आखिर क्यों बीच में रोकी गई थी Jayaswal NECO प्लांट की जनसुनवाई, जनता का विरोध या कोई और थी वजह? जानिए यहाँ….

रायपुर : 25 मई को राजधानी के सपीप स्थित सिलतरा औद्योगिक क्षेत्र के जयसवाल निको प्लांट में उद्योग विस्तार को लेकर जन सुनवाई रखी गई थी जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, स्थानीय लोग उपस्थित थे। ग्रामीणों की जन सुनवाई में उपस्थिति देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिए गए थे।

जनसुनवाई प्रारंभ हुई फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से प्रतिनिधी ने कहा कि प्लांट प्रबंधन की ओर से आस-पास के गांव में खेल, स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी, ग्रीन बेल्ट जैसे मुद्दों पर ध्यान देकर सकारात्मक कार्य किया गया है। इसके साथ ही प्लांट में काम करने वालों में 70% स्थानीय लोगों को रोजगार दिया गया है। इसके बाद वहाँ मौजूद कुछ लोग जनसुनवाई में हंगामा करने लगे। जिसके बाद जनसुनवाई को बीच में ही रोकना पड़ा। शुरुआत में कहा गया कि वादे पूरे न करने की वजह से स्थानीय लोगों ने विरोध कर जनसुनवाई को रोक दिया। जब TRP ने इस विषय पर कंपनी प्रबंधन से बात की तो जवाब कुछ और ही था।

यह है प्रबंधन का कहना

कंपनी प्रबंधन के एक अधिकारी से हुई चर्चा में यह बात निकलकर सामने आई है कि, जन सुनवाई के दौरान वे स्वयं उस स्थान पर मौजूद थे। उस स्थान पर सामूहिक रूप से कोई विरोध नहीं किया गया था। केवल 4 व्यक्तियों ने कार्यक्रम का विरोध किया और कार्यक्रम को बाधित किया। यहां तक कि एक व्यक्ति जो नौकरी के लिए वहां गया हुआ था, उसने यह तक कह दिया कि जब तक मेरी बात नहीं सुनी जाएगी मैं किसी को कुछ कहने नहीं दूंगा। जिसके कारण कार्यक्रम को बीच में स्थगित करना पड़ा।

कंपनी के अधिकारी ने कहा कि अगर नियमों को देखें तो किसी भी औद्योगिक संस्थान की जनसुनवाई में केवल पर्यावरण संबंधी विषयों पर ही चर्चा की जा सकती है। पर्यावरण को नुकसान ना पहुंचे, यह चर्चा किसी भी जनसुनवाई का मुख्य उद्देश्य होता है। लेकिन वहां पहुंचे ग्रामीणों में से चार लोग लगातार इधर-उधर की बातें करते रहे। जिसमें एक व्यक्ति ऐसा है जिसे कुछ वर्ष पूर्व कंपनी से बर्खास्त कर दिया गया था। वहीं एक अन्य व्यक्ति ठेकेदार है जिससे कंपनी का काम किसी कारणवश वापस ले लिया गया। वह कंपनी से इस बात का बदला ले रहा है। वहीं एक व्यक्ति ऐसा भी है जो ठेकेदारी में कंपनी में कार्यरत है। उसका संबंध पुरानी कंपनी “बत्रा स्टील” से है जिसका अधिग्रहण कंपनी ने किया था। यह व्यक्ति पूर्व में कंपनी को आत्महत्या करने का की धमकी भी दे चुका है। इन सभी लोगों के व्यवधान के कारण जनसुनवाई को बीच में ही रोकना पड़ा। इस कार्यक्रम को बीच में रोकने के लिए पीछे आम जनता के विरोध जैसा कोई कारण नहीं था।

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