• कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम नई दिल्ली में आयोजित ’राष्ट्रीय रबी सम्मेलन’ में हुए शामिल
    Chhattisgarh is known for its rice and millets: टीआरपी। छत्तीसगढ़ की पहचान धान और मिलेट्स से जुड़ी है। यह केवल अन्न नहीं, बल्कि हमारे इतिहास, परंपरा और संस्कृति की धरोहर है। राज्य के किसानों ने कठिन परिस्थितियों में भी कृषि परंपरा को जीवित रखा है। अब समय है कि इन परंपरागत फसलों को आधुनिक अनुसंधान और नीति समर्थन से नई मजबूती मिले। उक्त बातें कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय रबी सम्मेलन में कही। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
    कृषि मंत्री नेताम ने छत्तीसगढ़ की परंपरागत सुगंधित धान किस्मों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये किस्में हमारे गांवों की पहचान हैं, किंतु कम उत्पादकता के कारण किसान वांछित लाभ से वंचित हो जाते हैं। इन किस्मों पर अनुसंधान कर उत्पादकता बढ़ाने के प्रयास होने चाहिए और इन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में शामिल किया जाए।

  • मोटे अनाजों से आजीविका
    कृषि मंत्री ने मोटे अनाजों का महत्व बताते हुए कहा कि कोदो और कुटकी जैसे मिलेट्स छत्तीसगढ़ के किसानों की आजीविका से गहराई से जुड़े हैं। इनके लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर शासकीय उपार्जन सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि किसानों को सीधा लाभ मिल सके। धान की लंबी अवधि वाली किस्मों के कारण रबी की फसल समय पर बोने में आने वाली कठिनाइयों पर भी उन्होंने ध्यान आकर्षित किया।

  • कुत्थी की खेती
    कृषि मंत्री ने कुल्थी की खेती का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यह फसल छत्तीसगढ़ में व्यापक पैमाने पर बोई जाती है। इसमें औषधीय तथा पोषणीय गुण अपार हैं। इसके बावजूद अब तक इसका समर्थन मूल्य घोषित नहीं हुआ है। कुल्थी को भी एमएसपी पर शामिल किया जाए। भारत सरकार द्वारा प्रमुख बाजारों से जोड़ा जाए।
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