राजनांदगांव। रेप की शिकार छह साल की मासूम दर्द से तड़पती रही और मेडिकल कॉलेज की संबंधित विभाग की महिला चिकित्सक ने इलाज करने से इंकार कर दिया। इस मामले की शिकायत के बाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के विभाग प्रमुख के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं। स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने मामले को गंभीरता से लिया है, और जांच के लिए टीम बनाई जा रही है। कांग्रेस पार्टी ने भी इस मामले में कार्यवाही के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
बताया जा रहा है कि यह मामला 7 अगस्त की रात का है। दर्द से बुरी तरह बिलखती-तड़पती रेप पीडि़त छह साल की बालिका को लेकर उसके परिजन और एक महिला पुलिस अफसर राजनांदगांव के मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। मगर वहां अस्पताल की विभाग प्रमुख महिला चिकित्सक ने इलाज करने से मना कर दिया। उन्होंने पहले जिला अस्पताल जाने के लिए कहा। महिला पुलिस अफसर और परिजन मिन्नत करते रहे, लेकिन महिला चिकित्सक ने इलाज करने से मना कर दिया। हद तो ये है कि उन्होंने अपने मातहत चिकित्सकों को भी इलाज करने से रोक दिया।
महिला चिकित्सक के इस गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के चलते परिजन और महिला पुलिस अफसर रेप पीडि़त बालिका को पहले जिला अस्पताल लेकर गए, फिर वहां से रेफर कराकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। इसके बाद ही करीब डेढ़ घंटे बाद पीडि़ता का इलाज शुरू हो पाया। दरअसल पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में गभीर चोटें आई थीं। इस पूरे मामले पर एसपी मोहित गर्ग ने कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर भुरे को पत्र लिखा है। उधर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने घटना की जानकारी मिलने के बाद नाराजगी जताई है, और मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद महिला चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। बताया जाता है कि इस चिकित्सक के खिलाफ पहले भी गंभीर शिकायतें रहीं हैं। इधर कांग्रेस पार्टी ने आज इस मामले की जांच के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। हालांकि इस मामले की जांच के आदेश पहले ही दे दिए गए हैं, मगर जांच टीम का गठन अभी नहीं किया गया है।



