किसानों को ट्रैक्टर रोटावेटर की जगह चाइना मेड पावर ट्रिलर की सप्लाई, उद्यानिकी विभाग में चल रहा है करोड़ों का खेल
किसानों को ट्रैक्टर रोटावेटर की जगह चाइना मेड पावर ट्रिलर की सप्लाई, उद्यानिकी विभाग में चल रहा है करोड़ों का खेल

रायपुर। कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत छत्तीसगढ़ में उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को उपकरणों की आपूर्ति में करोड़ों की अनियमितता की संभावना सामने आ रही है। इसका खुलासा तब हुआ जब अनेक जिलों के किसानों ने रोटावेटर की जगह घटिया क्वालिटी का चाइना मेड पावर ट्रिलर दिए जाने की शिकायत की।

प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और उद्यानिकी के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कृषि यंत्रीकरण योजना चलाई जा रही है, पर जिम्मेदार अधिकारी इस योजना को पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। आरोप है कि अधिकारी किसानों को चाइना मेड घटिया कृषि उपकरण पकड़ा रहे हैं।

20 जिलों में चल रही है यह योजना

जानकारी के मुताबिक किसानों के यंत्रीकरण की यह योजना प्रदेश के 20 जिलों में लागू की गई है। इसके तहत किसानों को ट्रैक्टर के साथ रोटावेटर दिया जाना है। मिनी ट्रैक्टर की तरह इस्तेमाल होने वाले रोटावेटर का बाकायदा RTO में रजिस्ट्रेशन भी होता है। बड़ी संख्या में किसानों ने ट्रैक्टर विथ रोटावेटर की मांग के लिए उद्यानिकी विभाग में अपना पंजीयन कराया था। नियम के मुताबिक इस प्रक्रिया के तहत किसानों के बैंक खाते में अनुदान की राशि जमा की जाती है।

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रोटावेटर की जगह पावर ट्रिलर क्यों दिया ?

इस योजना के तहत किसानों को ट्रैक्टर विथ रोटावेटर की जगह पॉवर ट्रिलर और पॉवर वीडर की आपूर्ति की जा रही है। इसकी प्रमुख वजह यह है कि RTO में इन उपकरणों का पंजीयन नहीं होता, जिसके चलते यह किसान के नाम पर रिकॉर्ड में नहीं चढ़ता। सवाल यह उठता है कि जब किसानों को ट्रैक्टर के साथ रोटावेटर दिया जाना है, तो उन्हें आखिर पावर ट्रिलर क्यों दिया जा रहा है?

घटिया उपकरण आबंटित करने की है शिकायत

इस मामले को लेकर जगदलपुर, बेमेतरा, रायपुर सहित अनेक जिलों के किसानों ने मामले में लिखित शिकायत की है। किसानों ने धोखाधड़ी का आरोप लगते हुए घटिया सामग्री की आपूर्ति किये जाने की बात रखी है। दरअसल पावर ट्रिलर चाइना मेड है और कुछ किसानों के यहां तो यह उपकरण ख़राब भी हो गया है। इसकी शिकायत के बावजूद अब तक कोई भी कार्रवाई विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि प्रदेश के 20 जिलों में इस तरह का घालमेल करके करोड़ों की हेराफेरी की गयी है।

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उधर उद्यानिकी विभाग के संचालक माथेश्वरन वी का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है। अगर कोई शिकायत आयी तो उसकी जांच करवाई जाएगी। बहरहाल उद्यानिकी विभाग द्वारा किसानों को घटिया उपकरण की सप्लाई करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब सभी की नजर विभाग के प्रमुख अधिकारियों के ऊपर टिक गई है। देखना है कि अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेते हैं या नहीं।

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