रायपुर। छत्तीसगढ़ी राजभाषा मंच से छत्तीसगढ़ी भाषा में शपथ लेने की मांग उठी है। राजभाषा मंच के सरंक्षक नंदकिशोर शुक्ल ने छत्तीसगढ़ी में शपथ लेने की मांग की है। मांग को लेकर उन्होंने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, और क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल से मुलाकात की।

नंदकिशोर शुक्ल ने कहा कि 2007 के बाद छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा मिल गया, लेकिन 17 साल बाद भी पूरी तरह से स्थापित नहीं हो पाई। हमारी मांग है कि जो राजभाषा बन गई है उसी में जनप्रतिनिधि शपथ लें, उसकी शुरुआत मुख्यमंत्री से हो, विशेष कर मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ी में शपथ लेंगे उसके बाद बाकी सब मंत्री-विधायक लेंगे, यह राजभाषा है। जन भाषा है। हमारी महतारी भाषा भी है। यही निवेदन करने अरुण साव अजय जामवाल से मुलाकात हुई।

उन्होंने कहा कि अजय जामवाल छत्तीसगढ़ की आत्मा को पहचानने वाले व्यक्ति हैं। जिस ढंग से उन्होंने बातचीत की स्पष्ट रूप से पूरा भरोसा है कि सभी छत्तीसगढ़ी में शपथ ले सकते हैं। अरुण साव से भी बात हुई, उन्होंने भी आश्वासन दिया कि हां होना चाहिए, इस बार छत्तीसगढ़ी में शपथ लेने वालों की संख्या बढ़ेगी। महाराष्ट्र में मराठी, बंगाल में बंगाली तो छत्तीसगढ़ में भी सब लोग छत्तीसगढ़ी में शपथ लेंगे, जिससे समाज में अच्छा मैसेज जाएगा।

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3000 किलोमीटर पदयात्रा, 4000 किलोमीटर सायकल यात्रा कर चुके हैं शुक्ल

राजभाषा बनने के बाद जब छत्तीसगढ़ी में पढ़ाई-लिखाई नहीं शुरू हुई तो नंदकिशोर शुक्ल ने लोगों को जागरूक करना शुरू किया। जिसके बाद वे पदयात्रा और सायकल यात्रा पर निकल पड़े। शुरू से ही यह मांग रही कि सरकारी कामकाज छत्तीसगढ़ी में भी हो और पांचवी तक पढ़ाई में छत्तीसगढ़ी शामिल किया जाए।

लोग कहते हैं पागल

नंदकिशोर शुक्ल बताते हैं कि वे अपना पूरा जीवन छत्तीसगढ़ महतारी को समर्पित कर चुके हैं, जब वे यात्रा करते थे तो उन्हें लोग पागल कहते थे, हालांकि इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। ‘हां मैं पागल हूँ’। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कोई भी राजनीतिक पार्टी आये छत्तीसगढ़ी भाषा को स्थापित करे, यदि ऐसा नहीं होता है तो उनकी लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।