BHIM SINGH

रायपुर। स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक भीम सिंह ने सभी संभागों के संयुक्त संचालक और सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र लिखकर कर्मचारियों का संलग्नीकरण तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के आदेश दिए हैं। इस आदेश से सभी जिलों का स्वास्थ्य अमला दबाव में आ गया है, लेकिन सवाल यह उठता है कि व्यवस्थागत कमियों के चलते किये गए संलग्नीकरण को समाप्त करना क्या संभव हो सकेगा?

संचालक भीम सिंह ने अपने पत्र में कहा है कि संचालनालय स्तर से समय-समय पर संलग्नीकरण समाप्त किए जाने के निर्देश व आदेश जारी किए गए हैं। चालू अप्रैल माह में संपन्न स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में भी विभागीय सचिव ने शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में संलग्नीकरण को समाप्त कर अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थान के लिए कार्यमुक्त किए जाने के निर्देश दिए थे, परन्तु अभी भी अनेक संस्थाओं में अधिकारी व कर्मचारी संलग्न होकर कार्यरत हैं। इस संबंध में संयुक्त संचालकों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा जानकारी उपलब्ध कराई गई है। साथ ही अधिकारी एवं कर्मचारी संघों द्वारा भी इस संबंध में शिकायत प्राप्त होती है। किसी भी स्तर कलेक्टर, संभागीय संयुक्त संचालक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी या अन्य अधिकारी द्वारा जारी संलग्नीकरण या कार्यादेश को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर संलग्न अधिकारी एवं कर्मचारी को उनके मूल पदस्थापना स्थान के लिए तत्काल कार्यमुक्त करें। ऐसा नहीं करने वाले संयुक्त संचालकों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों के विरूद्ध नियमानुसार एक तरफा अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी जिसके लिए वे स्वयं जिम्मेदार होगें।

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स्वास्थ्य सुविधाएं देने में आएंगी दिक्कतें

TRP न्यूज़ ने इस संबंध में कुछ जिलों के CMHO और संयुक्त संचालक से चर्चा की। सभी का कहना था कि संलग्नीकरण समाप्त करने से आम लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने में दिक्क्तें आएंगी। बीजापुर के CMHO डॉ अजय रामटेके ने बताया कि के जिला अस्पताल में नेत्र सहायक नहीं हैं, ऐसे में उन्होंने PHC से एक नेत्र सहायक को यहां संलग्न कर रखा है। अगर इस स्टाफ को वापस कर दिया जाये तो जिला अस्पताल में आंखो का ऑपरेशन बंद हो जायेगा। इसी तरह कई ब्लॉक में BMO के रेगुलर पोस्ट नहीं है, वहां कलेक्टर की अनुमति से जिला अस्पताल से डॉक्टर BMO बनाकर भेजे गए हैं। इन्हें अगर वापस जिला अस्पताल बुलवा लिया जाये तो व्यवस्थागत दिक्क्तें आएंगी। ऐसी ही दिक्क्तें दूसरे CMHO और अन्य अधिकारीयों ने बताईं। इनका कहना है कि अगर संलग्नीकरण समाप्त करना हो तो उन्हें शासन से इस बारे में पूछना पड़ेगा, अन्यथा स्वास्थ्य सुविधाएं बाधित होंगी।

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आदेश जारी करने की क्या है वजह..?

स्वास्थ्य संचालक भीम सिंह ने सब कुछ जानते हुए भी आखिर यह आदेश क्यों जारी किया, इस संबंध में हमने जानने की कोशिश की तब पता चला कि कई ऐसे जिले हैं जहां “एप्रोच” का इस्तेमाल करके डॉक्टरों और कर्मचारियों ने मनचाहे स्थान पर अपना संलग्नीकरण करा लिया है। ऐसे संलग्नीकरण से उलटे स्वास्थ्य सुविधाएँ प्रभावित हो रही हैं। दुर्ग सहित ऐसे अनेक जिले हैं, जहां संलग्नीकरण का आंकड़ा काफी ज्यादा है। यही वजह है कि संलग्नीकरण को पूरी तरह ख़त्म करने का आदेश जारी किया गया है। माना जा रहा है कि अब जिला स्तर पर किये गए संलग्नीकरण पर एक-एक करके समीक्षा की जाएगी और गैर जरुरी संलग्नीकरण को ख़त्म किया जायेगा। बहरहाल संचालक के एक आदेश से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। इसका निराकरण किस तरह होगा इस पर सभी की नजरें टिकी हुई है।

“स्वास्थ्य मंत्री के आदेश हैं कि संलग्नीकरण ख़त्म किया जाये, उसी के मुताबिक आदेश जारी किया गया। संलग्नीकरण ख़त्म करने के प्रयास पिछले एक साल से किये जा रहे हैं, मगर इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा था, इसलिए लिखित में आदेश जारी किया गया है। जिन स्थानों पर संलग्नीकरण जरुरी हैं, वहां स्थानांतरण के प्रस्ताव भेजे जाएं, इस पर विचार किया जायेगा। फिजूल में अपनी सुविधा के तहत जो संलग्न किये गए हैं, उन्हें सीधे वापस भेजा जायेगा।”
0 भीम सिंह, संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं, छग

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