अविश्वास प्रस्ताव में बोलने की समय सीमा सिर्फ 5 घंटा को लेकर तीखी नोकझोंक

0 बृजमोहन, डहरिया और लखमा के बीच होता रहा वाद-विवाद
0 विपक्ष बोलै परिणाम जानते हैं,फिर भी आखरी कील साबित होगी

0 चर्चा शुरू

रायपुर। विशेष संवादाता /टीआरपी
विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को लेकर स्वीकृति के साथ ही बोलने की समय सीमा को लेकर काफी विवाद हुआ। कुर्सी है तुम्हारी जनाज़ा तो नहीं ,कुछ कर नहीं सकते तो उतर क्यों नहीं जाते :- बृज मोहन अग्रवाल इस शायरी के साथ भाजपा की ओर से अविश्वास प्रस्ताव की शुरुवात बृज मोहन अग्रवाल ने की। कवासी लखमा तत्काल बोले ये कवि सम्मेलन चल रहा है क्या? लोकसभा में संसदीय शब्दों का प्रयोग करने वाले सांसदों को बर्खास्त किया गया है यहां पर भी हैं ऐसा बोलने वाले यह चार लोग हैं। विस अध्यक्ष से मुखातिब होकर लखमा ने कहा आप ध्यान रखना उन पर भी कार्रवाई करें।

भाजपा की ओर से पहले वक्ता बृज मोहन अग्रवाल को बोलने के सीमा बता कर रोका गया, बृज मोहन अग्रवाल को शिव डहरिया ने टोका था। बृज मोहन अग्रवाल ने कहा बोलना रोक देता हूं सत्ता पक्ष के सदस्यों ने बोलने की समय सीमा के पालन कराने की मांग की मुख्यमंत्री ने भी सदन में उठ कर समय सीमा के पालन की बात कही। समय सीमा में बात हो इस बात को लेकर 20 मिनट चर्चा हुई। सत्तापक्ष के सदस्यों ने व्यंग्य किया जितने विधायक है उतना समय मिला है। 14 विधायक इनको दिया है तो समय कम होगा ही बोले शिव डहरिया।

बृजमोहन बोले मैं 6 बार का विधायक हूँ कई बार अविश्वास प्रस्ताव देख चुका हूं पहली बार देख रहा हूं कि अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा को रोका नही गया ये पहली बार ऐसा नजारा देख रहा हूँ। पहली बार मैं भी देख रहा हूं अविश्वास प्रस्ताव में नही रोका जाता। ननकीराम उस समय से विधायक है जब कई मंत्री बने लोग उस समय तो पैदा हुए होंगे आज उनको बोलने से रोक रहे है। पहली बार ऐसा देख रहा हूं। समय सीमा को लेकर विवाद और तीखी नोक झोंक विधानसभा अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद खत्म हुई। बृजमोहन ने सदन में तंज किया और कहा कि हम को मालूम है कि हमारे अविश्वास प्रस्ताव का हस्र क्या होगा लेकिन हम को विश्वास है कि ये अविश्वास प्रस्ताव सरकार के ताबूत की आखरी कील होगी।

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