टीआरपी डेस्क। एक समय में शांति का टापू माने जाने वाले छत्तीसगढ़ में अपराध की स्थिति दिन-ब-दिन भयावह होती जा रही है। विधानसभा सत्र में पूछे गए प्रश्न के जवाब से जो आंकड़े सामने आए हैं, वे न सिर्फ चौंकाने वाले हैं, बल्कि गहरी चिंता भी पैदा करते हैं। बीते ढाई सालों में राज्य में प्रतिदिन औसतन 2 से अधिक हत्याएं, 7 से ज्यादा दुष्कर्म, 20 से अधिक चोरियां और एक से अधिक लूट की घटनाएं दर्ज की गई हैं। हैरानी की बात यह है कि इन संगीन अपराधों पर लगाम लगाने में पुलिस व्यवस्था बुरी तरह नाकाम साबित हो रही है। आधे से ज्यादा मामलों में अब तक आरोपियों की गिरफ्तारी भी नहीं हो पाई है। जिससे पुलिस व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

विधानसभा में विधायक देवेंद्र यादव ने गृहमंत्री विजय शर्मा से प्रदेश में जनवरी 2023 से 15 जून 2025 के बीच हुई चोरी, लूट, हत्या, दुष्कर्म और गोलीबारी की घटनाओं तथा आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर जानकारी मांगी थी। हालांकि इस तय अवधि में 1 साल कांग्रेस की सरकार रही, जबकि शेष 1.5 साल भाजपा सत्ता में रही है। सरकार चाहे जो भी रही हो, अपराध के आंकड़े भयावह स्थिति को दर्शाते हैं। वहीं आरोपियों की गिरफ्तारी से जुड़ी जानकारी चौंकाने वाली है। अपराधियों को पकड़ने के मामले में छत्तीसगढ़ पुलिस बेदह कमजोर साबित हो रही है।

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सामूहिक हिंसा के मामले

पिछले डेढ़ साल की सरकार में भीड़ के द्वारा हिंसा किए जाने के भी मामले सामने आए हैं। जिसमें जून 2024 में बलौदा बाजार में कलेक्ट्रेट जलाए जाने की घटना, सितंबर 2024 में कबीरधाम की घटना और अक्टूबर 2024 में बलरामपुर और सूरजपुर की घटनाएं शामिल है।

अपराधों के भयावह आंकड़े

पिछले ढाई सालों में 902 दिनों में प्रदेश के 33 जिलों में 2,478 मर्डर, 1,009 लूटमार और 7,152 दुष्कर्म के मामले सामने आए हैं। आंकड़ों का विश्लेषण किया जाए तो, हर दिन का औसत 2 से ज्यादा मर्डर, 7 से ज्यादा दुष्कर्म ,1 से ज्यादा लूट, 20 से ज्यादा चोरियां हुई हैं। इन्हीं ढाई सालों में अपहरण के भी 7,826 मामले सामने आए हैं। अपहरण का विश्लेषण करें तो 8 से ज्यादा अपहरण प्रतिदिन हो रहे हैं। वहीं गिरफ्तारी के मामले में पुलिस बिलकुल नाकाम साबित होती दिख रही है।

राजधानी में अपराध का अंकड़ा

रायपुर में जनवरी 2023 से 15 जून 2025 तक 3,776 चोरी, 195 लूट, 181 हत्या, 580 दुष्कर्म, और 8 गोलीकांड हुए हैं। इन अपराधों में 4,740 FIR दर्ज किए गए हैं। जिसमें मात्र 1,542 मामलों में आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं। कुल दर्ज मामलों में से आधे मामलों में भी अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। रायपुर पुलिस सिर्फ एक तिहाई आरोपियों को ही गिरफ्तार कर पाई है।

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छत्तीसगढ़ के बड़े जिलों के आपराधिक आंकड़े

छत्तीसगढ़ से लगभग सभी जिलों में आपराधिक आंकड़ा बहुत बड़ा है और मामलों में गिरफ्तारी का आंकड़ा सीधे पुलिस की कार्य प्रणाली पे सवाल खड़े करता है।

  • बिलासपुर

न्यायधानी बिलासपुर में जनवरी 2023 से 15 जून 2025 तक 2,166 चोरी, 119 लूट, 136 हत्या, 611 दुष्कर्म और 3 गोलीकांड की घटनाएं हुई हैं। जिसमें 3,035 FIR दर्ज की गई है। इन दर्ज मामलों में से लगभग आधे मामलो में आरोपियों की गिरफ्तारियां भी हुई है। कुल 1,458 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

  • दुर्ग

दुर्ग जिले में भी पिछले ढाई सालों में 2,028 चोरी, 123 लूट, 121 हत्या, 369 दुष्कर्म और 3 गोलीकांड की घटनाएं हुईं हैं। इन मामलों में 2,644 FIR दर्ज किए गए है। जिनमें से 1,077 प्रकरण के आरोपियों की गिरफ्तारी ही हो पाई है जो आधे से भी कम है,

  • जगदलपुर

जगदलपुर में 257 चोरियां, 28 लूट, 53 हत्याएं, 237 दुष्कर्म और 1 गोलीकांड हुआ है। पिछले ढाई सालों में 576 FIR दर्ज किए गए हैं। हालांकि अन्य जिलों की तुलना में जगदलपुर पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले में उल्लेखनीय कार्य किया है। कुल 576 में 448 प्रकरणों में आरोपियों की गिरफ्तारियां हुई है।

  • सरगुजा
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जिले में 917 चोरियां, 38 लूट, 143 हत्याएं, 371 दुष्कर्म हुए हैं। सरगुजा में एक भी गोलीकांड का मामल दर्ज नहीं हुआ है। इन सभी मामलों में कुल 1,469 प्रकरण दर्ज किए गए और 759 मामलों में पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी की हैं।

  • रायगढ़

रायगढ़ जिले में 1,117 चोरियां, 53 लूट, 153 हत्याएं, 336 दुष्कर्म हुए हैं। इन ढाई सालों में रायगढ़ में एक भी गोलीकांड दर्ज नहीं हुआ है। पुलिस ने 1,659 प्रकरण दर्ज किए गए हैं जिसमें 823 प्रकरणों में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

  • कोरबा

ऊर्जा नगरी माने जाने वाले कोरबा जिले में 1,044 चोरियां, 55 लूट, 112 हत्याएं, 376 दुष्कर्म और 4 गोलीकांड हुए हैं। इनमें 1,591 अपराध दर्ज किए गए जिनमें लगभग आधे प्रकरण यानी 767 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।

छत्तीसगढ़ में अपराध की मौजूदा स्थिति सिर्फ कानून-व्यवस्था की विफलता नहीं, बल्कि शासन-प्रशासन की मौजूदा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रही है। जब हर दिन हत्या, दुष्कर्म, लूट, चोरी और अपहरण जैसी घटनाएं आम होती जा रही हैं और उनमें भी आधे से अधिक मामलों में अपराधी गिरफ्त से बाहर हों, तो यह सवाल खड़ा होता है कि आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है ?