अविश्वास प्रस्ताव : संख्या बल में कांग्रेस तो मुद्दों को लेकर भाजपा पड़ी भारी

0 छग.विधानसभा के मानसून सत्र का अवसान रहा हंगामेदार 0 पहले 10 फिर 5 मिनट कार्यवाही स्थगित

रायपुर। विशेष संवादाता/टीआरपी
विधानसभा के मानसून सत्र के आज छठवें एवं अंतिम दिन नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस सरकार ने सदन एवं जनता के बीच अपना विश्वास खो दिया है। इसे बने रहने का कोई हक नहीं। अन्य भाजपा विधायकों ने भी सरकार पर आरोपों की बौछार लगा दी। वहीं सत्ता पक्ष के लोगों ने अपनी साढ़े तीन साल की उपलब्धियों को गिनाते हुए पूर्व रमन सरकार व केन्द्र की मोदी सरकार की खामियों को गिनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी।

इस दौरान भाजपा सदस्य अजय चंद्राकर की टिप्पणी को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। इसके बाद फिर अविश्वास प्रस्ताव के 151 मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे। हालाकि मत संख्या में बहुत क़तर साबित हो चुकी विपक्ष के सदस्य सरकार को अपने आरोपों से बुरी तरह घेरते नज़र आए। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, वन मंत्री मो.अकबर ने आरोपों पर सटीक जवाब देकर अपनी वरिष्ठता का कई दफे परिचय दिया और विपक्षी आरोपों को बहुत हद तक नेस्तनाबूद भी कर दिया। लेकिन संख्या बल में कम विपक्षी सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के 151 मुद्दों पर खूब तैयारी करके आए थे।

सरकार के कामकाज को लेकर नेताप्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक, बृजमोहन अग्रवाल, अजय चंद्राकर, धरमजीत सिंह और शिवरतन शर्मा ने आरोपों की झड़ी लगा दी। सरकारी कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार, नियम विरुद्ध कार्यों, विभागीय तबादलों के साथ ही सरकार के 5 लाख नौकरी के दावों और सदन में आंकड़ा 20 हजार बताने को लेकर विपक्ष ने खूब हंगामा बरपाया और सरकार पर अविश्वास जताया। इस दौरान सत्तापक्ष के विधायको ने भी जमकर शोरगुल किया और विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत को दो बार चर्चा रोकने तथा 15 मिनट के लिए कार्यवाही स्थगित करना पड़ा। पहली बार 10 फिर 5 मिनट के लिए कार्यवाही बाधित हुई। इस तरह चर्चा के लिए तय 5 घंटे में से 15 मिनट हंगामे की वजह से जाया हुए।

सीजेसीजे दल के नेता धरमजीत सिंह के सवाल पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया कि 2019 से जून 2022 तक 2120 घोषणाएं मुख्यमंत्री के नाते उन्होंने की है, जिनमें से 889 घोषणाएं पूर्ण हो चुकी है वहीं 1231 घोषणाएं अभी लंबित और वे भी जल्द पूर्ण करेंगे। मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि उनके द्वारा वर्ष वर्ष 2019 से जून 2022 तक प्रदेश में 2120 घोषणाएं की गई है और इन सभी घोषणाओं से संबंधित फाईलों को विभागों को भेज दी गई है। परिप्रेक्ष्य में 889 घोषणाओं में क्रियान्वयन करते हुए पूर्ण कर ली है और 1231 घोषणाएं फिलहाल अभी लंबित है जो जल्द ही पूरे हो जाएंगे।

भाजपा विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत एक शेर पढ़कर की और कहा यह अविश्वास प्रस्ताव ताबूत की आखरी कील साबित होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में ऐसी सरकार है जिसमें आपस में लठ चल रही है। मंत्रियों को न तो मुख्यमंत्री पर विश्वास है न अधिकारियों पर। चाहकर भी किसी मंत्री को मंत्रिमंडल से निकालते नहीं बन रहा है और वो मंत्री भी ऐसे हैं कि उनसे पद नहीं छूट रहा है। वह मंत्री स्वीकार कर रहे हैं कि हम गरीबों को एक भी घर नहीं दे पाए। सरकार का एक मंत्री अपने जिले के कलेक्टर को भ्रष्ट कहते रहा।
विपक्ष के आरोपों पर मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि ऊपर(भाजपा के राष्ट्रीय संगठन) से फटकार मिली तब यह अविश्वास लेकर आए हैं। अविश्वास प्रस्ताव भी ऐसा जिसका कोई वजन नहीं है। संसदीय कार्य मंत्री रविन्द्र चौबे ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि जनता से हमने जो वादे किए थे उस पर खरे उतरे। अभी कांग्रेस के 71 विधायक हैं। अगली बार 75 प्लस के साथ सरकार बनाएंगे। जब छत्तीसगढ़ की सरकार ने किसानों को 2500 रुपये देने का फैसला किया तो केन्द्र सरकार का यह कहना रहा कि किसानों को समर्थन मूल्य से 1 रुपये भी ज्यादा नहीं मिलना चाहिए। लेकिन हमारे मुख्यमंत्री अड़े रहे कि किसानों को 2500 रुपये ही देकर रहेंगे। इस बार किसानों को 2640 रुपये मिलेगा। केन्द्र सरकार से हमें 30 हजार करोड़ लेना है लेकिन इसे वह नहीं दे रही है। लोकसभा में यहां के भाजपा नेता बैठे हैं वहां वे छत्तीसगढ़ के हितों की बातें क्यों नहीं करते।

विपक्षी दावों को सिरे से नकारते हुए सरकार के वादों को मोहन मरकाम ने सदन को बताया। उन्होंने कहा कि 36 में से 30 वादे पूरे हुए। अविश्वास प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष की ओर से चर्चा करते हुए विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि 15 सालों की भ्रष्ट सरकार को जनता ने उखाड़ फेंका और हम पर भरोसा जताया। विपक्ष के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। विपक्षी आरोप लगा रहे हैं कि हमने जनता का भरोसा तोड़ा। सच्चाई यह है कि हम 36 चुनावी वादों को लेकर जनता के बीच गए थे, उनमें से 30 वादे पूरे हो चुके हैं।

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