chhattisgarhi Rajbhasha ayog
छत्तीसगढ़ी भाखा को राजभाषा का दर्जा दिलाने मानों आयोग में ही सिमट कर रह गया है। विभाग में न तो स्थाई सचिव नियुक्त किया गया है और न ही वर्तमान में कोई अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति सम्भव हो पाई हैं।

दामिनी बंजारे 

रायपुर। एक तरफ छत्तीसगढ़ सरकार छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान की लड़ाई लड़ रही है। वहीं विगत दो वर्षो से आयोग में अध्यक्ष का ही पद खाली पड़ा हैं। बता दें कि जहां छत्तीसगढ़ी भाखा को राज्य भाषा का दर्जा दिलाने के लिए सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग विधेयक को 28 नवम्बर 2007 को पारित किया था साथ ही 11 जुलाई 2008 को राजपत्र में प्रकशित किया गया था।

आयोग द्वारा प्रति वर्ष प्रांतीय सम्मेलन का भी आयोजन किया जा रहा है, लेकिन छत्तीसगढ़ी भाखा को राजभाषा का दर्जा दिलाने मानों आयोग में ही सिमट कर रह गया है। विभाग में न तो स्थाई सचिव नियुक्त किया गया है और न ही वर्तमान में कोई अध्यक्ष के पद पर नियुक्ति सम्भव हो पाई हैं। वर्तमान में शासन द्वारा आयोग के सचिव पद पर डॉ. अनिल कुमार भतपहरी को कार्यभार सौपा गया है।

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छत्तीसगढ़ी भाखा के लुप्त हो रहे शब्दों को संग्रहित करने के लिए आयोग द्वारा ‘बिजहा कार्यक्रम’ चलाया जा रहा है। इसी प्रकार माई कोठी योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ एवं छत्तीसगढ़ी में लिखे साहित्य कितबों का एकत्रीकरण किया जा रहा है, लेकिन ये दोनों योजनाएं कागजों में ही रह गई है। वर्तमान में योजनओं की जानकारी तो आम नागरिक को भी नहीं है। लोक सेवा आयोग द्वारा संचालित चयन परीक्षाओं में भी इन योजनाओं से संबंधित सवाल पूछा जाता है। मगर क्या इस तरह इन दोनों योजनाओं को आगे चलाया जा सकेगा यह भी आयोग के के लिए चुनौती बनी हुई है।

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क्या है ‘बिजहा कार्यक्रम’

आयोग द्वारा छत्तीसगढ़ी के लुप्त होते शब्दों को संग्रहित करने हेतु ‘बिजहा कार्यक्रम’ प्रारंभ किया गया है। जिसका उद्देश्य प्रचलन से बाहर हो रहे शब्दों को संग्रह करने की योजना है। इस कार्यक्रम के तहत आयोग द्वारा मात्र एक किताब पुनीत गुरुवंश द्वारा लिखी शब्दसागर छत्तीसगढ़ी शब्दकोश ही प्रकाशित की गई है। इसके अलावा अब तक ‘बिजहा’ योजना के अंतर्गत एक भी किताब का प्रकाशन नहीं हो सका है।

माई कोठी योजना भी बदहाल

आयोग द्वारा चलाई जा रही ‘माई कोठी योजना’ का भी हाल ‘बिजहा योजना’ की तरह ही है। यह योजना केवल फ़ाइलों में ही संचालित है। अब तक विभाग द्वारा मात्र 10 किताबों का ही प्रकाशन किया गया है। जिसमे से एक तो शब्दकोश हैं और 9 किताबें माई कोठी योजना के अंतर्गत रखी गई हैं। अलग-अलग लेखकों द्वारा छतीसगढी में एक हजार 61किताब हैं जिसमे से 350 अनुदान द्वारा प्राप्त हैं।

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लोकसेवा आयोग द्वारा पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए जिन परीक्षाओं का आयोजन किया जाता हैं उसमें छत्तीसगढ़ी विषय के अधिकांश परीक्षाओं में इस योजना का भी जिक्र किया जाता हैं। वही अब तक इस योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ एवं छत्तीसगढ़ी में लिखे साहित्य के एक हजार 61किताब का एकत्रीकरण किया गया है।

आयोग द्वारा लिखी गईं किताबें

पुनीत गुरुवंश द्वारा लिखी शब्दसागर छत्तीसगढ़ी शब्दकोश, इशादी नौ उपनिषद् , श्री मद्भगवद् गीता, कातिक महात्म, लोकव्यवहार और कार्यालयी छत्तीसगढ़ी शिव महापुराण छत्तीसगढ़ी (भाग-1) , (भाग-2), छत्तीसगढ़ी प्रशासनिक शब्दकोश

राजभाषा का दर्जा दिलाने में आयोग पिछड़ा

अध्यक्ष की नियुक्ति पर छत्तीसगढ़ राज्यभाषा आयोग के सचिव डॉ. भतपहरि का कहना है कि शासन को इसकी जानकारी है। हमारे द्वारा उन्हें पद की नियुक्ति को लेकर अवगत भी कराया जा रहा हैं। कोरोना माहमारी के मद्देनजर नियुक्ति में देरी हो रही है।

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अध्यक्ष पद रिक्त होने की वजह से आयोग द्वारा किसी भी बड़े कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जा रहा। आयोग की सभी योजनओं का सुचारू रूप से संचलन भी पिछड़ रहा है। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा दिलाने में आयोग पिछड़ा हुआ हैं।

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