2022 में पूरी तरह से बैन हो सकता है ‘Single Use Plastic’
Image Source : Google

टीआरपी डेस्क। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को संसद में कहा कि कैंडी और आइसक्रीम की प्लास्टिक से बनीं स्टिक का उपयोग एक जनवरी, 2022 से चरणबद्ध तरीके से बंद हो सकता है। एक बार इस्तेमाल योग्य प्लास्टिक का उपयोग चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के सवाल पर जवाब देते हुए पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि इस साल की शुरुआत में जारी मसौदा अधिसूचना के अनुसार एकल उपयोग वाली प्लास्टिक के कुछ चिह्नित पदार्थों का उत्पादन, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग एक जनवरी, 2022 से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

यह भी पढ़े: अगले तीन दिनों में राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को कोविड-19 टीके की 44.9 लाख डोज उपलब्ध कराएगी केंद्र सरकार

ऐसा प्लास्टिक जिसका उपयोग हम केवल एक ही बार करते है उसे सिंगल यूज़ प्लास्टिक कहा जाता है। साधारण भाषा में हम लोग इसे डिस्पोजेबल प्लास्टिक कहते हैं। एक जनवरी से जिन वस्तुओं का उपयोग समाप्त किया जा सकता है, उनमें ईयरबड की प्लास्टिक स्टिक, गुब्बारों, आईसक्रीम और कैंडी की स्टिक, प्लास्टिक के झंडे आदि हैं। वहीं 100 माइक्रोन से कम प्लास्टिक से बने प्लेट, कप, ग्लास, कांटे, चम्मच, चाकू, स्ट्रॉ, कंटेनर और कंटेनरों के ढक्कन, ट्रे आदि का उपयोग अगले साल जुलाई से बंद किया जा सकता है।

See also  RBI Governor Shaktikanta Das: RBI गवर्नर शक्तिकांत दास का दूसरी बार कार्यकाल बढ़ा सकती है सरकार, 20 नवंबर के बाद जारी हो सकती है अधिसूचना

यह भी पढ़े: कोरोना से विदेशों में 3570 भारतीय नागरिकों की मौत, राज्यसभा में केंद्र सरकार ने जारी किया आंकड़ा

बता दें, केंद्र सरकार ने शुक्रवार को कहा कि वैश्विक विमानन क्षेत्र से निकलने वाली कॉर्बन डाईऑक्साइड ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन की करीब दो फीसदी है तथा विकसित देशों की ओर से अतीत में किए गए उत्सर्जन के कारण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियां पैदा हुईं। पर्यावरण राज्य मंत्री अश्विनी चौबे ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह टिप्पणी की।

यह भी पढ़े: केंद्र सरकार 24 जून को कर सकती है जम्मू-कश्मीर की सभी क्षेत्रीय पार्टियों के साथ बातचीत, 14 नेताओं को बुलाए जाने की चर्चा

उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा संधि (यूएनएफसीसी) के अनुसार, वैश्विक तापमान में बढ़ोतरी कई मानवीय गतिविधियों का परिणाम है जिनमें विमानन भी शामिल है। बहरहाल, वैश्विक विमानन गतिविधि से निकलने वाली कार्बन डाईऑक्साइड कुल ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन का करीब दो फीसदी है।’’ मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर समन्वित प्रयासों की जरूरत है।

See also  दिल्ली-मुंबई एयरपोर्ट में एक ही दिन 100 करोड़ का अवैध माल जब्त

Hindi News के लिए जुड़ें हमारे साथ हमारे फेसबुक, ट्विटरटेलीग्राम और वॉट्सएप पर