अनिश्चित काल के लिए मंगलवार से थम जाएंगे 12 हजार बसों के पहिये... 40 फीसदी किराया वृद्धि की है मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में 13 जुलाई से अनिश्चित काल के लिए करीब 12 हजार बसों के पहिए थम जाएंगे। ऐसा इसलिए है, क्योंकि सरकार छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ द्वारा की गईं मांगों को पूरा नहीं कर रही है। एक अनुमान के मुताबिक हर रोज सिर्फ रायपुर से ही 5 लाख लोग प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बसों के जरिए सफर करते हैं।

16 महीने से प्रभावित है यात्री बसों का संचालन

सरकार करीब 2 महीने से बस संचालकों की मांग को नजरअंदाज कर रही है। यातायात महासंघ का कहना है कि कोरोना और लॉकडाउन के कारण बस संचालकों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो चुकी है। पिछले 16 महीने से यात्री बसों का संचालन नहीं के बराबर हो रहा है। यातायात महासंघ का कहना है कि साल 1997 में प्रति लीटर डीजल की कीमत 60 रुपए थी। जो आज बढ़कर 97 रुपए के पार हो गई है। जबकि दूसरे राज्यों में यात्री किराया में सरकार ने वृद्धि की है। छत्तीसगढ़ के बस संचालकों के हितों की ओर भी सरकार को ध्यान देने की जरूरत है।

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10% बसों का हो रहा संचालन

पूरे प्रदेश में लगभग 12000 यात्री बस हैं। जिनका संचालन पूरी तरह से शुरू नहीं हो पाया है। पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों के चलते बस संचालक सरकार से यात्री बसों में लगभग 40% किराया बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। वर्तमान में प्रति किलोमीटर 1 रुपया किराया है। जिसको बढ़ाकर 1.40 रुपये करने की मांग कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बस मालिकों का कहना है कि डीजल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यात्री किराया में वृद्धि की मांग पूरी नहीं होने के कारण छत्तीसगढ़ में लगभग 1000 बसों का ही संचालन हो रहा है।

बसों से जुड़ी है 1 लाख से ज्यादा लोगों की रोजी-रोटी

यात्री बस के व्यवसाय से जुड़े बस मालिक, ड्राइवर, कंडक्टर, हेल्पर और क्लीनर सहित लगभग 1 लाख 8 हजार लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित हुई है। बस मालिकों का कहना है कि मध्यप्रदेश, ओडिशा, झारखंड, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में लगभग 30 से 35 प्रतिशत तक यात्री किराया बढ़ाया जा चुका है। लेकिन छत्तीसगढ़ में लंबे समय से यात्री किराया नहीं बढ़ाया गया।

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क्या है समस्या

पूरे छत्तीसगढ़ में 12000 बस और 9000 बस संचालक हैं। छत्तीसगढ़ में 2500 बसों का किस्त जमा ना हो पाने के कारण फाइनेंसर ने बसों को सीज कर लिया। करीब 1000 बस संचालक ऐसे हैं जिनके परिवार में कोरोना हो जाने के कारण और एम फॉर्म न भरने की वजह से लाखों रुपए की टैक्स की मार पड़ी है। इसके साथ ही बसें भी कंडम हो गई है. छत्तीसगढ़ में 9000 बस ऑपरेटर बस व्यवसाय से जुड़े हैं। लेकिन लगातार घाटा होने के कारण 300 बस ऑपरेटर इस व्यवसाय को छोड़कर दूसरा व्यवसाय कर रहे हैं।

क्या है 2 सूत्रीय मांग 

1. डीजल के बढ़ते रेट को देखते हुए यात्री किराया में 40 फ़ीसदी तक बढ़ोतरी।

2. बसों के निष्प्रयोग की 2 माह की समय सीमा के कानून को समाप्त करने की मांग।

आज सरकार ने हमारी मांगों को पूरा नहीं किया हमारी बातों को नहीं माना तो कल से हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। डीजल के रेट को देखते हुए 40% किराया वृद्धि करनी होगी और 2009 में केंद्र के द्वारा जो कानून लाया गया था, जिसमें लिखा गया है कि साल के सिर्फ 2 महीने टैक्स नहीं लिया जाएगा, उसके बाद भी यदि गाड़ी खड़ी रखी जाती है तो टैक्स लिया जाएगा। इस काले कानून को बदला जाये और जिस गाड़ी का संचालन हम ना करें उसका टैक्स हमसे ना लिया जाए। हम तो 40 फीसदी किराया बढ़ोतरी पर भी मानने को तैयार है।

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प्रमोद दुबे
संरक्षक, बस ऑपरेटर एसोसिएशन 

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