TRP Special : छग का ऐसा सरकारी स्कूल जहाँ के शिक्षक ने उठाया है पढ़ाई को बेहतर बनाने का जिम्मा, स्वयं के प्रयासों से जुटा लेते हैं विदेशों से भी सहयोग

बिलासपुर : प्रदेश भर में सरकारी स्कूलों में नया शिक्षण सत्र प्रारंभ हो चुका है। नया सत्र प्रारंभ होने के साथ ही सभी स्कूलों में पढ़ाई भी शुरू हो गई है। लेकिन फिर भी सरकारी कामों में थोड़ी देर ही तो होती है। अभी प्रदेश से कई ऐसे विद्यालय होंगे जहां पुस्तकों का वितरण होने में हफ्तों का समय लग जाएगा। इसी बीच आज हम आपको बताने जा रहे हैं बिलासपुर के एक ऐसे शासकीय प्राथमिक शाला की कहानी जहां पिछले 3 सालों से शिक्षक के प्रयासों से बच्चों के अध्ययन सामग्री के लिए सहयोग ना सिर्फ देश बल्कि विदेशों से भी आता है। शाला प्रवेशोत्सव होते ही प्राइमरी स्कूल के छात्रों को उनके जरूरत के अनुसार आवश्यक सामग्री जैसे कॉपी, पेन, पेंसिल, अन्य स्टेशनरी सामग्री, गणवेश से जुड़ी बेल्ट, टाई, हेयर बैंड, मास्क आदि वितरित हो जाती है।

दरअसल प्रदेश के बिलासपुर के समीप स्थित नवीन प्राथमिक शाला, सिरगिट्टी के शिक्षक योगेश करंजगांवकर ने सामूहिक सहभागिता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। पिछले 3 वर्षों से वे लगातार प्रयास करके शाला के बच्चों के लिए, समाज के सहयोग लेते हुए, छात्रों को आवश्यक स्टेशनरी के सामान और अन्य जरूरी चीजें वितरित करते आ रहे हैं। इसके पीछे उनका उद्देश्य केवल और केवल बच्चों की पढ़ाई लिखाई को बेहतर बनाना है।

हर वर्ष गर्मियों की छुट्टी में वे समाज के दानदाताओं, अपने मित्रों, रिश्तेदारों से मिलकर या व्हाट्सएप और फोन कॉल आदि के माध्यम से संपर्क कर बच्चों के सहयोग के लिए आग्रह करते हैं। वे उन्हें समझाते हैं कि बच्चों की पढ़ाई निरंतर जारी रखने के प्रयासों में उनके सहयोग का उपयोग किया जाएगा। जिसके बाद ना सिर्फ देश के कई राज्यों बल्कि विदेश में रहने वाले भी कई सहयोगियों के द्वारा बिलासपुर के इस प्राथमिक शाला, सिरगिट्टी के छात्रों के लिए सहयोग आता है।

3 वर्षों से जारी है यह कार्यक्रम

योगेश करंजगांवकर बताते हैं कि कोरोना के समय में पूरे देश में मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय परिवार की स्थिति आर्थिक रूप से बहुत खराब हो गई थी। इसी दौरान उन्हें इस बात की आवश्यकता महसूस हुई कि समाज के सक्षम लोग आगे आकर ऐसे अक्षम परिवार से आने वाले छात्रों की पढ़ाई लिखाई को आगे बढ़ाने का जिम्मा उठाएं। जिसके बाद उन्होंने स्वयं से प्रयास करते हुए अपने परिचितों से संपर्क कर उनके लिए इस तरह की व्यवस्था जमाई और अध्ययन सामग्री उन्हें वितरित की। जिसके बाद यह प्रक्रिया चल पड़ी और अब निरंतर 3 वर्षों से प्रत्येक वर्ष शाला प्रवेशोत्सव के समय और साल के अन्य समय में बीच-बीच में छात्रों को छात्रों के अध्ययन से संबंधित सभी सामग्री वे छात्रों को समाज के सहयोग से उपलब्ध कराते हैं।

इस साल आया US, सिंगापुर और जापान से आया सहयोग

इस साल भी बच्चों की पढ़ाई बेहतर बनाने के प्रयास में विदेशों से सहयोग मिला है। योगेश करंजगांवकर बताते हैं कि इस साल सहयोग करने वालों में संदीप चोपड़े, श्रीकांत मोहरे, सुनीता चोपड़े, लता गुप्ता और दीपक बिलासपुर से, जयंत भाकरे और अपेक्षा बेहरे रायपुर से, जोला पाण्डेय दुबे (राजस्थान), स्वरूप (मुम्बई), अमोल खानखोजे (बैंगलोर), राजेश पंडित (सूरत), अनंत (USA), नमिता दीक्षित तिवारी (Singapore) और विकास सिंह का (Japan) से सहयोग प्राप्त हुआ है। इनके सहयोग से नवीन प्राथमिक शाला, सिरगिट्टी के 200 छात्रों को अध्ययन सामग्री और अन्य उपयोगी वस्तुएं वितरित की गईं।

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