कोटा/भैंसाझार। छत्तीसगढ़ विधानसभा में अक्सर जिस अरपा-भैंसाझार परियोजना के भ्रष्टाचार की चर्चा होती है, उसके घटिया निर्माण की कलई धीरे-धीरे खुलती जा रही है। 11 साल बीत जाने के बावजूद यह परियोजना अब तक पूरी नहीं हो सकी है और इसका निर्माण कार्य भी अब ढहने लगा है।
अरपा नदी पर अरबों की लागत से बन रही सिंचाई परियोजना की पोल इस बार खुद बारिश ने खोल दी है। यहां बनाई गई सुरक्षा संरचना टोवाल (कटाव रोधी दीवार) इस बारिश में धराशायी हो गई।

बता दें कि ग्राम भैंसाझार में नदी किनारे बनाई गई टोवाल संरचना, जिसका उद्देश्य नहरों और खेतों की सुरक्षा करना था, इस बरसात में बह गई। जबकि न तो पानी का ज्यादा दबाव था और न ही कोई प्राकृतिक आपदा, फिर भी ये दीवार टिक न सकी। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों का साफ कहना है कि निर्माण में बेहद घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और काम की गुणवत्ता पर कोई निगरानी नहीं रखी गई।
ग्रामीण यह सवाल उठा रहे हैं कि न बारिश की बाढ़ आई, न नदी में उफान, फिर भी दीवार क्यों गिरी? सवाल यही है कि जब कोई बड़ा प्राकृतिक कारण नहीं था, तब सिर्फ एक बारिश में ही यह संरचना कैसे ध्वस्त हो गई? क्या यह साबित करने के लिए और किसी जांच की जरूरत है कि भ्रष्टाचार हुआ है?
कई अफसर हो चुके हैं निलंबित
अरपा-भैंसझार परियोजना के भ्रष्टाचार का मुद्दा पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और विधायक धरम लाल कौशिक ने उठाया, तब जाकर इस मामले की जांच रिपोर्ट के आधार पर कुछ अफसरों को निलंबित किया गया है। जल संसाधन विभाग ने इसके ठेकेदार को पहले ही 317.59 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है, जबकि नहर निर्माण अभी तक पूरा नहीं हुआ है। और अब जब टोवाल टूट गया, तो अधिकारियों की चुप्पी और मौन संरक्षण सीधे तौर पर सवालों के घेरे में है।
ग्रामीणों का गुस्सा फूटा — जांच और कार्रवाई की मांग
करोड़ों रुपये खर्च कर भी यह टोवाल नहीं टिक सका, अगर शुरुआत में ही सुरक्षा दीवार ध्वस्त हो गई है, तो आने वाले समय में नहरें और अन्य संरचनाएं कब तक टिकेंगी, इसकी क्या गारंटी है।
भैंसाझार के ग्रामीणों ने मांग की है कि जनता का पैसा बर्बाद करने वाले ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही एक उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कमेटी बनाकर पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए।



