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रायपुर। आज छत्तीसगढ़ विधानसभा में विपक्ष द्वारा अनियमित, संविदा, दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों के नियमितिकरण का मामला उठाया गया। जिस पर मुख्यमंत्री ने जल्द से जल्द इसकी जानकारी एकत्र कर कार्यवाही करने की बात कही। चर्चा के दौरान पक्ष विपक्ष में तीखी नोक-झोंक के बाद विपक्ष ने मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से वॉकआउट कर दिया।

दरअसल विद्यारतन भसीन की अनुपस्थिति में नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने उनके सवाल को पूछा, कि कितने कर्मचारियों को नियमित किया गया? जिसपर मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि विभागों और निगम, मंडल और आयोगों से कार्यरत अनियमित, दैनिक वेतनभोगी और संविदा कर्मचारियों की जानकारी मंगाई गई है। कई विभागों से जानकारी आ चुकी है और कई विभागों से आनी बाक़ी है। कई मामले कोर्ट में भी चल रहे हैं। 28 मई 2019 को महाधिवक्ता को चिट्ठी लिखकर अभिमत माँगा गया है, जिसमे कोरोना की वजह से भी देरी हुई। अब हालात सामान्य हो रहे हैं। कब तक होगा समय सीमा बताना निश्चित नहीं है। हमारी कोशिश है कि घोषणा पत्र के वादे पूरे कर दिए जाए।

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मुख्यमंत्री के जवाब पर अजय चंद्राकर और शिवरतन शर्मा ने कहा कि जब 2019 में कमेटी बनाई गई और जनवरी 2020 में कमेटी ने अनुशंसा की तो ढाई साल तक इस पर कार्यवाही क्यों नहीं हुई। विपक्ष ने इस बात पर हंगामा किया कि सरकार अपने घोषणा पत्र पर क्रियान्वयन नहीं कर रही। मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सदन में हंगामा किया। जिसके बाद स्पीकर चरणदास महंत ने सदन की कार्यवाही को 10 मिनट के लिए स्थगित कर दिया।

सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने फिर अनियमित कर्मचारियों के नियमितिकरण का मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से नियमितीकरण की समय सीमा बताने सवाल किया। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं निर्देशित करूँगा कि जल्द से जल्द कमेटी की बैठक आयोजित की जाए। इसकी समय सीमा तो बताना संभव नहीं है पर हम इसको जल्दी से जल्दी ही नियमितीकरण करेंगे। मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट हो कर विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर दिया।

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