0 अनुसूचित जनजाति आयोग ने प्रशासन को फर्जी ग्रामसभा के मामले में दिया ये निर्देश

अंबिकापुर। हसदेव के जंगलों में पेड़ काटने का विरोध करना ग्रामीणों को महंगा पड़ गया। इन ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और इस दौरान एक युवक घायल हो गया। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा है कि परसा कोयला खदान के लिए वन और पर्यावरणीय स्वीकृतियां फर्जी दस्तावेजों पर आधारित हैं, इस खदान तो तुरंत निरस्त किया जाए।

पुलिस और ग्रामीणों के बीच संघर्ष

छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य में परसा कोल ब्लॉक के लिए पेड़ों की कटाई आज शुरु की गई। इसका विरोध कर रहे ग्रामीणों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया, जिसमें कुछ लोग घायल बताये जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार इस दौरान आक्रोशित ग्रामीणों ने तीर-धनुष, गुलेल और पत्थरों से पुलिस पर हमला कर दिया, जिससे टीआई, एसआई सहित छह पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इसके बाद पूरे इलाके में पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं। इस इलाके में सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। मामले में लंबे समय से ग्रामीणों में आक्रोश था। लिहाजा भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच पेड़ों की कटाई शुरू की गई थी।

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कटाई शुरू करने का विरोध

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन के संयोजक अलोक शुक्ला ने बताया कि हसदेव के प्राचीन और अविघटित वन मध्य भारत के फेफड़े कहलाते हैं। यहां के पेड़ और प्राकृतिक नदी-नाले ही मध्य और उत्तर छत्तीसगढ़ में स्वच्छ जलवायु उत्पन्न करने का काम करते हैं। यहां के आदिवासियों ने सदियों से इन जंगलों को सुरक्षित रखा है जिस कारण आज भी बिलासपुर और कोरबा जैसे शहरों में पीने का पानी मिल रहा है।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में हसदेव जंगलों के तीन कोयला ब्लॉकों संचालन भारी जनविरोध के बावजूद अदानी कंपनी को सौंपा गया था, जो राजस्थान के पावर प्लांटों के लिए इस जंगल को तबाह कर कोयले का खनन करेगा। इसके विरोध में निरंतर और व्यापक जन आंदोलन हुए हैं, जिसके कारण अभी तक एक ही कोयला खदान PEKB (परसा ईस्ट केते बासन) खुल पाई है। और आज परसा खदान को खोलने के अवैध प्रयास जारी हैं।

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फर्जी ग्रामसभा के सहारे खदान खोलने का प्रयास

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन का कहना है कि हरिहरपुर, साल्ही, फतेपुर की ग्राम सभाओं ने अभी तक वन स्वीकृति के लिए कभी सहमति नहीं दी है। हमेशा ग्रामसभा में खनन का विरोध किया है। लेकिन कंपनी ने 2018 में सरपंच एवं सचिव पर दबाव करके फर्जी ग्रामसभा प्रस्ताव के दस्तावेज बनाकर वन स्वीकृति हासिल की है। वर्ष 2021 में 30 गांव से लगभग 350 से अधिक ग्रामीण 300 किलोमीटर की पदयात्रा कर रायपुर पहुंचे थे, जहां राज्यपाल ने उन्हें आश्वासन दिया था कि कंपनी के विरुद्ध धोखाधड़ी की उनकी शिकायतों पर जांच होगी।

विधानसभा में खनन नहीं करने का प्रस्ताव हुआ था पारित

छत्तीसगढ़ के पर्यावरण और जनमत के ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ विधान सभा ने सर्वसम्मति से 27 जुलाई 2022 को प्रस्ताव पारित किया था कि हसदेव जंगलों में कोई कोयला खनन नहीं किया जाए। इसी वर्ष छत्तीसगढ़ के अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी कंपनी द्वारा फर्जी ग्राम सभा प्रस्ताव प्रस्तुत करने के आरोप में जांच बिठाई, जिसमें आयोग ने सुनवाई की और प्रशासन को ग्राम हरिहरपुर में आयोजित ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव विधि अनुरूप नहीं होने के कारण प्रकरण पर स्टे लगाने को पत्र लिखा है।

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हालांकि आयोग की सुनवाई के पहले ही 16 अक्टूबर 2024 की रात से ही गांव में भारी फोर्स तैनात हो गई। दूसरी तरफ अपने जंगलों को बचाने ग्रामीण भी रात भर जंगलों में ही पहरा देते रहे। अगली सुबह पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें जंगलों से बाहर निकाल दिया। छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने मांग की है कि जिन सरकारी और कंपनी के अधिकारियों की मिलीभगत से यह ग्रामसभा फर्जीवाड़ा हुआ है, उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।