महासमुंद। देश में पहले ठगी कम पढ़े लिखे लोगों के साथ होती थी लेकिन डिजिटल दुनिया में सब उल्टा हो रहा है। समय के साथ ठगी का तरीका बदला और शिकार होने वाले लोग भी बदले। किसी को ठगने के लिए अब उसके पास या उसके घर जाना बिलकुल भी जरूरी नहीं है। आप अपने घर बैठे लोगों को ठग सकते हैं और आप ठगे भी जा सकते हैं। ऐसे ही एक मामले में महासमुंद जिले में अज्ञात कॉलर ने एक शख्स के पुत्र को एक अपराध में पकड़ कर रखना बताकर उससे 22 लाख 50 हजार रुपए की ऑनलाइन ठगी कर ली।

‘बेटे को बचाना हो तो खाते में रुपए डालो’

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक घटना 28 मई की रात साढ़े 9 बजे की आसपास की है। लक्ष्मीनारायण मंदिर सरायपाली निवासी विश्वजीत गुप्ता ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि “एक अनजान शख्स ने मुझे कॉल कर बताया कि मेरे पुत्र को उन्होंने एक अपराध में गिरफ्तार कर रखा है। यदि उसे जेल जाने से बचाना चाहते हो तो खाते में रुपए डालो। मैंने परिवार से बगैर सलाह लिए बेटे को बचाने 22 लाख 50 हजार रुपए उसके खाते में डाल दिया। बाद में पता चला कि मेरा बेटा कुशल है और किसी भी मामले में उसकी कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।”

दूसरे मामले में ठगी से बचा एक परिवार

बता दें कि महासमुंद जिले में ऐसा ही एक और मामला लगभग पंद्रह दिन पहले सामने आया था, जहां शिक्षक अवनीश वाणी के छोटे भाई को भी इसी तरह का कॉल आया और उनसे भी कहा गया कि तुम्हारे बेटे के खिलाफ एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस उसे घर से उठा लेगी। यदि अपने बेटे की गिरफ्तारी नहीं चाहते तो एक खाते में पांच लाख रुपए डाल दो। मगर उतना पैसा खाते में नहीं होने की स्थिति में छोटे भाई ने बड़े भाई अवनीश को फोन कर बताया कि बेटे को गिरफ्तार करने पुलिस आ रही है, आप सहयोग कीजिए। अवनीश वाणी ने सतर्कता दिखाते हुए अपने भतीजे को कॉल कर लिया। उस वक्त उनका भतीजा अपने निजी दुकान में काम कर रहा था। बताया कि सब कुछ ठीक है। इस तरह वाणी परिवार ठगी से बच गया था, मगर विश्वजीत गुप्ता ठगों के झांसे में आ गए और साढ़े 22 लाख रूपये गवां बैठे।

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आखिर कौन-सी बला है डिजिटल अरेस्ट?

डिजिटल अरेस्ट ब्लैकमेल करने का एक एडवांस तरीका है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम के शिकार वही लोग होते हैं जो अधिक पढ़े लिखे और अधिक होशियार होते हैं। डिजिटल अरेस्ट का सीधा मतलब ऐसा है कि कोई आपको ऑनलाइन धमकी देकर वीडियो कॉलिंग के जरिए आप पर नजर रख रहा है। डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर ठग नकली पुलिस अधिकारी बनकर लोगों को धमकाते हैं और अपना शिकार बनाते हैं।

कई बार डिजिटल अरेस्ट वाले ठग लोगों को फोन करके कहते हैं कि वे पुलिस डिपार्टमेंट या इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से बात कर रहे हैं। ये कहते हैं कि आपके पैन और आधार का इस्तेमाल करते हुए तमाम चीजें की खरीदी गई हैं या फिर मनी लॉन्ड्रिंग की गई है। इसके बाद वे वीडियो कॉल करते हैं और सामने बैठे रहने के लिए कहते हैं। इस दौरान किसी से बात करने, मैसेज करने और मिलने की इजाजत नहीं होती। इस दौरान जमानत के नाम पर लोगों से पैसे भी मांगे जाते हैं। इस तरह लोग अपने ही घर में ऑनलाइन कैद होकर रह जाते हैं।

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इसी तरह लोगों को कॉल करके उनके परिजन के अरेस्ट होने की बात कही जाती है और उन्हें बचाने के लिए रूपये मांगे जाते हैं। कुछ मामलों में तो बेटे के अपहरण की बात कहकर फिरौती के लिए धमकी दी गई है। दबाव बनाने के लिए किसी से भी बातचीत से रोका जाता है और अपहृत शख्स के चीखने-चिल्लाने तक की आवाज भी सुना दी जाती है। आजकल आवाज सुनाने के लिए AI तकनीक की मदद ली जा रही है।

डिजिटल अरेस्ट का ऐसा भी तरीका

डिजिटल अरेस्ट के मामले पिछले कुछ दिनों बढ़े हैं और ये प्रकरण इन दिनों चर्चा का केंद्र बिंदू बने हुए हैं। हाल ही में नोएडा के सेक्टर-34 स्थित धवलगिरी अपार्टमेंट निवासी आईटी इंजीनियर सीजा टीए के पास 13 नवंबर को अनजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी ऑफ इंडिया (ट्राई) का कर्मचारी बताया। कॉल करने वाले ने कहा कि युवती के आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सिम कार्ड खरीदा गया है जिसका प्रयोग मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।

उसे बताया गया कि सिम का इस्तेमाल कर दो करोड़ रुपये निकाले गए हैं। कॉल करने वाले शख्स ने आगे की जांच का हवाला देते हुए कॉल ट्रांसफर कर दिया। इसके बाद स्काइप कॉल कर कथित रूप से एक तरफ मुंबई पुलिस, दूसरी तरफ क्राइम ब्रांच और कस्टम के अधिकारी बन युवती को डराया धमकाया गया।
करीब आठ घंटे तक स्काइप कॉल से युवती की निगरानी कर उसे बंधक बनाए रखा गया। इस दौरान युवती से कई तरह के सवाल पूछे गए। किसी से बात करने की अनुमति नहीं दी गई। जालसाजों ने आठ घंटे बाद खाते में 11.11 लाख रुपये ट्रांसफर कराने के बाद कॉल डिस्कनेक्ट कर दिया।

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17 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रही छात्रा

इससे पहले फरीदाबाद की एक छात्रा को 17 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया और उससे ढाई लाख रुपये लिए गए। पीड़ित अनन्या मंगला ने पुलिस को बताया कि 12 अक्टूबर को उसके पास एक कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को लखनऊ कस्टम विभाग का ऑफिसर बताया, फिर उसने कहा कि एक पार्सल कंबोडिया भेजा जा रहा है जिसमें काफी संख्या में पासपोर्ट और अन्य कार्ड है।

छात्रा से कहा गया कि यह पार्सल आपके आधार नंबर से लिंक है। इसके लिए आपको आज ही एफआईआर करवानी पड़ेगी वरना आपको लखनऊ कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। उसके बाद अनन्या को फर्जी पुलिस अधिकारी ने स्काइप पर वीडियो कॉल किया और 17 दिन तक घर में ही कैद रखा गया।

इस तरह के कॉल से डरें नहीं, बल्कि लड़ें

यदि आपके पास भी इस तरह की धमकी वाले फोन कॉल आते हैं तो आपको डरने की जरूरत नहीं है। ऐसे कॉल आने पर तुरंत पुलिस में शिकायत करें। यदि कोई मैसेज या ई-मेल आता है तो उसे सबूत के तौर पर पुलिस को दें। यदि किसी कारण आपने कॉल रिसीव कर लिया और आपको वीडियो कॉल पर कोई धमकी देने लगा तो स्क्रीन रिकॉर्डिंग के जरिए वीडियो कॉल को रिकॉर्ड करें और शिकायत करें। किसी भी कीमत पर डरें नहीं और पैसे तो बिलकुल भी ना भेजें।