ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ सरकार की सख्ती, फ्लैश सेल पर लगाया जा सकता है बैन
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टीआरपी डेस्क। धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार ने देश के ई-कॉमर्स नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया है। सरकार इन सुधारों से अनुचित व्यापार के तरीकों को रोकने की कोशिश कर रही है। उसमें ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा के लिए कई नए प्रावधान सुझाए गए हैं। साथ ही फ्लैश सेल पर बैन और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की ओर से नियमों को नहीं मानने पर कार्रवाई शामिल है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि प्लेटफॉर्म पर थर्ड-पार्टी सेलर की फ्लैश सेल पर बैन नहीं लगेगा।

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प्रस्तावित संशोधनों में ई-कॉमर्स संस्थाओं को किसी भी कानून के तहत अपराधों की रोकथाम, पता लगाने और जांच और अभियोजन के लिए सरकारी एजेंसी से आदेश प्राप्त होने के 72 घंटे के भीतर सूचना प्रदान करनी होगी। उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 को पहली बार पिछले साल जुलाई में अधिसूचित किया गया था। इसके उल्लंघन में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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प्रस्तावित नियमों पर 6 जुलाई तक भेज सकते हैं सुझाव

जानकारी अनुसार, केंद्र सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण (ई-कॉमर्स) नियम, 2020 (Consumer Protection (E-commerce) Rules, 2020) में संशोधन करने के लिए सुझाव आमंत्रित किए हैं। सरकार ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर गलत जानकारी और बंपर छूट के साथ धोखाधड़ी पूर्ण बिक्री पर प्रतिबंध लगाने और डीपीआईआईटी के साथ इन कंपनियों का पंजीकरण अनिवार्य करने का प्रस्ताव रखते हुए सुझाव मांगा है।

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इसके अलावा सरकार इंटरनेट पर खोज परिणामों में हेराफेरी करके उपयोगकर्ताओं को गुमराह करने पर प्रतिबंध और मुख्य अनुपालन अधिकारी एवं निवासी शिकायत अधिकारी की नियुक्ति सहित कुछ अन्य संशोधनों पर भी विचार कर रही है। मंत्रालय ने कहा है कि उद्योग निकाय और ई-कॉमर्स फर्मों के लिए प्रस्तावित नियमों पर अपना सुझाव और टिप्पणी 6 जुलाई तक भेज सकते हैं।

ई-कॉमर्स रियायती बिक्री पर नहीं होगा प्रतिबंध 

सरकार ने एक अलग बयान में कहा कि उसे पीड़ित उपभोक्ताओं, व्यापारियों और संघों से ई-कॉमर्स प्रक्रिया में व्यापक धोखाधड़ी और अनुचित व्यापार प्रथाओं के खिलाफ शिकायत के कई अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं। हालांकि मंत्रालय ने कहा कि पारंपरिक तौर पर आयोजित होने वाली ई-कॉमर्स रियायती बिक्री पर प्रतिबंध नहीं होगा। केवल विशिष्ट तौर पर ग्राहकों को घेरने के लिहाज से की जाने वाली बिक्री या बार-बार फ्लैश बिक्री, कीमतों में वृद्धि करती है तथा सबके के लिए एक समान अवसर वाला मंच उपलब्ध कराने से रोकती है, ऐसी बिक्री की अनुमति नहीं होगी।

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ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में पारदर्शिता लाना

मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में पारदर्शिता लाना और नियामक व्यवस्था को और मजबूत करना है। सरकार स्थानीय उत्पादों की बिक्री को प्राथमिकता देना, ई-रिटेलरों का उद्योग और आंतरिक व्यापार विभाग के पास अनिवार्य रजिस्ट्रेशन जैसे नियम शामिल हैं। केंद्र सरकार के इस कदम का मकसद ग्राहकों के प्रति कंपनियों को जवाबदेह बनाना और नियामकीय व्यवस्था को सख्त बनाना है।

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