बिना जगत के कुएं जंगली जानवरों के लिए अब भी बने हुए हैं खतरा, धमतरी में कुएं में गिरे तेंदुए का किया गया रेस्क्यू
बिना जगत के कुएं जंगली जानवरों के लिए अब भी बने हुए हैं खतरा, धमतरी में कुएं में गिरे तेंदुए का किया गया रेस्क्यू

धमतरी। जंगलों के आस-पास स्थित बिना जगत के कुएं वन्य प्राणियों के लिए अब भी खतरनाक साबित हो रहे हैं। धमतरी जिले में ऐसे ही कुएं में एक तेंदुआ गिर पड़ा, जिसे निकालने के लिए वन अमले को मशक्कत करनी पड़ी।

वन विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक आज धमतरी के कोड़ेगांव बी के पास कक्ष क्रमांक 220 से लगे हुए कुएं में एक तेंदुआ गिर गया। गांव के लोग किसी जानवर के गुर्राने की आवाज सुनकर कुएं के पास पहुंचे तो वे यह देखकर काफी डर गए कि कुएं में तेंदुआ गिरा हुआ है।

सूचना पर पहुंची वन विभाग की रेस्क्यू टीम

ग्रामीणों ने इस घटना की सूचना वन अमले को भेजी, जिसके बाद वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने यहां पहुंचकर बचाव कार्य शुरू किया। टीम ने गांव से ही सीढ़ियों का इंतजाम किया और उसे कुएं में उतार दिया। सीढ़ी के सहारे ही तेंदुआ सुरक्षित कुए से बाहर आया और जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ।

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खुले कुओं को लेकर अब भी गंभीर नहीं वन विभाग

छत्तीसगढ़ का बहुत बड़ा इलाका वनों से आच्छादित है और वनों के आसपास के गावों में मौजूद कुओं में अक्सर रात के वक्त विचरण करते हुए जंगली जानवर गिरकर मारे जाते हैं। वन्य पशु प्रेमी नितिन सिंघवी अक्सर जंगली जानवरों की सुरक्षा का मुद्दा राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उठाते रहे हैं। पूर्व में उनके ही प्रयासों से केंद्रीय मंत्रालय ने सभी राज्यों को पत्र लिखकर जंगलों के आसपास स्थित बिना जगत के कुओं में जगत का निर्माण करने और खुले कुओं को जाली इत्यादि से सुरक्षित करने का निर्देश दिया था। मगर इसको लेकर आज भी वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई योजना तैयार नहीं की है, तभी तो वन्य प्राणियों के इस तरह कुएं में गिरने की घटनाएं अब भी हो रही है।

बजट में अब भी नहीं किया प्रावधान

TRP न्यूज़ से चर्चा में नितिन सिंघवी ने बताया कि जहां तक उन्हें जानकारी है, वन विभाग ने इस तरह के कुओं को सुरक्षित करने का कोई भी प्रावधान इस बार भी बजट में नहीं किया है। पिछले वर्ष केवल कांकेर जिले में ऐसे कुओं को सुरक्षित बनाने के लिए 3 करोड़ रुपयों का प्रावधान किया गया था, मगर उसे भी खर्च नहीं किया गया, तभी तो फ़रवरी के महीने में कांकेर में ऐसे ही एक कुएं में गिरकर तेंदुए की मौत हो गई। एक अन्य घटना मरवाही में हुई जहां कुएं में गिरकर एक भालू की मौत हो चुकी है।
नितिन सिंघवी बताते हैं कि इस तरह के ‘इमरजेन्सी’ वाले कार्यों के लिए कैम्पा का फंड भी इस्तेमाल किया जा सकता है, मगर विभाग के अधिकारी कोई भी गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। समय रहते इन्हें चेत जाना चाहिए, अन्यथा इस तरह की घटनाएं घटती रहेंगी।

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देखिये रेस्क्यू का VIDEO :

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