रायपुर। विष्णुदेव मंत्रिमंडल द्वारा स्थानीय निकायों में नई आरक्षण नीति को लागू करने के बाद छत्तसगढ़ में विभिन्न वर्गों को मिलने वाले आरक्षण को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। जानकारों का मानना है
ओबीसी समुदाय को ज्यादा नुकसान हो सकता है। बताया जा रहा है कि 14 जिलों के स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग को प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा। वहीं राजधानी रायपुर में ओबीसी वर्ग को फायदा होने की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा अनारक्षित सीटें घट सकती हैं। बताया जा रहा है कि नई नीति से अनुसूचित जनजाति वर्ग को ज्यादा लाभ मिलेगा।

जानिए, किस तरह का होगा आरक्षण

त्रि-स्तरीय पंचायत एवं नगरीय निकाय के चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग के प्रथम प्रतिवेदन एवं अनुशंसा के अनुसार आरक्षण प्रदान किए जाने का निर्णय मंत्रिमंडल में लिया गया है। इसके तहत स्थानीय निकायों में आरक्षण को एकमुश्त सीमा 25 प्रतिशत को शिथिल कर अन्य पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में 50 प्रतिशत आरक्षण की अधिकतम सीमा तक आरक्षण प्रदान किया जाएगा। ऐसे निकाय जहां पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति का आरक्षण कुल मिलाकर 50 प्रतिशत या उससे अधिक है, वहां अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण उस निकाय में शून्य होगा। यदि अनुसूचित जाति, जनजाति का आरक्षण निकाय में 50 प्रतिशत से कम है, तो उस निकाय में अधिकतम 50 प्रतिशत की सीमा तक अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण होगा, परंतु यह आरक्षण उस निकाय की अन्य पिछड़ा वर्ग के आबादी से अधिक नहीं होगा। निकाय के जिन पदों के आरक्षण राज्य स्तर से तय होते हैं, जैसे जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर निगम महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष इत्यादि, उन पदों के लिए ऐसे निकायों की कुल जनसंख्या के आधार पर उपरोक्त सिद्धांत का पालन करते हुए आरक्षित पदों की संख्या तय की जाएगी।

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नई नीति से नगरीय निकायों और पंचायतों के आरक्षण में बड़ा बदलाव होगा। जानकारों का कहना है कि 14 जिलों में स्थानीय निकायों में ओबीसी वर्ग का कोई भी प्रतिनिधित्व नहीं रहेगा। हालांकि पहले भी अनुसूचित क्षेत्रों में गैरआदिवासियों का प्रतिनिधित्व नहीं रहता था, लेकिन इससे बाहर के कुछ इलाके अंबागढ़ चौकी-मानपुर-मोहला जैसे इलाकों में ओबीसी को भी प्रतिनिधित्व मिलता रहा है। मगर नई नीति से इन इलाकों में भी ओबीसी को प्रतिनिधित्व नहीं मिलेगा।

इन जिलों में OBC की बढ़ सकती हैं सीटें

बताया जा रहा है कि रायपुर, दुर्ग, बालोद, और खैरागढ़ जैसे जिलों में पिछड़ा वर्ग को फायदा होगा, और पहले की तुलना में यहां आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। इन जिलों में वर्तमान में ओबीसी को 25 फीसदी से अधिक आरक्षण मिल सकता है। एक अंदाजा यह भी लगाया जा रहा है कि विशेषकर रायपुर जैसे नगर निगमों में अनारक्षित सीटें घट सकती हैं, और ओबीसी की सीटें बढ़ सकती हैं। नई आरक्षण नीति से आदिवासी वर्ग को जबर्दस्त फायदा होने का अनुमान है जबकि अनुसूचित जाति वर्ग का आरक्षण यथावत रहेगा। वहीं ओबीसी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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स्थानीय निकाय चुनाव के लिए विश्वकर्मा आयोग की सिफारिश को कैबिनेट की मंजूरी के बाद सुगबुगाहट तेज हो गई है, और बताया जा रहा है कि अधिसूचना जारी होने के बाद प्रभावित पक्ष अदालत की शरण में जा सकता है। ऐसे में आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ेगी, हालांकि आगामी चुनाव में इसका कितना असर पड़ेगा इस पर सभी की नजर होगी।