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कोरबा। यहां के छुरी नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 9 के कांग्रेस पार्षद हीरालाल यादव को सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने के नाम पर कलेक्टर ने बाकी कार्यकाल के लिए अपात्र घोषित कर दिया है। बेजा कब्जा के मामले में प्रदेश में इस तरह की यह पहली कार्रवाई है। हालांकि पार्षद का कहना है कि संबंधित जमीन पर उसका कब्ज़ा नहीं है, और जिस जमीन को सरकारी बताया जा रहा है, वह सरकारी न होकर निजी जमीन है।

जानिए, क्या है मामला…

नगर पंचायत छुरी की कांग्रेस समर्थित अध्यक्ष नीलम अशोक देवांगन ने कलेक्टर न्यायालय में आवेदन किया था कि पार्षद हीरालाल यादव ने नगर पंचायत, छुरी क्षेत्र में पुष्प वाटिका के लिए प्रस्तावित स्थल पर लगभग 5 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण कर बाउंड्री बना ली है। कटघोरा तहसीलदार ने जब इसकी जांच की तो सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करना पाया गया।

एसडीएम कटघोरा ने भी मामले में प्रकरण दर्ज कर पार्षद को नोटिस जारी किया था। कलेक्टर ने आदेश में कहा है कि कोई भी जनप्रतिनिधि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करता है, तो वह गंभीर प्रकरण है। इससे जनता में नकारात्मक संदेश जाता है। इससे सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले लोगों को प्रश्रय मिलेगा। इस वजह से पार्षद हीरालाल यादव वर्तमान कार्यकाल के शेष अवधि के लिए पार्षद होने के पात्र नहीं रहेंगे।

अध्यक्ष ने अपनी कुर्सी बचाने रचा षड्यंत्र : हीरालाल

इस कार्यवाही को लेकर पार्षद हीरालाल यादव ने TRP न्यूज़ से बातचीत में बताया कि पिछले कार्यकाल में छुरी नगर पंचायत में अध्यक्ष रहे अशोक देवांगन की पत्नी नीलम इस बार अध्यक्ष हैं। इस बार के चुनाव में कांग्रेस के 9 और भाजपा के 6 पार्षद ने जीत हासिल की। चुनाव में बहुमत के बाद सब कुछ ठीक चल रहा था और हीरालाल कांग्रेसी पार्षद होने के नाते PIC (PRESIDENT IN COUNCIL) सदस्य भी बनाये गए, मगर जब भी PIC की बैठक होती, पूरे सदस्यों को कोरे कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा जाता था। इसका विरोध करने पर अध्यक्ष नीलम अशोक देवांगन ने 3 कांग्रेसी पार्षदों हीरालाल यादव, राकेश प्रताप सिंह और माया अग्रवाल को PIC से हटा दिया।

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हीरालाल यादव

कुर्सी बचाने भाजपा से की सांठ-गांठ

हीरालाल यादव ने बताया कि चूंकि 3 कांग्रेस पार्षदों को अध्यक्ष ने PIC से हटा दिया इसलिए उन्होंने अपना बहुमत बरक़रार रखने के लिए भाजपा के पार्षद हीरानंद पंजवानी, संतोष केंवट और आदिवासी कोटे की पार्षद शकुंतला गोंड़ को PIC मेंबर बना दिया। मगर बचाव का यह तरीका भी काम नहीं आया। इस बार भाजपा पार्षद शकुंतला गोंड और कांग्रेस पार्षद शेषबन ने असंतुष्ट होकर PIC से इस्तीफा दे दिया। अध्यक्ष ने शेषबन का इस्तीफा तो स्वीकार कर लिया मगर शकुंतला का नहीं किया, क्योंकि PIC में एक मेंबर आदिवासी का होना जरुरी है, और छुरी नगर पंचायत में केवल दो आदिवासी पार्षद हैं। कांग्रेसी पार्षद पहले से असंतुष्ट है और भाजपा की आदिवासी पार्षद शकुंतला गोंड़ ने इस बार इस्तीफा दे दिया है, मगर उसे स्वीकार नहीं किया जा रहा है।

नीलम अशोक देवांगन

अविश्वास प्रस्ताव बना गले की फांस

जमीन पर बेजा कब्जे की शिकायत के सन्दर्भ में कलेक्टर की नोटिस के जवाब में हीरालाल यादव ने लिखा है कि अध्यक्ष नीलम अशोक देवांगन ने अविश्वास प्रस्ताव से बचने के लिए इस तरह की झूठी शिकायत की है। बता दें कि लगभग 4 महीने पहले हीरालाल यादव सहित 3 पार्षदों ने अध्यक्ष नीलम अशोक देवांगन के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, मगर इस प्रस्ताव को सामान्य सभा में नहीं लाये जाने के चलते हीरालाल यादव और अन्य पार्षद हाई कोर्ट में चले गए। सुनवाई के बाद कोर्ट ने 2 दिसंबर को आदेश दिया कि विधि के अनुरूप तत्काल अविश्वास प्रस्ताव करने का आदेश दिया जाये। बताया जा रहा है कि वर्तमान में अधिकांश कांग्रेस-भाजपा के पार्षद अध्यक्ष की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। इनका आरोप है कि अध्यक्ष द्वारा करोड़ों के टेंडर की प्रक्रिया में घालमेल कर अपने पसंद के ठेकेदार को काम दिया गया है।

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जल्दबाजी में कार्यवाही करने का आरोप

हीरालाल यादव ने आरोप लगाया है कि जिस सरकारी जमीन पर उसका बेजा कब्ज़ा बताया जा रहा है वह उसकी खुद की जमीन से काफी दूर है। बावजूद इसके हाई कोर्ट के अविश्वास प्रस्ताव संबंधी आदेश के बाद तहसीलदार और उनके अमले ने शाम के वक्त मौके पर आकर पंचनामा बनाया और 5 डिसमिल सरकारी जमीन पर हीरालाल यादव का कब्ज़ा बता दिया। इस प्रक्रिया में काफी जल्दबाजी की गई। 12 दिसंबर को तहसीलदार ने इस संबंध में आदेश जारी कर SDM के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। 13 दिसंबर को SDM ने पार्षद हीरालाल यादव द्वारा सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने और उसके खिलाफ नगर पालिका अधिनियम 1960 के तहत कार्यवाही करने संबंधी पत्र कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। इसके बाद कलेक्टर ने 14 दिसंबर को हीरालाल यादव को अपना पक्ष 15 दिसंबर को 3 बजे तक प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया। तत्पश्चात कलेक्टर ने दोनों पक्षों की सुनवाई करते हुए 19 दिसंबर को हीरालाल यादव को पार्षद के पद से आगामी कार्यकाल के लिए अपात्र घोषित कर दिया।

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कोरबा ही नहीं संभवतः प्रदेश में इस तरह का पहला मामला है, जिसमें एक पार्षद को इस तरह सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के मामले में अपात्र घोषित कर दिया गया है। कोरबा में ही नगर निगम कोरबा के एक पार्षद द्वारा माटीकला बोर्ड की जमीन पर अपना मकान खड़ा कर दिया गया था, मामला उजागर होने के बाद इसे तोड़ने की कार्यवाही तो की गई मगर उसके खिलाफ नगर पालिका अधिनियम के तहत कोई कार्यवाही नहीं की गई। आम चर्चा है कि अब इस मामले में भी ऐसी ही कार्यवाही की जाएगी या नहीं।

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