Saturday, May 21, 2022
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राज्य में केंद्रीय समिति की मदद से आसान होगा आर्गन ट्रांसप्लांट, भारत सरकार से अनुबंध के साथ ही मिला 48 लाख का बजट

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छत्तीसगढ़: भारत सरकार की आर्गन ट्रांसप्लांट संस्था नोटो ने स्टेट की आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन सोटो से इसके लिए अनुबंध करने के साथ ही 48 लाख का बजट दे दिया है। अगले महीने से ऐसे मरीजों का रजिस्ट्रेशन शुरू करने की तैयारी जिन्हें लीवर, किडनी और कार्निया में किसी भी आर्गन की जरूरत है।

ऐसे मरीजों की वेटिंग लिस्ट बनाकर जैसे ही ब्रेन डेड मरीजों के आर्गन दान में मिलने की सूचना मिलेगी, मरीज का आर्गन निकालकर जरूरतमंद मरीज में ट्रांसप्लांट किया जाएगा। अभी राज्य में इसकी सुविधा नहीं है। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में दूसरे राज्यों की आर्गन ट्रांसप्लांट समितियों में रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है। दूसरे राज्यों में वेटिंग लिस्ट काफी लंबी रहती है।

ऐसी दशा में मरीजों को किसी भी आर्गन के लिए दो-तीन साल तक इंतजार करना पड़ता है। राज्य में सोटो के गठन की प्रक्रिया राज्य के बनने के बाद 2000 से ही चल रही थी। पिछले साल सभी तरह की तकनीकी दिक्कतों को दूर कर सोटो का गठन किया गया। अब इस समिति ने केंद्र सरकार की नेशनल आर्गन एंड टिश्यु ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन यानी नोटो से अनुबंध कर लिया है।

इस अनुबंध के बाद केंद्र की समिति राज्य में ब्रेन डेड मरीजों के आर्गन ट्रांसप्लांट में मदद करेगी। इसी हफ्ते राज्य की आर्गन ट्रांसप्लांट समिति सोटो के सदस्यों की बैठक हुई। इसमें प्रमुख सचिव स्वास्थ्य मनिंदरकौर द्विवेदी ने पूरे सिस्टम की समीक्षा की। सोटो के डायरेक्टर विनीत जैन के अलावा डा. कमलेश जैन, डा. सुभाष मिश्रा सहित अन्य सभी सदस्य शामिल हुए। उसी में बैठक में प्लान बनाया गया कि अगले महीने से जरूरतमंद मरीजों का रजिस्ट्रेशन करना शुरू किया जाएगा।

अनुबंधन के बाद क्या होंगी खास बाते

2 अस्पतालों में लीवर ट्रांसप्लांट की सुविधा। 5 अस्पतालों में किडनी ट्रांसप्लांट किया जा रहा। 7 अस्पताल कार्निया का ट्रांसप्लांट कर रहे हैं।

  • डीकेएस होगा पहला सरकारी ट्रांसप्लांट सेंटर
    डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पहला सरकार ट्रांसप्लांट सेंटर होगा। यहां लीवर, किडनी और दूसरे आर्गन जरूरतमंद मरीजों को ट्रांसप्लांट किए जाएंगे। अस्पताल में लीवर और किडनी के स्पेशलिस्ट उपलब्ध हैं। अफसरों का कहना है कि ऑपरेशन थियेटर से लेकर सभी जरूरी सुविधाएं यहां उपलब्ध हैं। कुछ तकनीकी स्टाफ और उपकरणों की कमी को दूर कर ट्रांसप्लांट शुरू कर दिया जाएगा।
  • रजिस्ट्रेशन के साथ बनेगी वेटिंग लिस्ट
    सोटो यानी आर्गन ट्रांसप्लांट कमेटी में जरूरतमंद मरीजों का रजिस्ट्रेशन करने के साथ उनकी वेटिंग लिस्ट बनायी जाएगी। लीवर, किडनी, हार्ट और कार्निया के मरीजों की वेटिंग लिस्ट अलग रहेगी। जैसे ही किसी भी सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में ब्रेन डेड मरीजों के परिजन उनके अंगों को दान करने के लिए राजी होंगे, इसकी सूचना सोटो को भेजी जाएगी। सोटो उस अस्पताल को खबर देगी जहां जरूरतमंद मरीज का इलाज चल रहा है। आर्गन पहुंचते ही ट्रांसप्लांट कर दिया जाएगा।

हेल्थ डायरेक्टर ने भेजी चिट्‌ठी | स्वास्थ्य संचालक नीरज बंसोड़ की ओर से सभी सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों को पत्र जारी कर इस बारे में जानकारी दे दी गई है। इसमें ये बताया गया है कि राज्य की आर्गन ट्रांसप्लांट संस्था ब्रेन डेड मरीजों के आर्गन दान में लेकर जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराएगी।

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