एसईसीएल की छाल परियोजना के विस्तार को लेकर हुई सुनवाई, पुराने डाटा के आधार पर तैयार ईआईए रिपोर्ट का विरोध
एसईसीएल की छाल परियोजना के विस्तार को लेकर हुई सुनवाई, पुराने डाटा के आधार पर तैयार ईआईए रिपोर्ट का विरोध

रायगढ़। साऊथ इस्टर्न कोल फिल्ड्स लिमिटेड, रायगढ़ एरिया के छाल ओपन कास्ट प्रोजेक्ट के विस्तार के लिए पर्यावरणीय लोक सुनवाई का आयोजन किया गया। इस दौरान यहां मौजूद सैकड़ों लोगों ने अपनी बात रखी। इनमें से किसी ने कोयला खदान के विस्तार का समर्थन किया तो किसी ने तर्कसंगत ढंग से विरोध भी किया।

रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ तहसील के ग्राम नवापारा में यह सुनवाई हुई, जिसमें छाल कोयला खदान की क्षमता 3.50एम टी पीए से बढ़ाकर 7.50 एम टी पीए करने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। खदान विस्तारके लिए 1342.86 हेक्टेयर जमीन ली जा रही है। इसकी लोक सुनवाई में लगभग हजार लोग एकत्र हुए। इनमें से कुछ प्रमुख लोगों ने विस्तार से अपनी बात कही, जबकि अन्य लोगों ने हाथ उठाकर समर्थन और विरोध जताया।

ईआईए रिपोर्ट पर उठाया सवाल

पर्यावरणीय लोक सुनवाई में प्रस्तावित परियोजना के इलाके में पड़ने वाले प्रभाव पर ईआईए रिपोर्ट प्रस्तुत करना होता है। परियोजना का विरोध करने वालों ने अपनी बात रखते हुए कहा कि एसईसीएल ने सन 2017 के डाटा के आधार पर ईआईए रिपोर्ट तैयार किया है जबकि पर्यावरण मंत्रालय के मुताबिक डाटा 3 साल से ज्यादा पुराना नहीं होना चाहिए, इस संबंध में एसईसीएल का कहना था कि कोरोना के प्रकोप के चलते सुनवाई में 1 साल का विलंब हुआ है, हालांकि 1 साल के विलंब को भी जोड़ दिया जाए तब भी एसईसीएल द्वारा प्रस्तुत डाटा उससे भी पुराना है।

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अनेक प्रभावितों को अब तक नौकरी और मुआवजा नहीं

कोयला खदान विस्तार का विरोध कर रहे जन चेतना संगठन के राजेश त्रिपाठी ने बताया कि छाल कोयला खदान परियोजना सन 2006 में शुरू हुई तब से लेकर अब तक 17 साल बीत चुके मगर आज भी इस खदान के अनेक प्रभावितों को नौकरी और मुआवजा नहीं मिल सका है। ऐसे में पुराने प्रकरणों को निपटाये बिना खदान के विस्तार की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा पेशा कानून के तहत आदिवासी बहुल इलाकों में ग्राम सभा का कोई भी आयोजन नहीं किया गया है जो कि पेशा कानून का उल्लंघन है।

पर्यावरणीय प्रभाव की स्वतंत्र टीम से अध्ययन कराने की मांग

कोयला खदान के विस्तार की ईआईए रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद इसका विरोध कर रहे संगठनों ने मांग की है कि इस परियोजना का केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की स्वतंत्र टीम के माध्यम से इस क्षेत्र की जमीनी स्तर पर अध्ययन के बाद रिपोर्ट तैयार की जाए। इसके बाद जनसुनवाई फिर से करवाई जाए।

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बहरहाल रायगढ़ जिले में एक और परियोजना की पर्यावरण प्रभाव की सुनवाई हो चुकी है। हर बार की तरह इस बार भी विरोध में हाथ तो उठे हैं, लेकिन लोगों का मानना है कि इस लोक सुनवाई के बाद प्रस्तावित परियोजना को भी किसी तरह से स्वीकृति दे दी जाएगी।