टीआरपी डेस्क। लद्दाख की राजधानी लेह में 24 सितंबर को हुई हिंसा के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं। हिंसा में अब तक 4 लोगों की मौत हो चुकी है और 80 से ज्यादा घायल हुए हैं, जिनमें 40 पुलिसकर्मी शामिल हैं। लेह में तीसरे दिन भी कर्फ्यू लागू है और सभी स्कूल-कॉलेज बंद हैं।

विदेशी साजिश की आशंका

लद्दाख के उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता ने हिंसा के पीछे विदेशी हाथ होने की आशंका जताई है। पुलिस जांच में सामने आया कि झड़प में 7 नेपाली नागरिक और जम्मू-कश्मीर के डोडा के कुछ युवक शामिल थे। अधिकारियों का मानना है कि हिंसा पूर्वनियोजित थी और संभव है कि कुछ विदेशी तत्वों ने इसे हवा दी हो।

सरकार का सख्त कदम: वांगचुक की संस्थाओं पर शिकंजा

पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की संस्था SECMOL का FCRA (विदेशी फंडिंग) लाइसेंस गृह मंत्रालय ने रद्द कर दिया है। दूसरी संस्था HIAL पर भी जांच शुरू की गई है। आरोप है कि इन संस्थाओं ने विदेशी चंदा अवैध तरीके से लिया और उसका गलत इस्तेमाल किया।

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CBI अब 2022-24 की अवधि के अलावा 2020 और 2021 के अकाउंट्स की भी जांच कर रही है। आयकर विभाग ने भी नोटिस भेजा है और पुरानी शिकायतें दोबारा खोली गई हैं।

वांगचुक का आरोप: बलि का बकरा बनाया जा रहा

सोनम वांगचुक ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि असली मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है। उनके मुताबिक, छठी अनुसूची और राज्य के दर्जे की मांग को दबाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

कैसे भड़की हिंसा

23 सितंबर की रात सोशल मीडिया पर लद्दाख बंद का आह्वान किया गया। अगले दिन प्रदर्शनकारियों ने लेह हिल काउंसिल का घेराव करने की कोशिश की। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर रोका तो झड़प शुरू हो गई। भीड़ ने पथराव किया, वाहनों में आग लगाई और भाजपा कार्यालय व हिल काउंसिल की इमारत को नुकसान पहुंचाया। अब तक पुलिस 60 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।

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