जशपुर। सरकार की पेयजल संबंधी तमाम योजनाओं के बावजूद आज के दौर में अगर लोग ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर हों तो इसे क्या कहा जाये..? पत्थलगांव विकासखंड क्षेत्र के ग्राम पंचायत बालाझर के असडियो पारा में ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। यहां बीते दो महीने से भी अधिक समय से लोग एक खेत में स्थित ढोढ़ी का पानी पी रहे हैं, और अधिकारी इनकी सुध नहीं ले रहे हैं।

ढोढ़ी का पानी पीने की क्या है वजह..?

स्थानीय ग्रामीण हरि प्रसाद ने बताया कि जून महीने के आखिर में आकाशीय बिजली के गिरने से गांव में लगे बोर का मोटर जल गया है, जिसकी विद्युत सप्लाई सोलर पैनल के माध्यम से संचालित की जाती थी l मोटर के खराब होने की सूचना क्रेडा विभाग को दी गई थी, जिसके बाद विभाग के कर्मचारियों द्वारा रिपयरिंग के लिए मोटर को वहां से निकाल कर ले जाया गया, मगर दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मोटर वापस नहीं लगाया गया है l

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बच्चे हो रहे हैं बीमार

ग्रामीणों का कहना है कि हम सब मोटर खराब होने के बाद से ही खेत में बने कुंवे का पानी पी रहे हैं। बच्चों को इस पानी को पीने से कई बार सर्दी, खांसी जैसी बीमारियों का भी सामना करना पड़ रहा है l उनका कहना है कि इस मोहल्ले में एक दर्जन से अधिक परिवार निवासरत है, जो इन दिनों खेत में बने ढोढ़ी का पानी पीने को मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने ये भी बताया कि मोटर खराब होने के बाद कुछ दिन पवन सिदार नामक व्यक्ति के घर से निजी बोर से पीने का पानी मिल जा रहा था परन्तु बीते दो महीनों से वह मोटर भी खराब हो गया है और समस्या जस की तस बानी हुई है। ग्रामीणों द्वारा मोटर सुधरवाने के लिए जन प्रतिनिधियों को भी कहा गया, फिर भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। हालांकि इसके बारे में उनके द्वारा ही विभाग को अवगत कराया गया था l ग्रामीणों ने शासन से गुहार लगाते हुए कहा कि यह समस्या बहुत ही गंभीर है और इसे जल्द से जल्द ठीक कराया जाये।

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उधर जशपुर के क्रेडा के उपअभियंता राहुल पैकरा का कहना है कि खराब मोटर को रिपयरिंग के लिए भेजा गया है जो इस हफ्ते आ जाएगा और उसे लगा दिया जायेगा।

सवाल यह उठता है कि अगर इसी तरह की समस्या इन अफसरों के आवासीय परिसरों में होती तो क्या इन्हें अपने मोटर को सुधरवाने में इतना वक्त लगता ? तब तो ये कुछ ही घंटों में अपना काम करा लेते, मगर यहां महीनों बीत गए और अफसरों को ग्रामीणों की सुध भी नहीं है।