RTI की जानकारी नहीं देने पर गांव के सचिव पर 25 हजार और अधिकारी पर केवल 10 हजार का अर्थदण्ड..!
RTI की जानकारी नहीं देने पर गांव के सचिव पर 25 हजार और अधिकारी पर केवल 10 हजार का अर्थदण्ड..!

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं दिए जाने संबंधी अपीलों की सुनवाई में तेजी तो आयी है, मगर संबंधितों के ऊपर जिस तरह का अर्थदंड लगाया जा रहा है, वह किसी की समझ में नहीं आ रहा है। केवल नाम के जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत के सचिवों पर भारी-भरकम अर्थदंड, तो अधिकांश अधिकारी स्तर के जनसूचना अधिकारियों पर इसके मुकाबले में मामूली अर्थदंड लगाया जा रहा है।

आयोग की सुनवाई में नहीं पहुंचा सचिव

सूचना के अधिकार के तहत जानकारी उपलब्ध नहीं कराये जाने का यह मामला सरगुजा के जनपद पंचायत राजपुर के ग्राम पंचायत मरकाडांड का है, जहां के ग्राम सचिव / जनसूचना अधिकारी के खिलाफ गांधीनगर, अंबिकापुर निवासी यशपाल शर्मा ने जानकारी नहीं दिए जाने की शिकायत की थी। शिकायत सही पाये जाने और आयोग की सुनवाई में उपस्थित नहीं होने एवं आयोग को कोई जवाब प्रस्तुत नहीं करने, बार-बार अवसर देने पर भी आयेग के आदेश की अवहेलना के कारण राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत 25 हजार रूपए का अर्थदण्ड अधिरोपित करते हुए अपीलार्थी यशपाल शर्मा को 500 रूपए क्षतिपूर्ति राशि देने का भी आदेश पारित किया।

पंचायत के लेखा-जोखा की नहीं दी जानकारी

एक अन्य प्रकरण में शिकायतकर्ता नवलसिंह ठाकुर, तिलकनगर, बिलासपुर ने आयोग के समक्ष शिकायत की थी कि ग्राम पंचायत कोसमडीह, जनपद पंचायत मस्तुरी के सचिव/जनसूचना अधिकारी नंदेश करियारे से केन्द्र और राज्य सरकार से प्राप्त सभी मदों की आबंटित राशि और व्यय की जानकारी केश व्हाउचर, चेकबुक और रजिस्टर की छायाप्रति की मांग की थी। तत्कालीन सचिव ने आवेदक को समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराया, जिससे असंतुष्ट होकर आवेदक ने आयोग में शिकायत की। राज्य मुख्य सूचना आयुक्त एम के राउत ने आवेदन और उनके साथ सहपत्रों को बारीकी से परीक्षण के बाद आवेदक को जानकारी से वंचित रखने और आयेग के नाटिस का जवाब नहीं देने के कारण अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत नंदेश करियारे के ऊपर 25 हजार रूपए का अर्थदण्ड लगाया।

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DSP और निरीक्षक पर लगाया 10 हजार का अर्थदंड

पुलिस विभाग से जुड़े एक अन्य प्रकरण में आवेदक राकेश बाफना बल्लभनगर, रायपुर ने पुलिस मुख्यालय के योजना प्रबंध विभाग द्वारा वर्ष 2015-16 एवं 2016-17 में यातायात सामग्री क्रय आदेश और छूट की छायाप्रति की मांग की थी। आवेदक को जनसूचना अधिकारी ने दस्तावेजों के अवलोकन कराने पत्र जारी किया, मगर दस्तावेजों का अवलोकन नहीं कराया। प्रथम अपीलीय अधिकारी ने 50 पृष्ठ की जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराने निर्देश दिया। आदेश का पालन नहीं किए जाने के कारण आवेदक ने द्वितीय अपील सूचना आयेग में प्रस्तुत किया। आयोग द्वारा जारी सूचना पत्र का जवाब सही और समाधान कारक नहीं पाये जाने पर और सूचना का अधिकार अधिनियम की गलत व्याख्या किए जाने एवं समयावधि में जानकारी नहीं देने के कारण जनसूचना अधिकारी उषा नेताम, उप पुलिस अधीक्षक वर्तमान पदस्थापना पुलिस मुख्यालय नवा रायपुर को राज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत 10 हजार रूपए का अर्थदण्ड अधिरोपित करने का आदेश पारित किया है

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एक अन्य प्रकरण में संतोष देवांगन, अधिवक्ता पण्डरीतराई, रायपुर ने थाना बेरला में रामानंद चौहान, ग्राम बहेरा के विरूद्ध गिरफ्तारी की तामिली के संबंध में जानकारी मांगी। आवेदक को जानकारी नहीं मिलने पर अंतिम में आयेग के पास शिकायत किया। आयोग ने आवेदक के आवेदन की सम्यक परीक्षण कर सुनवाई का अवसर प्रदान किया किया, किन्तु तत्कालीन जनसूचना अधिकारी थाना अजाक जिला बेमेतरा(निरीक्षक) अजय सिंह बैस आयोग की सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए और आयोग को अपना पक्ष रखने के लिए कोई जवाब भी नहीं दिया। राज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने बैस के ऊपर अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत 10 हजार रूपए का अर्थदण्ड अधिरोपित करने का आदेश पारित किया है।

इन सबसे अलग केवल एक मामले में राज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने तत्कालीन जनसूचना अधिकारी जोन क्रमांक 5 नगर पालिक निगम रायपुर, हेमंत शर्मा वर्तमान पदस्थापना कार्यपालन अभियंता उद्यानिकी विभाग जानकारी नहीं देने के मामले में न तो आयोग की सुनवाई में उपस्थित हुए और न ही कोई जवाब प्रस्तुत किया। राज्य सूचना आयुक्त अशोक अग्रवाल ने इसे आयोग के निर्देश की अवहेलना मानते हुए 25 हजार रूपए का अर्थदण्ड अधिरोपित करने का आदेश पारित किया है।

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RTI के प्रचार-प्रसार की है जरुरत

गौरतलब है कि इससे पूर्व भी अनेक ग्राम पंचायत सचिवों पर 25 -25 हजार रूपये का अर्थदंड लगाया जा चुका है। त्रि-स्तरीय पंचायत में सबसे निचले स्तर का कर्मचारी ग्राम सचिव होता है, और उसके ऊपर इस तरह का भारी-भरकम अर्थदंड लगाया जाता है। बेहतर ये होगा कि सूचना के अधिकार के प्रावधानों का नए सिरे से प्रचार किया जाये ताकि जन सूचना अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास हो सके।

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