टीआरपी डेस्क। Navratri 2025 : इस बार शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 22 सितंबर, सोमवार से हो गई है। शारदीय नवरात्रि का आरंभ आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होता है। 36 किलों के गढ़ छत्तीसगढ़ में भी नवरात्रि पर्व में भक्तगण बड़ी श्रद्धा से मां दुर्गा की उपासना करते है। छत्तीसगढ़ में 5 प्रमुख शक्तिपीठ हैं। डोंगरगढ़ में – मां बमलेश्वरी, रतनपुर में – मां महामाया, चंद्रपुर में – मां चंद्रहासिनी, दंतेवाड़ा में – मां दंतेश्वरी, और सूरजपुर जिले में – मां कुदरगढ़ी। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में कई देवी मंदिर है जहां नवरात्रि में लाखों की संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ती है। इस लेख में हम 36गढ़ के प्रमुख 36 मंदिरों के बारें में जानेंगे-

  1. मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ में स्थित मां बम्लेश्वरी का मंदिर छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख शक्ति पीठ है। पहाड़ी पर बसे इस मंदिर तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों और रोपवे दोनों का विकल्प है। नवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु एकत्र होकर मां की आराधना करते हैं और मेला पूरे क्षेत्र की रौनक बढ़ा देता है।

  1. मां करेला भवानी

भंडारपुर गांव (राजनांदगांव) में स्थित मां करेला भवानी का मंदिर 900 सीढ़ियां चढ़कर पहुंचा जाता है। सीढ़ियों के दोनों ओर हरियाली भक्तों का मन मोह लेती है। नीचे भवानी तालाब है, जहां स्नान कर भक्त माता के दर्शन के लिए ऊपर चढ़ते हैं। नवरात्रि पर यहां विशाल मेला लगता है।

  1. मां पाताल भैरवी मंदिर

राजनांदगांव में स्थित यह मंदिर अपने अनोखे स्वरूप के लिए प्रसिद्ध है। मां की प्रतिमा पाताल यानी जमीन के नीचे स्थापित है। दूसरी मंजिल पर त्रिपुर सुंदरी और नवदुर्गा की पूजा होती है, जबकि तीसरी मंजिल पर भगवान शिव और 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रतिरूप देखे जा सकते हैं।

  1. चंडी माता मंदिर

महासमुंद जिले के बागबाहरा विकासखंड के घुंचपाली गांव में चंडी माता मंदिर प्रसिद्ध है। यहां 23 फीट ऊंची स्वयंभू पत्थर की मूर्ति स्थापित है, जो समय के साथ बड़ी होती जा रही है। दक्षिणमुखी मूर्ति और मंदिर के आसपास का जंगल इसकी अद्भुत आभा को और बढ़ाते हैं। यहां जंगली भालुओं का आना भी चमत्कार माना जाता है।

  1. बंजारी माता मंदिर, रायपुर

रायपुर का बंजारी माता मंदिर लोकप्रिय मंदिरों में से एक है, जो बिलासपुर रोड पर रावांभाठा गांव में स्थित है। यह स्वयंभू माता की शक्ति का प्रतीक है, ऐसी मान्यता है कि मां की प्रतिमा 500 साल पहले बंजर भूमि से प्रकट हुई थी और धीरे-धीरे समय के साथ बढ़ती गई है। मंदिर में अन्य देवी-देवताओं जैसे भगवान विष्णु, शिव, गणेश, हनुमान के भी उप-मंदिर हैं, और यहां स्वर्ग-नरक की झांकी भी देखने योग्य है।

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  1. महामाया मंदिर, रायपुर

रायपुर के श्री राजराजेश्वरी महामाया मंदिर एक प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है जो पुरानी बस्ती में स्थित है। यह देवी महामाया को समर्पित है, जिन्हें शिव और विष्णु का संयुक्त स्वरूप माना जाता है, और यह छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर अपनी स्थापत्य और पौराणिक विशेषताओं के लिए जाना जाता है, जिसमें विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यह लगभग 1400 साल पुराना है और हैहयवंशी राजाओं द्वारा बनवाया गया था।

  1. मां दंतेश्वरी मंदिर

दंतेवाड़ा जिले में शकिनी-डंकिनी नदियों के संगम पर स्थित यह मंदिर 52 शक्ति पीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां माता सती का दांत गिरा था। यह तांत्रिक साधना का भी प्रमुख केंद्र माना जाता है।

  1. मावली माता मंदिर

धमतरी जिले के पुरुर गांव में स्थित यह मंदिर अपनी परंपराओं के लिए विशेष है। यहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। नवरात्र में यहां 166 ज्योतियां प्रज्वलित होती हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

  1. चंडी देवी मंदिर, बिरकोनी

महासमुंद जिले के बिरकोनी गांव में स्थित यह सिद्ध शक्ति पीठ स्वयंभू है। कहा जाता है कि देवी ने स्वयं यहां वास स्थापित किया। नवरात्र में मंदिर 24 घंटे खुला रहता है और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

  1. खल्लारी माता मंदिर

महासमुंद से 24 किमी दूर पहाड़ियों पर बसे इस मंदिर में भक्त विशेषकर संतान सुख की कामना लेकर आते हैं। नवरात्र के समय यहां श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ता है और भक्त मनोकामना ज्योति प्रज्वलित करते हैं।

  1. मां चंद्रहासिनी मंदिर

जांजगीर-चांपा जिले के चंद्रपुर में महानदी के किनारे स्थित यह मंदिर छत्तीसगढ़ के प्राचीन धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। नवरात्रि के दिनों में यहां भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ती है और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है।

  1. नाथल दाई मन्दिर

नाथल दाई मन्दिर टिमरलगा -चन्द्रपुर ,चंद्रहासिनी मंदिर के समीप में ही है यह मंदिर महानदी के तट पर दो नदियों के संगम पर स्थित है | कहते है की यदि कोई भक्त नाथल दाई के दर्सन करने मात्र से ही उसके सभी पाप नष्ट हो जाते है |

  1. सिद्धी माता मंदिर बेमेतरा

ग्राम सण्डी स्थित सिद्धि माता मंदिर में होली के अवसर पर होने वाली पशु बलि पर रोक लगा दी गई है। साथ ही इस वर्ष यहां भरने वाला मेला भी नहीं होगा। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के चलते इसकी समझाइश ग्रामीणों को दी गई है।

  1. रतनपुर महामाया मंदिर
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बिलासपुर के पास रतनपुर में स्थित महामाया देवी का मंदिर 52 शक्ति पीठों में से एक है। यहां देवी को कोशलेश्वरी कहा जाता है और नगर का पूरा परिवेश धार्मिक माहौल से भरा रहता है।

  1. मरही माता मंदिर

बिलासपुर जिले के भनवारटंक रेलवे स्टेशन के पास जंगलों के बीच स्थित यह मंदिर शांत वातावरण और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। नवरात्र में यहां भक्तों की बड़ी संख्या उमड़ती है।

  1. माता अंगारमोती

धमतरी जिले का अंगारमोती मंदिर वन देवी को समर्पित है। यह स्थान धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन का भी केंद्र है।

  1. बिलाई माता मंदिर

धमतरी शहर के दक्षिण में स्थित यह मंदिर मां विंध्यवासिनी के रूप में प्रसिद्ध है। चैत्र और क्वांर नवरात्र के दौरान यहां विशेष उत्सव आयोजित होता है।

  1. जतमाई मंदिर

गरियाबंद जिले में जंगलों के बीच स्थित जतमाई मंदिर झरनों और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। वर्षा ऋतु में यहां का नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है।

  1. घटारानी मंदिर

गरियाबंद जिले का यह मंदिर पहाड़ी की खोह में स्थित है। पास ही झरना और कुंड इसे और भी आकर्षक बनाते हैं। घटेश्वरनाथ शिवलिंग भी यहां पूजनीय है।

  1. कुदरगढ़ी धाम, सूरजपुर

सूरजपुर जिले में लगभग 1500 फीट ऊंचे पहाड़ पर स्थित यह मंदिर माता बागेश्वरी को समर्पित है। बैगा जनजाति के लोग यहां पीढ़ियों से पूजा करते आ रहे हैं।

  1. महामाया मंदिर

सूरजपुर जिले के देवीपुर गांव में स्थित यह मंदिर बेहद प्राचीन माना जाता है। नवरात्र में यहां मेले का आयोजन होता है और आसपास के क्षेत्र से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

  1. खुड़िया रानी देवी मंदिर

जशपुर जिले के बगीचा जनपद में 3000 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर पहाड़ी कोरवा जनजाति की कुल देवी को समर्पित है। मंदिर की गुफा से बहती जलधारा श्रद्धालुओं को शांति प्रदान करती है।

  1. मड़वारानी मंदिर

कोरबा और चांपा जिले के बीच स्थित इस मंदिर से जुड़ी मान्यता है कि देवी ने विवाह मंडप छोड़कर इस पहाड़ को अपना निवास बनाया। नवरात्र में यहां मनोकामना ज्योति कलश प्रज्वलित किए जाते हैं।

  1. मां सियादेवी मंदिर

बालोद जिले में स्थित यह मंदिर माता सीता से जुड़ी पौराणिक कथाओं के लिए प्रसिद्ध है। त्रेतायुग से जुड़ी मान्यताओं के कारण यहां का महत्व और बढ़ जाता है।

  1. गंगा मइया मंदिर

बालोद जिले के झलमला क्षेत्र का यह मंदिर अंग्रेज़ों के शासनकाल से जुड़ी कथाओं के लिए जाना जाता है। करीब 130 साल पुराना यह स्थल आज भी लोगों की आस्था का केंद्र है।

  1. मां गंगई मंदिर
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कवर्धा जिले का यह मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां नवरात्रि में तृतीया तिथि से मनोकामना ज्योति प्रज्ज्वलित की जाती है। पास में स्थित बावली प्राचीन वास्तुकला का उदाहरण है।

  1. अष्टभुजी माता मंदिर

जांजगीर-चांपा जिले के अड़भार गांव में स्थित यह मंदिर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। नवरात्र के दौरान यहां भक्तों का सैलाब उमड़ता है।

  1. भद्रकाली माता मंदिर, बेमेतरा

बाजार पारा में स्थित यह मंदिर नगर की कुलदेवी को समर्पित है। खास बात यह है कि मंदिर के सामने मस्जिद भी है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

  1. महिषासुर मर्दनी, चैतुरगढ़

कोरबा के पाली से 25 किमी दूर पहाड़ी पर स्थित चैतुरगढ़ किला प्राकृतिक सुंदरता और महिषासुर मर्दनी मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थल धार्मिक होने के साथ-साथ पर्यटन का भी आकर्षण है।

  1. माता कौशल्या मंदिर, चंदखुरी

रायपुर से 22 किमी दूर चंदखुरी गांव में झील के बीच स्थित यह मंदिर माता कौशल्या को समर्पित है। मान्यता है कि यहीं माता कौशल्या का जन्म हुआ था, इस कारण छत्तीसगढ़ को भगवान राम का ननिहाल कहा जाता है।

  1. सर्वमंगला मंदिर, कोरबा

हसदेव नदी के किनारे स्थित यह मंदिर मां दुर्गा को समर्पित है। रोजाना सैकड़ों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

  1. सिद्धपीठ मां महामाया मंदिर

कवर्धा जिले के डोंगरिया कला गांव में स्थित यह मंदिर स्वयंभू शिवशक्ति परिवार की प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। क्षेत्रीय श्रद्धालुओं की आस्था का यह प्रमुख केंद्र है।

  1. बंजारी माता मंदिर, रायगढ़

शहर से 20 किमी दूर स्थित यह मंदिर बंजारा समाज की कुलदेवी को समर्पित है। यहां का तालाब और गार्डन इसे पर्यटन स्थल के रूप में भी आकर्षक बनाते हैं।

  1. अंबेटिकरा मंदिर

धरमजयगढ़ से 7 किमी दूर स्थित यह मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है। पास ही भगवान गणेश और हनुमान जी की 30 फीट ऊंची प्रतिमाएं हैं। मंदिर से जुड़ी कथा बताती है कि भगवान राम इस क्षेत्र में तीन वर्ष रुके थे।

  1. बुढ़ी माई मंदिर, रायगढ़

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में तराईमाल रोड पर स्थित बूढ़ी माई मंदिर और मां बंजारी का प्रसिद्ध देवी मंदिर है। यहां साल भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

  1. हिंगलाज माता सिद्धपीठ

कवर्धा जिले के सुतियापाट पहाड़ पर 2500 फीट की ऊंचाई पर स्थित हिंगलाज माता का मंदिर 52 सिद्ध पीठों में गिना जाता है। भक्त पथरीले रास्तों से चढ़कर माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।