कोरबा जिले में DMF में गड़बड़ी पर कार्रवाई जारी, इंजीनियर बने शिक्षक को किया निलंबित, विकास सहायक को कर दिया बर्खास्त

कोरबा। DMF में सर्वाधिक भ्रष्टाचार के लिए मशहूर कोरबा जिले में नए कलेक्टर की पदस्थापना के साथ ही इससे जुड़े शासकीय सेवकों पर कार्रवाई शुरू हुई है। इसके तहत पहली कार्रवाई उस शिक्षक पर की गई जो लगभग दो दशक से TWD में इंजिनियर का काम देख रहा था। वहीं जिले के DMF कार्यालय में पदस्थ विकास सहायक को बर्खास्त कर दिया गया है, जिसने कमीशन नहीं मिलने पर ठेकेदारों का दो साल पुराना भुगतान रोक रखा था।

स्वीकृत कार्य की जगह दूसरा कार्य करा दिया

कोरबा जिले में कलेक्टर रानू साहू की पदस्थापना के साथ ही DMF सहित अन्य कार्यों में गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें शुरू हो गईं हैं। इन मामलों की जांच के साथ ही त्वरित कार्रवाई भी हो रही है। पहला मामला TWD याने आदिवासी विकास विभाग का है, जहां पदस्थ शिक्षक अमरेश तिवारी ने सालों पहले विभाग मुख्यालय से आदेश करवाकर यहां के सब इंजीनियर का कामकाज संभल लिया था।

अमरेश तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने कटघोरा में बालक छात्रावास निर्माण के लिए स्वीकृत 34 लाख रूपये से उक्त मूल कार्य न कराकर सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बिना ही पुराने भवन का रेनोवेशन कार्य स्वयं निर्णय लेकर करा दिया। इसके अलावा उन्होंने DMF के लाखों रूपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। जांच में दोषी पाए जाने पर सब इंजीनियर अमरेश तिवारी (मूल पद प्रधान पाठक) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करते हुए उन्हें BEO कार्यालय पाली में अटैच कर दिया गया है।

सेवावृद्धि निरस्त कर किया गया बर्खास्त

कलेक्टर रानू साहू द्वारा की गई अगली कार्रवाई में DMF के कोरबा जिला कार्यालय में पदस्थ विकास सहायक मनोज कुमार टंडन को सेवा से मुक्त कर दिया गया। संविदा के तौर पर नियुक्त मनोज टंडन डीएमएफ में शुरू से ही विकास सहायक के तौर पर कामकाज देख रहे थे। उन पर निर्माण कार्य की स्वीकृति, कार्य एजेंसी, निर्माण राशि जारी करना, संबंधित ठेकेदारों का भुगतान के जैसे मत्वपूर्ण कार्यों में कमीशन खोरी के गंभीर आरोप हैं। मनोज टंडन के आदेश में उल्लेख है कि 05 मार्च 2021 को उनकी सेवा अवधि में की गई वृद्धि को निरस्त करके उनकी संविदा नियुक्ति समाप्त की जाती है।

पूर्व गृहमंत्री ने भी की थी शिकायत

प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और विधायक ननकी राम कँवर ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से शिकायत की थी कि उनके विधानसभा क्षेत्र में DMF के मद से अनेक कार्य हो चुके हैं, मगर संबंधितों को अब तक भुगतान नहीं किया गया है। शिकायत की पुष्टि के बावजूद पूर्व कलेक्टर द्वारा कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। इस मामले में अब जाकर विकास सहायक मनोज टंडन को बर्खास्त किया गया है।

क्या दूसरों का नम्बर आएगा..?

कोरबा जिले में DMF के फंड में करोड़ों की गड़बड़ी का मामला पुराना है, मगर अब तक की गई कार्रवाई में EOW द्वारा पूर्व सहायक आयुक्त आदिवासी श्रीकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई और विभाग द्वारा निलंबन, TWD के निर्माण शाखा के प्रभारी अरुण दुबे का निलंबन और अब विकास सहायक तथा सब इंजिनियर के खिलाफ कार्रवाई। सच तो यह है कि DMF में तत्कालीन कलेक्टर से लेकर अब तक के अधिकारी और शाखा से जुड़े लोगों की संलिप्तता स्पष्ट नजर आती है। सवाल यह है कि कोरबा कलेक्ट्रेट में संचालित DMF के जिला कार्यालय में पदस्थ विकास सहायक द्वारा जब कमीशन के लिए एजेंसियों का भुगतान दो-दो साल तक रोककर रखा गया तब वहां पदस्थ कैशियर और नोडल अधिकारी द्वारा क्या किया जा रहा था। इन पर जिले के बड़े अधिकारियों का संरक्षण भी साफ दिखाई देता है।

निलंबन के बाद नहीं हुई विभागीय जाँच

शासकीय नियम के तहत किसी भी कर्मचारी-अधिकारी के खिलाफ प्रारंभिक जाँच में गड़बड़ी उजागर होने के बाद सबसे पहले उसे निलंबित किया जाता है, फिर 90 दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए उसकी विभागीय जाँच शुरू की जाती है, मगर TWD में निर्माण शाखा के प्रभारी अरुण दुबे को DMF के कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित तो किया गया लेकिन बहाल करने के बाद तत्कालीन सहायक आयुक्त एनकेएस दीक्षित ने विभागीय जाँच का आदेश ही नहीं दिया। इससे एक कदम आगे अरुण दुबे को उसी निर्माण शाखा की जिम्मेदारी दे दी गई, जहां उसने गड़बड़ी की थी। जबकि नियम यह है कि अधिकारी-कर्मचारी को उसी शाखा तो क्या उस कार्यालय में भी पदस्थ नहीं किया जा सकता, जहां से उसका निलंबन किया गया था।

कोरबा जिले में भाजपा के शासनकाल से लेकर अब तक DMF के फंड में जमकर भ्रष्टाचार किया गया है, और यही वजह है कि ऊपर से लेकर नीचे तक का अमला एक दूसरे को संरक्षण देता रहा। बहरहाल देखना है कि जिले की नई मुखिया DMF में होने वाले भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा पाती हैं या फिर सब कुछ ढर्रे पर ही जारी रहेगा।

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