टीआरपी डेस्क : संसद के मानसून सत्र में आज, 18 अगस्त 2025 को दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामे के कारण स्थगित कर दी गई। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों के सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और चुनावी लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों को लेकर जोरदार नारेबाजी और हंगामा किया, जिसके चलते दोनों सदनों को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
विपक्ष का हंगामा और नियम 267 की मांग
संसद की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कथित ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर चर्चा की मांग उठाई। विपक्ष ने नियम 267 के तहत तत्काल चर्चा की मांग की, जिसमें प्रावधान है कि सदन के अन्य सभी कार्यों को स्थगित कर किसी विशेष मुद्दे पर चर्चा की जाए, जिसके बाद मतदान भी हो सकता है। राज्यसभा के उपसभापति ने बताया कि उन्हें विभिन्न सांसदों से नियम 267 के तहत 19 नोटिस प्राप्त हुए हैं, लेकिन पहले से तय नियमों का हवाला देते हुए चर्चा की अनुमति नहीं दी गई।
इसके जवाब में विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी तेज कर दी और लोकसभा में सांसद वेल में उतर आए। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की, लेकिन हंगामा न रुकने के कारण सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा में भी उपसभापति घनश्याम तिवारी ने हंगामे के बीच कार्यवाही को स्थगित करने का फैसला लिया।
विपक्ष के आरोप और सरकार का जवाब
विपक्षी दलों, विशेष रूप से इंडिया गठबंधन के नेताओं ने बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे “वोट चोरी” और “लोकतंत्र के लिए खतरा” करार दिया है। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में एक स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसमें बिहार में 52 लाख से अधिक मतदाताओं को सूची से हटाए जाने को “संस्थागत मतदाता सफाई” और “लोकतंत्र के लिए राष्ट्रीय आपातकाल” बताया। वहीं, सरकार और सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एसआईआर एक नियमित प्रक्रिया है और इसका कोई राजनीतिक मकसद नहीं है।
इंडियन पोर्ट बिल प्रस्तावित
हंगामे के बीच आज राज्यसभा में केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल द्वारा इंडियन पोर्ट बिल, 2025 पेश किया जाना है। इस विधेयक का उद्देश्य बंदरगाहों से संबंधित कानूनों का एकीकरण, एकीकृत बंदरगाह विकास को प्रोत्साहन, व्यापार सुगमता को बढ़ावा देना और भारत की समुद्री तटरेखा का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित करना है। हालांकि, विपक्ष के हंगामे के कारण इस पर चर्चा शुरू होने की संभावना कम दिख रही है।



