बड़ी लापरवाहीः जब 3 साल पहले रिटायर्ड हो चुके शिक्षक को बनाया RTE का नोडल अधिकारी, शिक्षा विभाग ने झाड़ा पल्ला!

रायपुर। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग में बड़ी लापरवाही सामने आई है। शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते जरूरतमंद बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित हो रहे हैं। दरअसल शिक्षा विभाग ने रायपुर (शहरी) के तहत आने वाले 8 स्कूलों का नोडल अधिकारी आरटीई एक ऐसे शिक्षक को बनाया है जो 3 साल पहले ही सेवामुक्त हो चुकी हैं।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया आरंभ तो हो गई है। लेकिन इसकी जिम्मेदारी एक ऐसे अधिकारी को दी गई है जो 3 साल पहले ही रिटायर्ड हो चुके हैं। इस बारे में स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि नोडल अधिकारी की नियुक्ति हमारी जिम्मेदारी नहीं है।

दरअसल नए शिक्षण सत्र के लिए प्रदेश में आरटीई के तहत बच्चों के लिए आवेदन मंगवाए जा चुके हैं। जिसके तहत कई पालकों ने आवेदन भी किया, सारी प्रक्रियाएं पूर्ण करने के बाद उनके आवेदनों निरस्त कर दिया गया। इस बारे में जब अधिकारियों से चर्चा की गई तो उन्होंने ऑनलाइन स्टेटस देखने कहा।

पोर्टल भी अपडेट नहीं, नहीं मिल रही जानकारी

शिक्षा विभाग एजुकेशन पोर्टल के माध्यम से आरटीई सीटों की सभी जानकारी ओपन करता है। बीते कुछ समय से प्रवेश की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन विभागीय पोर्टल में इस बात की जानकारी नहीं है कि आवेदन किस आधार पर खारिज किया गया इसकी भी जानकारी अधूरी है। अंत में जब यह मामला टीआरपी न्यूज के पास आया तो टीआरपी ने दस्तावेज में
दिए गए नोडल अधिकारी के मोबाईल नंबर पर संपर्क किया। इस पर नोडल अधिकारी आर. दुबे ने जानकारी दी कि वह 3 साल पहले ही रिटायर्ड हो चुकी हैं।

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यह काम हमारा नहीं

इस बारे में जब जिला शिक्षा अधिकारी अशोक बंजार से चर्चा की तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए साफतौर पर कहा कि यह नोडल अधिकारी की नियुक्ति का काम हमारा नहीं प्राइवेट स्कूलों का है। इतना कह कर उन्होंने फोन रख दिया।

क्या है आरटीई

सभी बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा देने के उद्देश्य से 1 अप्रैल 2010 को केंद्र सरकार (Central Govenment) ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right To Education Act) बनाया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस अपनी मुहर लगाते हुए पूरे देश में लागू करने का आदेश दिया। इस अधिनियम के अंतर्गत देश के हर बच्चे को शिक्षा प्राप्त करने का संवैधानिक अधिकार मिला। इसमें देश के हर 6 साल से 14 साल के बच्चे को मुफ्त शिक्षा प्राप्त कर सकता है। प्रत्येक बच्चा पहली से आठवीं तक मुफ्त और अनिवार्य रूप से पढ़ सकेगा। उसे अपने आसपास के स्कूल में प्रवेश लेने का अधिकार है।

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