Covid रोगियों के लिए बड़े काम का साबित हो सकता है ये Pocket Ventilator वजन है मात्र 250 ग्राम, जानिए इसकी खूबियां

टीआरपी डेस्क। कोरोना (Corona) महामारी के दौरान मरीजों का ऑक्सीजन लेवल (Oxygen) कम होना एक बड़ी समस्या है और ऑक्सीजन के लिए घटते लेवल में वेंटिलेटर मददगार साबित होता है। मगर इस महामारी में वेंटिलेटर की काफी कमी है, लेकिन पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के डॉक्टर रामेंद्रलाल मुखर्जी (Dr.Ramendra Lal Mukherjee) ने कोरोना रोगियों के लिए ‘पॉकेट वेंटिलेटर’ (Pocket Ventilator) का आविष्कार किया है, यह कोरोना रोगियों के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।

बता दें कि कुछ दिन पहले खुद डॉ. रामेंद्रलाल मुखर्जी और उनका पुत्र, जो IIT कानपुर का छात्र है, कोरोना से संक्रमित हुए थे। उन्होंने एक चैनल से बातचीत करते हुए कहा कि उनका ऑक्सीजन स्तर 85 तक पहुंच गया था। उस समय उन्होंने कोविड मरीजों के लिए वेंटिलेटर की जरूरत को समझा, ताकि रोगियों को उस स्थिति में उन्हें अस्पताल में भर्ती न करना पड़े और Pocket Ventilator के आविष्कार के बारे में सोचने लगे थे। स्वस्थ होने के बाद से ही वेंटिलेटर बनाने का काम शुरू कर दिया। लगभग उन्होंने 20 दिनों में उन्होंने पॉकेट वेंटिलेटर बना लिया।

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Pocket Ventilator चार्ज होने के बाद 8 घंटे तक करता है काम

इस पॉकेट वेंटिलेटर का वजन मात्र 250 ग्राम है। एक बार फुल चार्ज होने पर यह 8 घंटे तक काम कर सकता है और इसे साधारण मोबाइल चार्जर से आसानी से चार्ज किया जा सकता है। इस पूरे उपकरण में दो भाग हैं। एक पावर यूनिट है, दूसरा माउथपीस है। सामने का हिस्सा मूल रूप से एक वेंटिलेटर इकाई है। जब यह उपकरण चालू होता है, तो वेंटिलेटर अल्ट्रा-वायलेट चैंबर के माध्यम से हवा को शुद्ध करता है और इसे फेफड़ों में भेजता है। इस बीच, यदि रोगाणु रहता है, तो पराबैंगनी चैंबर के माध्यम से हवा से गुजरते समय वह मर जाता है। उसी तरह जब रोगी सांस छोड़ता है, तो रोगाणु पराबैंगनी कक्ष के माध्यम से मर जाते हैं। डॉ. रामेंद्रलाल मुखर्जी का मानना ​​है कि इस वेंटिलेटर का इस्तेमाल अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाली CPAP या कंटीन्यूअस पॉजिटिव एयरवे प्रेशर मशीन के विकल्प के तौर पर किया जा सकता है।

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अभी तक 30 आविष्कारों का पेटेंट करा चुके हैं डॉ रामेंद्रलाल

बता दें कि डॉ रामेंद्रलाल मुखर्जी के पास 30 आविष्कारों का पेटेंट हैं। भारत के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार विजेता भी हैं। डॉक्टर ने इस उपकरण के लिए पेटेंट के लिए आवेदन किया है, इसमें उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुरूप ऑक्सीजन और नाइट्रोजन के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए बिजली इकाई में एक नियंत्रण घुंडी भी लगाई गयी है। चूंकि अल्ट्रा- वायलेट (यूवी) सिस्टम द्वारा हवा को साफ़ किया जाता है, इसलिए ब्लैक फंगस का कोई खतरा नहीं होता है, जो फिलहाल एक नयी समस्या बनी हुई है।

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