अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव: 9 देशों के 1500 आदिवासी कलाकार बिखेरेंगे अपनी संस्कृति की खुशबू

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य का 44 प्रतिशत भू-भाग वनों से आच्छादित है। 42 तरह की जनजातियां प्रदेश में निवास करती हैं। इन सभी जनजातियों के अपने-अपने तीज-त्यौहार हैं, अपनी-अपनी संस्कृति है, अपनी-अपनी कला परंपराएं हैं। इन्हीं सबसे मिलकर छत्तीसगढ़ राज्य की सुंदर संस्कृति और परंपराओं का निर्माण होता है। छत्तीसगढ़ में जनजातियों की जनसंख्या कुल जनसंख्या का 31 प्रतिशत है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति एवं सभ्यता को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। इसी कड़ी में राज्य में तीसरी बार आदिवासी नृत्य महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री की पहल पर इंटरनेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल के रूप में एक बहुत महत्वपूर्ण परंपरा की शुरुआत छत्तीसगढ़ में की गई है। यह प्रयास न केवल छत्तीसगढ़ के लिए, बल्कि देश और पूरी दुनिया के जन-जातीय समुदायों के आपसी मेलजोल, कला-संस्कृतियों के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध साबित हो रहा है।

इस आयोजन में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के जनजातीय कलाकारों की टीमों के साथ-साथ 9 देशों के जनजातीय कलाकारों की टीमें भी शामिल हो रही हैं। इस वर्ष यह आयोजन 1 नवंबर से शुरू हो रहा है। यह छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की तारीख भी है। रायपुर में राष्ट्रीय जनजातीय नृत्य महोत्सव का आयोजन तीन दिनों तक किया जाएगा। इस आयोजन में 1500 जनजातीय कलाकार शामिल होंगे। इनमें से 1400 कलाकार भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के हैं, और 100 कलाकार विदेशों के होंगे।

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अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव का यह तीसरा आयोजन है। पिछले वर्ष इस आयोजन में 12 देशों ने रुचि ली थी, जिनमें से 7 ने इसमें हिस्सा लिया था। इस साल 26 देशों ने रुचि प्रदर्शित की है, इनमें से 9 देश इस महोत्सव में शामिल होने जा रहे हैं। इस आयोजन में मोजांबिक, मंगोलिया, टोंगो, रशिया, इंडोनेशिया, मालदीव, सर्बिया, न्यूजीलैंड और इजिप्ट के जनजातीय कलाकार हिस्सा लेंगे।

इंटरनेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल में दो कैटेगिरी में प्रतियोगिताएं होंगी। विजेताओं को कुल 20 लाख रुपए के पुरस्कारों का वितरण किया जाएगा। प्रथम स्थान के लिए 5 लाख रुपए, द्वितीय स्थान के लिए 3 लाख रुपए और तृतीय स्थान के लिए 2 लाख रुपए के पुरस्कार दिए जाएंगे। 1 नवंबर को सुबह नृत्य महोत्सव का शुभारंभ होगा और शाम को राज्योत्सव के अवसर पर राज्य अलंकरण दिया जाएगा।

3 नवंबर को नेशनल ट्राइबल डांस फेस्टिवल का समापन होगा। इस महोत्सव के माध्यम से न केवल राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनजातीय कलाकारों के बीच उनकी कलाओं की साझेदारी होगी, बल्कि वे एक-दूसरे के खान-पान, रीति-रिवाज, शिल्प-शैली को भी देख-समझ सकेंगे। महोत्सव के दौरान संगोष्ठियां भी होंगी, जिनमें जनजातीय विकास के बारे में विमर्श होगा। जाने-माने विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे।

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