ED की हिरासत में लिए गए संजय राउत, बोले- ना झुकेंगे और ना ही छोड़ेंगे पार्टी

मुंबई। शिवसेना सांसद संजय राउत के भांडुप के बंगले मैत्री पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छापा मारने के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया है। ईडी में हिरासत में लिए जाने के बाद संजय राउत ने कहा कि लोगों के खिलाफ झूठे आरोप और दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। यह सब शिवसेना और महाराष्ट्र को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है।

एजेंसी की टीम सुबह 7 बजे केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के अधिकारियों के साथ मुंबई के पूर्वी उपनगर बांडुप में राउत के घर पहुंची और तलाशी शुरू की। प्रवर्तन निदेशालय 60 वर्षीय राउत से मुंबई में एक चॉल के पुनर्विकास और उनकी पत्नी और करीबी सहयोगियों से संबंधित लेनदेन के संबंध में पूछताछ करना चाहता है। राउत, जो पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के शिवसेना खेमे में हैं, ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है और आरोप लगाया है कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के कारण निशाना बनाया जा रहा है।

हिरासत में लिए जाने के बाद संजय राउत ने कहा, “मेरे खिलाफ नकली सबूत लगाए गए हैं। यह मेरे और शिवसेना के खिलाफ साजिश है. मैं झुकूंगा नहीं। इस बीच बीजेपी विधायक राम कदम ने कहा, “अगर वह निर्दोष है तो वह प्रवर्तन निदेशालय से क्यों डरता है? बड़ी संख्या में शिवसेना कार्यकर्ता राउत के घर के बाहर जमा हो गए और उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय और भाजपा के खिलाफ नारेबाजी की।

बता दें कि अप्रैल में, प्रवर्तन निदेशालय ने राउत की पत्नी वर्षा राउत और उनके दो सहयोगियों की 11.15 करोड़ से अधिक की संपत्ति कुर्क की। इन संपत्तियों में दादर में वर्षा राउत का एक फ्लैट और अलीबाग में किहिम बीच पर आठ प्लॉट हैं, जो संयुक्त रूप से वर्षा राउत और संजय राउत के “करीबी सहयोगी सुजीत पाटकर की पत्नी स्वप्ना पाटकर के पास हैं। एजेंसी ने राउत से उनके करीबी सहयोगियों प्रवीण राउत और सुजीत पाटकर के साथ उनके “व्यापार और अन्य संबंधों” के बारे में और उनकी पत्नी से जुड़े संपत्ति सौदों के बारे में जानना चाहती है।

यह है मुंबई के गोरेगांव का पत्रा चॉल घोटाला

पत्रा चॉल जमीन घोटाला करीब 1034 करोड़ रुपए का है। मुंबई के गोरेगांव में पत्रा चॉल में म्हाडा की जमीन है। ईडी के आरोपों के मुताबिक प्रवीण राउत की गुरु आशिष कंस्ट्रक्शन कंपनी को इस पत्रा चॉल को डेवलप करने का काम दिया गया था, लेकिन उन्होंने यह जमीन प्राइवेट पार्टियों को बेच दी। प्रवीण राउत पर आरोप है कि उन्होंने पत्रा चॉल में रहने वाले लोगों को ठग लिया और उन्हें घर बना कर नहीं दिया।

शर्तों के मुताबिक प्रवीण राउत की गुरु आशिष कंस्ट्रक्शन कंपनी को पत्रा चॉल में 3 हजार फ्लैंट्स का निर्माण करना था। इनमें से 672 फ्लैट यहां रहने वाले टेनेंट को देने थे और बाकी फ्लैट्स म्हाडा और बिल्डर के बीच बंटने थे, लेकिन 2010 में प्रवीण राउत ने गुरु आशिष कंस्ट्रक्शंस कंपनी के 258 फीसदी शेयर एचडीआईएल (HDIL) को बेच दिए। इसके बाद 2011, 2012 और 2013 में जमीन के कई हिस्सों को प्राइवेट डेवलपर्स और बिल्डर्स को ट्रांसफर कर दिए।

प्रवीण राउत है संजय राउत का करीबी

इस मामले में कार्रवाई करते हुए ईडी ने प्रवीण राउत को 2 फरवरी को अरेस्ट किया था। ईडी के सूत्रों के मुताबिक प्रवीण राउत संजय राउत के करीबी हैं। संजय राउत पर 1034 करोड़ के मुंबई के गोरेगांव स्थित पत्राचॉल घोटाले कें संबंध में प्रवीण राउत के साथ लिप्त होन का आरोप है। बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने इस खबर पर ट्वीट कर दावा किया है कि संजय राउत को नवाब मलिक का पड़ोसी बनना ही पड़ेगा। उन्हें घोटाले का पूरा हिसाब देना ही पड़ेगा।

संजय राउत का क्या है घोटाले से संबंध?

इस घोटाले से कमाया हुआ सारा पैसा प्रवीण राउत ने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों में बांटे। इनमें से 83 लाख रुपए प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी के खाते से संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत के खाते में गए। ईडी के मुताबिक इसी रकम से संजय राउत ने मुंबई के दादर में फ्लैट खरीदा। इस मामले में ईडी ने वर्षा राउत को नोटिस भेजा था। इसके बाद वर्षा राउत ने 55 लाख रुपए माधुरी के खाते में ट्रांसफर किए। कहा गया कि दादर का फ्लैट खरीदने के लिए माधुरी से लोन लिया था।

इसके बाद ईडी ने संजय राउत से संबंधित मुंबई से सटे पालघर की जमीन, दादर का फ्लैट (जिसमें संजय राउत रह रहे थे) और अलिबाग के पास किहिम में जमीनों के आठ प्लॉट को सीज कर लिया। इन जमीनों की मिल्कियत भी प्रवीण राउत की है। दादर का फ्लैट वर्षा राउत के नाम पर है। कुछ जमीनें वर्षा राउत और सपना सुजीत पाटकर के नाम पर हैं।

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