रायपुर। देश के इतिहास में सबसे बड़े और सबसे लंबे समय तक चलने वाले बोरवेल रेस्क्यू ऑपरेशन ऑपरेशन राहुल में शामिल बचाव दल का आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सम्मान किया और बधाई दी। सम्मान समारोह का आयोजन मुख्यमंत्री निवास में किया गया था। इस मौके पर मुख्यमंत्री भुपेश बघेल व अन्य मंत्रियों के साथ ही जांजगीर कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला,पुलिस प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, होमगार्ड्स सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे।

देख ही देखते देश व्यापी बना “ऑपरेशन रेस्क्यू राहुल”

बता दें कि जांजगीर-चांपा जिले के पिहरीद ग्राम में 11 वर्षीय राहुल साहू 10 जून की दोपहर करीब 2 बजे खेलते वक्त घर के नजदीक ही खुले बोरवेल के गड्ढे में गिर गया था। जिसके बाद ये मामला धीरे धीरे सबके संज्ञान में आने लगा और मुख्यमंत्री के जानकारी में आते ही रेस्क्यू के लिए टीम तैयार करने के निर्देश दिए थे। क्योंकि राहुल ज़मीन से 60 फीट नीचे फंसा हुआ था इसलिए भौगोलिक रूप से ये स्थिति रेस्क्यू के लिए बहुत विपरीत थी।

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रेस्क्यू ऑपरेशन की शुरुआत में जिला प्रशासन के साथ पुलिस प्रशासन, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, सेना, होमगार्ड्स सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। जिसके बाद देखते ही देखते ये रेस्क्यू ऑपरेशन प्रदेश से देश व्यापी हो गया और पुरे देश की नज़र इस ऑपरेशन पर टिक गयी थी।

बच्चे को बचाने के लिए मई अपनी जान दे सकता था

104 घंटे के अथक प्रयासों के बाद जब अंततः राहुल को निकालने की बारी आई तो ऐसे शख्स की तलाश होने लगी थी जो उल्टा लटक कर आसानी से उस सुरंग में राहुल तक पहुंच कर उसे सेफ्टी हार्नेस पहना कर अपने साथ बाहर ला सके। ऐसे में अंजरुल को इसके लिए चुना गया जो वह मजूद लोगो में सबसे छोटा था। उसने बताया कि अंदर कोई इस लिए नहीं जा सकता था क्यों की जगह कम थी। ऐसे मई सबसे छोटा था और मुझे भेजा गया।

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने अंजरुल से पूछा कि जब उसे उल्टा लटका कर कुए में भेजा गया तो क्या उसे डर नहीं लगा। इस पर अंजरूल ने जवाब दिया कि “नहीं मुझे डर नहीं लगा। अगर बच्चे को बचाने के लिए मुझे अपनी जान देनी पड़ती तो मैं वो भी दे देता।”

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जिसके बाद वहां मौजूद सभी ने अंजरूल के हौसले की सराहना करते हुए उसके लिए तालियां बजाई और मुख्यमंत्री ने भी अजरुल के साहस के लिए उसे बधाई दी।

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