टीआरपी डेस्क। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित चिशोती गांव में बादल फटने की एक दर्दनाक घटना सामने आई है। यह गांव मछेल माता यात्रा के मार्ग पर पड़ता है, और पदर उपखंड क्षेत्र में स्थित है। बादल फटने के बाद अचानक आई बाढ़ ने गांव में कहर बरपाया है। कई घर क्षतिग्रस्त हुए हैं और जान-माल के नुकसान की आशंका जताई जा रही है, हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रभावित क्षेत्र में जिला प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं। दोनों प्रमुख पुल – एक लकड़ी का पुल और दूसरा पीएमजीएसवाई योजना के तहत बना पुल – भारी पानी के दबाव से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। किश्तवाड़ के उपायुक्त पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि चिशोती क्षेत्र में अचानक आई बाढ़ ने जनजीवन को प्रभावित किया है। यह वही क्षेत्र है जहां से मचेल माता यात्रा की शुरुआत होती है। स्थिति को गंभीर मानते हुए प्रशासन ने तुरंत बचाव अभियान आरंभ कर दिया है और प्रभावितों की सहायता के लिए सभी जरूरी संसाधनों को सक्रिय कर दिया गया है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने भी तत्काल प्रतिक्रिया दी। उन्होंने किश्तवाड़ के उपायुक्त से बातचीत कर बचाव प्रयासों की जानकारी ली और आवश्यक संसाधन मुहैया कराने के निर्देश दिए। डॉ. सिंह ने बताया कि उन्हें यह जानकारी विपक्ष के नेता सुनील कुमार शर्मा से मिली, जिसके तुरंत बाद प्रशासन हरकत में आ गया।
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल कार्यालय ने भी इस घटना पर गहरी संवेदना व्यक्त की है। एक बयान में कहा गया है कि चिशोती क्षेत्र में हुई इस प्राकृतिक आपदा से वे अत्यंत व्यथित हैं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई है और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की गई है। साथ ही यह निर्देश दिया गया है कि सिविल प्रशासन, पुलिस, सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के अधिकारी मिलकर राहत कार्यों को गति दें और प्रभावितों को हरसंभव मदद पहुंचाएं।



