खारून नदी पर भी कोरोना की मार... अपने जीवन के लिए ही तरस रही है लाखों की प्यास बुझाने वाली खारून

दावा दिसंबर 2021 तक पूरा होगा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट 

रायपुर। कोरोना काल में शहर की जीवन-दायिनी खारुन नदी भी जीवन के लिए तरस रही है। बता दें कि इस नदी का पानी शहर के 1.10 लाख से ज्यादा वैध कनेक्शनधारियों के घरों तक पहुंचता है। इतना ही नहीं इसी नदी से बालोद, दुर्ग और धमतरी शहर की भी प्यास बुझती है।

नगर निगम रायपुर ने खारुन को गंदगी से मुक्त करने के लिए तीन जगहों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने की योजना बनाई है। मगर कोरोना काल के कारण सारा मामला अधर में अटका हुआ है। एसटीपी लगाने के लिए निगम ने तीन साल पहले प्रोजेक्ट तैयार किया था। 2020 के पहले इस कार्य को पूरा हो जाना था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हुआ है। अब निगम का दावा है कि दिसंबर 2021 तक यह काम पूरा कर लिया जाएगा।

खारून की गंदगी के बड़े कारण

1. सरोना ट्रेंचिंग ग्राउंड के गंदा पानी का मिलना

2. भाठांगांव के पास इंटेकवेल के नाले का गिरता है पानी

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3. महादेव घाट, काठाडीह, रायपुरा सहित अन्य इलाकों के नालों का गंदा पानी सीधे खारुन में

4. नालों के पानी का नहीं हो पा रहा ट्रीटमेंट

261 करोड़ की लागत से खारुन में मिलने वाले नालों में लगेंगे तीन एसटीपी

खारुन नदी में रायपुर जिले के 17 बड़े नालों का गंदा पानी वर्तमान में जा रहा है। एसटीपी लगने के बाद नालों के पानी को प्लांट में ही रोककर पानी को साफ किया जाएगा उसके बाद खारुन नदी में पानी छोड़ा जाएगा। प्लांट में ही पॉलीथिन को भी अलग करने का काम किया जाएगा। पानी को साफ करने के लिए शहर के आउटर में एसटीवी लगाए जाने की योजना है।

  • चंदनीडीह- 75 एमएलडी
  • कारा- 35 एमएलडी
  • निमोरा- 90 एमएलडी

इन नालों में लग रहे हैं एसटीपी-

गोवर्धन नाला, वंडर पार्क नाला, अटारी नाला, तेंदुआ नाला, छोकरा नाला, अछोली नाला। गंदे नालों का पानी छह इंटक चैंबर एवं कुल 11.78 किमी लंबे आरसीसी पाइप के माध्यम से एसटीपी तक ग्रेविटी फ्लो के साथ पहुंचाया जाएगा। पानी पूरी तरह से साफ हो जाएगा। सभी नालों को पाइप-लाइन के जरिए इंटरकनेक्ट किया जाएगाा। इससे खारून में गंदगी का स्तर कम हो जाएगा।

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कहां आ रही परेशानी

निगम के अधिकारियों का कहना है कि मिशन खारुन क्लीन के तहत पूरे 11 किलोमीटर तक पाइप लाइन बिछानी है, लेकिन अभी तक आठ किमी बिछ पाई है। सरोना में तीन किमी पाइप लाइन बिछाने में 10 से 12 किसान अपने खेतों से पाइप लाइन बिछाने के लिए आपत्ति कर रहे हैं। निगम इन किसानों से बातचीत कर समस्या के निदान में लगा है।

बरसात में गंदगी का अंबार

ठंड, बरसात में पानी अपेक्षाकृत बरसात के दिनों से साफ होता है, मगर अभी टर्बिडिटी (गंदगी) 1000 पार्ट्स पर मिलियन) पीपीएम तक जा पहुंची है। सामान्य दिनों में यह 10-15 पीपीएम के बीच होती है यानी गंदगी 100 गुना अधिक है। नग्न आंखों से भी खारुन का पानी पूरी तरह मटमैला दिखाई पड़ रहा है।  नगर निगम इस पानी को 15 गुना अधिक केमिकल (एलम यानी फिटकरी) से साफ कर रहा है। इसके बाद सम्पबेल से टंकियों और वहां से घरों तक पहुंचाया जाता है।

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टर्बिडिटी क्या है

टर्बिडिटी यानि की गंदगी। सामान्य दिनों में नदी का पानी साफ रहता है, मगर बरसात में गंदा-मटमैला हो जाता है।

जल आपूर्ति का खर्त 40 करोड़ रुपए

निगम खारून से पानी लेकर फिल्टर कर घरों तक पहुंचाता है। जल शुद्धिकरण का सालाना खर्च 2.5 से तीन करोड़ बैठता है। लेकिन बिजली बिल, कैमिकल की खरीदी सब कुछ मिलाकर 40-42 करोड़ रुपये तक खर्च आता है।

वर्जन
कोरोना महामारी एसटीपी लगाने का काम रुका था। ठेकेदार को अब दिसंबर 2021 तक का समय समय दिया है। 60 फीसदी काम हो चुका है। आठ किमी से ज्यादा पाइप लाइन बिछ गई है। शेष पाइप लाइन बिछाने में कुछ किसान आपत्ति कर रहे हैं। जल्द ही इन किसानों से बातचीत करके समस्या का हल निकाला जाएगा।

पुलक भट्टाचार्या
अपर आयुक्त नगर निगम, रायपुर

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