Taxation on Gold: गोल्ड यानी सोना के कई रूप हैं जिसमें हर कोई निवेश कर सकता है। यह भारतीयों के लिए संपत्ति की सबसे आकर्षक श्रेणी है। फिजिकल गोल्ड के अलावा डिजिटल गोल्ड और पेपर गोल्ड की भी आजकल काफी मांग है। इसलिए एक्सपर्ट भी सोने में पोर्टफोलियो के 10 से 15 प्रतिशत तक निवेश की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गोल्ड इंवेस्टमेंट पर आपको कितना इनकम टैक्स देना होता है और आईटीआर फाइल करते वक्त आप इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं?

सोने में निवेश कई तरीके से किया जा सकता है, जैसे कि सॉवरेन गोल्ड बांड, गोल्ड ज्वैलरी या गोल्ड बार्स और गोल्ड ईटीएफ इत्यादि। अब निवेश करने पर तो टैक्स लगता नहीं, हालांकि अगर इनको बेचकर आप प्रॉफिट कमाते हैं, तब आपको लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट के तौर पर टैक्स देना पड़ सकता है। चलिए जानते हैं क्या कहते हैं नियम….

गोल्ड पर लगता है लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स

See also  खुशखबरी: देशी Covaxin 77.8 फीसदी असरदार, भारत बायोटेक के टेस्‍ट के डेटा को एक्‍सपर्ट पैनल की मंजूरी

अगर आप फिजिकल गोल्ड जैसे कि गहने, जेवरात या सिक्कों को 36 महीने से ज्यादा अपने पास रखते हैं तब ये लॉन्ग टर्म कैपिटल एसेट क्लास में आ जाती है। वहीं गोल्ड सेविंग फंड्स या गोल्ड ईटीएफ में 31 मार्च 2023 से पहले खरीदी गई यूनिट भी एसेट के दायरे में आती हैं, जबकि 36 महीने से अधिक अवधि तक रखे जाने के चलते ये ऑप्शन भी लॉन्ग टर्म इंवेस्टमेंट में आते हैं।

इसलिए 36 महीने बाद इनको बेचने पर जो फायदा होता है। उसे लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन कहा जाता है, इंडेक्सेशन के बाद इस प्रॉफिट पर फ्लैट 20 प्रतिशत टैक्स लगता है। अगर आप इस प्रॉफिट को 36 महीने से पहले निकाल लेते हैं तब ये शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के हिसाब से टैक्स किया जाता है। अगर आपने गोल्ड ईटीएफ या गोल्ड सेविंग फंड में 31 मार्च 2023 के बाद निवेश किया है, तब आपको शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। यानी आपके प्रॉफिट पर टैक्स की गणना फिक्स्ड डिपॉजिट के हिसाब से ही होगी।

See also  Vice President Election 2022: उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 6 अगस्त को, 5 जुलाई को जारी होगी अधिसूचना, जानें एनडीए की ओर कौन-कौन दौड़ में शामिल

सॉवरेन गोल्ड बांड होता है टैक्स-फ्री!

सॉवरेन गोल्ड बांड पर ब्याज का भुगतान 2.50 प्रतिशत की दर से होता है। ये आपके बैंक खाते में हर छमाही में क्रेडिट हो जाता है। ऐसे में सॉवरेन गोल्ड बांड पर मिलने वाला ब्याज पूरी तरह से टैक्स के दायरे में आता है। वहीं गोल्ड बांड को आठ साल बाद रिडीम किया जाता है, ऐसे में जो आपको प्रॉफिट होता है वो पूरी तरह से टैक्स फ्री होता है।

इनकम टैक्स दायर करते वक्त आपको सोने पर खरीद-फरोख्त से होने वाली इनकम को ‘इनकम फ्रॉम अदर सोर्स’ कॉलम में दिखाना होता है।