हाईकोर्ट जाने की दे रहा है सलाह…

इस मुद्दे पर जब टीआरपी न्यूज़ ने कटघोरा एसडीएम अभिषेक शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा कि भुविस्थपितों को नौकरी नहीं मिली है तो इसके लिए प्रशासन नहीं बल्कि एसईसीएल प्रबंधन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि पात्र होते हुए भी जिन भुविस्थपितों को नौकरी नहीं मिली है उन्हें हाईकोर्ट जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन इस मुद्दे पर एसईसीएल प्रबंधन से लगातार पत्र व्यवहार कर रहा है।

उलझ कर रह गई है भूविस्थपितो की समस्या

एसईसीएल प्रबंधन ( South Eastern Coal Fields Limited ) ने कोरबा जिले के कई गावों में लोगों की जमीनें कोयला खदान के लिए अधिग्रहित की है, इनमें से अनेक लोग अब भी नौकरी की राह तक रहे हैं, हालांकि नौकरी नहीं मिलने की वजह अलग-अलग है। एसईसीएल प्रबंधन स्पष्ट रणनीति अपनाने की बजाय गोलमोल जवाब देकर प्रशासन और भूविस्थपित, दोनों को गुमराह कर रहा है। वहीं अनेक विस्थापितों ने ऐसे मामलों में हाईकोर्ट की शरण भी की है। बहरहाल इस मामले में एसईसीएल प्रबंधन क्या रुख अपनाता है, इसका प्रभावितों को इंतजार है।

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