0 कांग्रेस पार्टी ने प्रदेश भर में गड़बड़ी का लगाया है आरोप।

रायपुर। राज्य शासन के कड़े आदेश के बाद भी प्रदेश के धान खरीदी केंद्रों में किसानों से निर्धारित मात्रा से ज्यादा धान तौलकर लिया जा रहा है। आलम ये है कि खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के इलाके बेमेतरा में भी किसानों से ज्यादा मात्रा में धान लिया जा रहा है। इसी कड़ी में बिलासपुर जिले में ऐसी ही शिकायत की पुष्टि होने पर कलेक्टर ने उप पंजीयक को शो कॉज नोटिस जारी कर दिया है।

छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा किसानों का धान समर्थन मूल्य पर खरीदा जा रहा है, जिसके लिए प्रदेश भर में सहकारी समितियों के जरिये खरीदी केंद्र स्थापित किये गए हैं। किसानों को हर बोरे में 40 किलो धान भरकर लाना होता है। अमूमन एक बोरे का वजन लगभग 600 ग्राम होता है। ऐसे में प्रति बोरा धान 40 किलो 600 ग्राम तौलकर देना होता है, मगर अधिकांश खरीदी केंद्रों में इस मापदंड का उल्लंघन किया जा रहा है।

धान सूखने के बहाने लेते हैं ज्यादा तौल

खरीदी केंद्र प्रभारियों द्वारा किसानों को यह तर्क दिया जाता है कि धान लेने के बाद केंद्र में समय बीतने के साथ ही धान सूखने लगता है, जिससे उसका वजन कम हो जाता है, इस बहाने वे किसानों से प्रति बोरा डेढ़ से दो किलो ज्यादा धान तौलकर लेते हैं। इस तरह खरीदी केंद्रों द्वारा धान के सूखने से कम हो जाने के एवज में किसानों से जबरिया अधिक धान लिया जा रहा है।

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खाद्य मंत्री के इलाके का बुरा हाल

प्रदेश का खाद्य विभाग, जिसके जिम्मे धान खरीदी की पूरी व्यवस्था होती है, इसी विभाग के मंत्री दयाल दास बघेल के गृह जिले बेमेतरा के किसानों की परेशानी कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। यहां जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधीन संचालित समितियों व खरीदी केंद्र प्रभारियों की अंधेरगर्दी सामने आयी है। खरीदी के लिए बनाए गए नियमों व मापदंडों का पालन नहीं हो रहा है। खरीदी केंद्रों में किसानों से डेढ़ से दो किलोग्राम प्रति तौल ज्यादा धान लिया जा रहा है। यहां सूखत के बहाने धान खरीदी में बड़े पैमाने पर खेला किया जा रहा है।

आपत्ति करने पर दूसरे किसान का धान तौलना शुरू

छत्तीसगढ़ के अमूमन सभी खरीदी केंद्रों में 41 से 42 किलोग्राम धान की तौलाई की जा रही है। किसानों की मजबूरी ये है कि तौल के समय अगर आपत्ति करते हैं, तो कर्मचारी संबंधित किसान के धान को छोड़कर उसके बाद के नंबर वाले किसान का धान तौल करना शुरू कर देते हैं। इसमें सबसे बड़ी परेशानी ये कि किसान को दोबारा टोकन लेना पड़ता है। टोकन कब का मिलेगा यह भी तय नहीं रहता। लंबे इंतजार के बाद जब नंबर आएगा, तब फिर वही दिक्कत। आखिर में परेशान किसान वही करते हैं, जैसा उन्हें कहा जाता है। यहां मौजूद हमाल जितनी मर्जी उतने धान का तौल केंद्र प्रभारी के इशारे पर करने लगते हैं।

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बिलासपुर जिले में भी गड़बड़ी उजागर

छत्तीसगढ़ के अमूमन सभी जिलों में इस तरह की स्थिति बनी हुई है। बिलासपुर जिले के कलेक्टर अवनीश शरण ने इसी तरह की गड़बड़ी और किसानों की शिकायत के बाद भी कार्रवाई ना किए जाने के आरोप में उप पंजीयक को शोकाज नोटिस जारी किया है। नोटिस का जवाब 24 घंटे के भीतर देने का निर्देश दिया है।

दरअसल पचपेड़ी क्षेत्र की सेवा सहकारी समिति, सोन में 30 दिसंबर को तहसीलदार द्वारा निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान 163 बोरी धान की तौल कराई गई, जिसमें प्रत्येक बोरी का औसत वजन 41.673 किलोग्राम पाया गया। यह मानक वजन 40.600 किलोग्राम से करीब एक किलोग्राम अधिक था।

निरीक्षण के बाद धान खरीदी केंद्रों में मानकों से अधिक धान तौलाई के मामले में लापरवाही बरतने पर उप पंजीयक सहकारिता मंजू पाण्डेय को कलेक्टर अवनीश शरण ने शो-कॉज नोटिस जारी किया है। उन्होंने 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है, अन्यथा एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी है। छत्तीसगढ़ के अमूमन सभी जिलों में इस तरह की स्थिति बनी हुई है।

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हर साल होता है करोड़ों का खेल

दरअसल खरीदी केंद्रों से राइस मिलर्स को धान का उठाव करना होता है। मगर राइस मिलरों की हड़ताल के कारण प्रदेशभर में धान का उठाव बेहद धीमी गति से हो रहा है। ऐसे में खरीदी केंद्रों में धान का उठाव ना होने के कारण सूखत की समस्या आती है। इसी सूखत के बहाने समितियों द्वारा हर वर्ष करोड़ों के धान का गोलमाल किया जाता है।

कांग्रेस पार्टी कर चुकी है आंदोलन

गौरतलब है कि प्रदेशभर में धान खरीदी केंद्रों में होने वाली गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस पार्टी पिछले महीने आंदोलन कर चुकी है। बावजूद इसके गड़बड़ी रुक नहीं रही है। इसे देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने फिर से आंदोलन की चेतावनी दी है। पार्टी द्वारा प्रदर्शन की सभी जिलों में तैयारी की जा रही है। अब देखना है कि बिलासपुर की तरह दूसरे जिलों में भी प्रशासन द्वारा इस व्यवस्था में सुधार के लिए सख्ती बरती जा रही है या नहीं।