पाकिस्तान में एक और हिंदू लड़की का अपहरण कर लिया गया है। इस देश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के मानवाधिकारों का घोर हनन किया जा रहा है। यहां आए दिन लड़कियों को अगवा करके उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है। उनका उत्पीड़न किया जाता है। जिसका नतीजा यह है कि इस्लाम को मानने वाले देश में अल्पसंख्यकों की आबादी 3.5 प्रतिशत तक सिमट कर रह गई है। बता दें कि 15 दिन में पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण की यह चौथी बड़ी घटना है।

अपहृत लड़की के परिजनों के अनुसार चंद्रा मेहराज का हैदराबाद के फतेह चौक इलाके से अपहरण किया गया। उस वक्त वह घर लौट रही थी। पुलिस ने शिकायत दर्ज की है, लेकिन लड़की का पता नहीं चला है। इस घटना से साबित होता है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं का दमन लगातार जारी है। इससे पहले 24 सितंबर को 14 साल की मीना मेघवार का नसरपुर इलाके से अपहरण किया गया था। मीरपुर खास में भी एक अन्य लड़की का इसी तरह अपहरण किया गया था।

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पाकिस्तान की आबाद में 3.5 फीसदी हिंदू व अन्य अल्पसंख्यक हैं। इस इस्लामिक देश में उनके साथ क्रूरता, हिंसा व दमन के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। लेकिन, पिछले साल एक संसदीय समिति ने देश में जबरन धर्मांतरण के खिलाफ विधेयक के प्रारूप को खारिज कर दिया।

इसी शहर में रवि कुर्मी नाम के एक हिंदू ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी राखी का अपहरण कर जबरन इस्लाम धर्म कबूल कराया गया। इसके उलट पुलिस ने दावा किया कि राखी ने इस्लाम धर्म अपना लिया और अहमद चांडियो से मर्जी से शादी की।

पाकिस्तान में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की एक श्रृंखला चल रही है। जून माह में करीना कुमारी ने कोर्ट में गवाही देते हुए कहा था कि उसका अपहरण के बाद जबर्दस्ती इस्लाम धर्म कबूल कराने के लिए दबाव डाला गया और एक मुस्लिम व्यक्ति से शादी करा दी गई। इसके पूर्व सतरन ओड, कविता भील और अनीता भील नाम की तीन हिंदू लड़कियों के साथ भी इसी तरह की घटनाएं हुईं।

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शादी से इनकार पर कर दी हत्या
21 मार्च को पूजा कुमारी नाम की एक हिंदू लड़की की सक्खर में उसके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उसने एक पाकिस्तानी व्यक्ति से शादी से इनकार कर दिया था, इस कारण यह वारदात की गई।

धर्मांतरण के खिलाफ कानून का माहौल नहीं
इससे पूर्व पाकिस्तान के तत्कालीन धार्मिक मामलों के मंत्री नूरुल हक कादरी ने कहा था कि जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून बनाने का अभी माहौल नहीं है। पाक अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार मंत्री ने यहां तक दावा किया कि जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कानून देश में शांति भंग कर सकता है और अल्पसंख्यकों को और अधिक कमजोर बना सकता है।