0 कुलपति ने दोबारा जांच के लिए किया आश्वस्त

अंबिकापुर। संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2024-25 के परीक्षा परिणाम घोषित किए जाने के बाद विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने परिणामों को लेकर असंतुष्ट नजर आए,जहां उनके अंकों में व्यापक त्रुटियां पाई गईं हैं।

विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शून्य अंक प्रदान किए गए हैं, जो अत्यंत ही संदिग्ध है। विद्यार्थियों ने इसके संबंध में कई बार आवेदन देकर विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क किया किंतु कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया,जिससे निराश होकर विद्यार्थियों ने गैर राजनीतिक संगठन आज़ाद सेवा संघ प्रदेश सचिव रचित मिश्रा के नेतृत्व एवं छात्र मोर्चा जिला अध्यक्ष प्रतीक गुप्ता की उपस्थिति में और संगठन ने छात्रहित में आंदोलन का स्वरूप अपनाते हुए विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन कर नारेबाज़ी की और कुलपति को तीन सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा।

कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि आगामी 10 दिवस के भीतर सभी उत्तरपुस्तिकाओं की निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पुन: जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसमें आवश्यक सुधार करते हुए पूरी प्रक्रिया को छात्रहित में पूर्ण किया जाएगा।

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ज्ञापन में यही बात रखी गई कि विश्वविद्यालय द्वारा घोषित परीक्षा परिणाम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को शून्य अंक प्रदान किए गए हैं, जो अत्यंत ही संदिग्ध है।

छात्र नेता ने बताया कि य़ह परिणाम चिंताजनक स्थिति को दर्शाते हैं क्योंकि यह मानना कठिन है कि इतने सारे छात्र परीक्षा में कुछ भी न लिखें जबकि वे नियमित रूप से अध्ययनरत रहते हैं और न्यूनतम उत्तर तो देने की क्षमता रखते ही हैं।

दूसरी मांग यह रही कि कई विषयों विशेषकर बीए और बीएससी संकाय में अंकों के वितरण में एक निश्चित पैटर्न देखने को मिला जिससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि उत्तरपुस्तिकाओं का वास्तविक मूल्यांकन नहीं किया गया और केवल औपचारिकतावश परिणाम तैयार कर अंक प्रदान कर दिए गए,जो न केवल मूल्यांकन की पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह लगाता है बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य के साथ भी अन्याय की स्थिति उत्पन्न करता है।

तीसरी और अत्यंत गंभीर मांग में यह बात सामने आई कि संभाग के अधिकांश महाविद्यालयों में बीसीए संकाय के लगभग 90 प्रतिशत छात्रों को एक या दो विषयों में सामूहिक रूप से अनुत्तीर्ण घोषित कर दिया गया है,जिससे न केवल विद्यार्थियों की प्रगति रुकी है बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पडऩे की संभावना बनी है। इन्हीं सभी बातों को ध्यान में रखते हुए आज़ाद सेवा संघ ने छात्रहित में मांग की कि संभाग के सभी प्रभावित विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन पूर्णत: निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आगामी चार दिवसों के भीतर कराया जाए,क्योंकि यह लगातार कई सत्रों से देखा जा रहा है कि बड़ी संख्या में छात्रों को शून्य अंक दिए जा रहे हैं जबकि यह व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है कि हर छात्र पूर्णत: असफल हो। साथ ही उन छात्रों के लिए जिन्होंने प्रायोगिक परीक्षाओं में किसी अनिवार्य कारणवश भाग नहीं लिया उनके लिए पुन: प्रैक्टिकल परीक्षा का आयोजन किया जाए,जिससे उनका शैक्षणिक सत्र प्रभावित न हो।

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इन तमाम मांगों को लेकर दिए गए ज्ञापन को विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा गंभीरता से लिया गया और उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त करते हुए कहा कि आगामी 10 दिवस के भीतर सभी उत्तरपुस्तिकाओं की निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से पुन: जांच कराई जाएगी और यदि किसी भी प्रकार की त्रुटि पाई जाती है तो उसमें आवश्यक सुधार करते हुए पूरी प्रक्रिया को छात्रहित में पूर्ण किया जाएगा।