छत्तीसगढ़ विधानसभा

रायपुर। विधानसभा बजट सत्र के तीसरे दिन ध्यानाकर्षण के दौरान भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने किडनी के रोगों से गंभीर रूप से प्रभावित सुपेबेड़ा गांव की पेयजल योजना की ओर सरकार का ध्यान खींचा।

जवाब देने उठे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) मंत्री गुरु रुद्र कुमार ने कहा, 2009 से लेकर अब सुपेबेड़ा गांव में 151 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन इन लोगों की मौत पानी की वजह से नहीं किन्हीं दूसरे कारणों से हुई है।

पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि किसी गांव में इतने लोगों की मौत किडनी की बीमारी से हो जाए। 2019 में स्वास्थ्य मंत्री वहां गए थे, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री गये थे। वहां पेयजल योजना का वादा किये लेकिन दो साल में उसका टेंडर तक नहीं हो सका। उधर सुपेबेड़ा गांव में लोगों ने होर्डिंग लगा दी है। लोगों की जान जा रही है और यहां टेंडर प्रक्रिया ही चल रही है। विभागीय मंत्री कह रहे हैं कि अभी फाइल वित्त विभाग के पास लंबित है। ऐसा कभी नहीं हुआ कि पूरा गांव कलेक्टर के पास जाकर कहे कि उनको इच्छा मृत्यु की अनुमति दी जाए।

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बृजमोहन अग्रवाल ने पूछा कि क्या सरकार युद्धस्तर पर अभियान चलाकर सुपेबेड़ा में स्वच्छ पानी की आपूर्ति कर सकती है। भाजपा विधायक नारायण चंदेल ने कहा, सरकार एक गांव को दो साल में पीने का साफ पानी मुहैया नहीं करा पाई यह दुर्भाग्यजनक है।

जवाब में PHE मंत्री गुरु रुद्र कुमार ने कहा, सुपेबेड़ा में साफ पानी का प्रबंध हम करेंगे। उन्होंने कहा, इस सरकार के कार्यकाल में ही यह परियोजना पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने कहा, सरकार की मंशा है कि जो योजना बनाई गई है उस पर जल्द काम शुरू हो। उन्होंने कहा, पेयजल योजना पर जल्दी ही काम शुरू हो जाएगा।

भाजपा विधायक शिवतरन शर्मा ने कहा, PHE मंत्री कह रहे हैं वहां दूषित पानी से किसी की मौत नहीं हुई। स्वास्थ्य मंत्री के बयान में मौतों की वजह दूषित पानी को बताया जा रहा है। इसमें सही क्या है। जवाब में PHE मंत्री गुरु रुद्र कुमार ने कहा, स्वास्थ्य विभाग ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दूूषित पानी की वजह से किसी की मौत नहीं हुई है।

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चंद्राकर के टोकाटोकी से गरमाया सदन

पीएचई मंत्री के बयान के बाद विपक्ष आक्रामक हो गया। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा, आप विशेषज्ञ हैं क्या? आप कैसे कह सकते हैं कि वहां दूषित पानी से किसी की मौत नहीं हुई। इसके बाद वहां हंगामा हो गया। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने विरोध स्वरूप सदन से वॉकआउट कर दिया।

किड़नी की बीमारी से जूझ रहा है सुपेबेड़ा

बता दें कि गरियाबंद जिले के सुपेबेड़ा और आसपास के दर्जन भर गांवों से जुड़ा है। पिछले एक दशक से यह इलाका किडनी की गंभीर बीमारी से प्रभावित है। अक्टूबर 2019 में राज्य सरकार ने माना कि यहां के भूमिगत जल में भारी धातु की मात्रा अधिक है। इसकी वजह से किडनी खराब होने की संभावना बढ़ गई है।

सरकार ने यहां के लिए तेल नदी से पानी लेकर नलजल योजना का वादा किया था। बजट में इसका प्रावधान भी हुआ लेकिन काम शुरू होकर बंद हो गया। विरोध जताने के लिए सुपेबेड़ा के ग्रामीण पिछले दिनों मुख्यमंत्री निवास तक पहुंचे थे।

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