संत कबीर जयंती पर कबीर शोधपीठ ने आयोजित की आनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी, कई शोधकर्ता, प्राध्यापक और साहित्यकार हुए शामिल

रायपुर : कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय की कबीर विकास संचार अध्ययन केंद्र की ओर से संत कबीर जयंती पर 14 जून को आनलाइन राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया था। प्रसिद्ध साहित्यकार सूरज पालीवाल “आज का समय और संत कबीर” विषय पर बोलते हुए कहा कि “कबीर ने अपने समय को रचा। उन्होंने तमाम चुनौतियों का सामना किया और यह सामना कविता से किया।”

हिंदी के सुप्रसिद्ध आलोचक और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व प्रोफेसर डॉ सूरज पालीवाल तथा वरिष्ठ आलोचक और पश्चिम बंगाल राज्य विश्वविद्यालय कोलकाता के विभागाध्यक्ष डॉ अरूण कुमार होता व्याख्यानमाला के मुख्य वक्ता थे। संगोष्ठी की अध्यक्षता कबीर विकास संचार अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष कुणाल शुक्ला ने किया। संगोष्ठी में शोधकर्ता, प्राध्यापकों और साहित्यकार तथा छात्र शामिल हुए।

पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय कोलकाता के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ अरुण कुमार होता ने कहा कि आज युवाओं में कबीर सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। कबीर ने श्रम को महत्व दिया, इसलिए समूचे विश्व में उनका प्रभाव है। टैगोर भी कबीर से प्रभावित थे। उन्होंने कबीर के सौ पदों का अंग्रेजी में अनुवाद किया था। भारतीय आध्यात्म को विश्व ने जाना।

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व प्राध्यापक और वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सूरज पालीवाल ने कहा कि कबीर तमाम चुनौतियां का सामना 6 सौ बरस पूर्व किया था। आज के समय में अभिव्यक्ति के अनेक मंच हैं, यह कबीर के समय नहीं थे। तब कविता ही उनके लिए माध्यम थी। आज के समय के कवियों को कबीर से प्रेरणा लेनी चाहिए। आज के कवि बचना चाहते हैं। कबीर ने अपने समय को रचा। वे सीधे-सीधे बात करते थे।

कबीर संचार विकास अध्ययन केंद्र के अध्यक्ष कुणाल शुक्ला ने कहा कि कबीर ने समूचा जीवन सच्चाई की खोज में बिताया। अपने समय की बुराइयों को निष्पक्ष रूप से देखा। कबीर के मार्ग पर चलने से आज की अनेक समस्याएं हल हो सकती हैं।‌

कार्यक्रम का संचालन कार्टून वाच पत्रिका के संपादक त्रियम्बक शर्मा ने किया। आभार प्रदर्शन साहित्यकार और शिक्षाविद सुधीर शर्मा ने किया।

Check Also
Close
Back to top button