0 कोरिया वनमंडल के देवगढ़ रेंज का मामला
कोरिया। कोरिया वनमंडल के देवगढ़ वन परिक्षेत्र से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां फर्जी वनअधिकार पट्टा देकर ग्रामीणों से ठगी की गई है, जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने डीएफओ से की है। भैंसवार ग्राम पंचायत निवासी सुरेंद्र साहू ने आरोप लगाया है कि उन्हें वनअधिकार पट्टा देने के नाम पर ठगा गया है।
फॉरेस्ट की वर्दी पहने हुए थे ठग
सुरेंद्र साहू ने बताया दो साल पहले कुछ लोग उनके पास आए और अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि जमीन का ओरिजिनल पट्टा बना देंगे, लेकिन इसके लिए पैसा देना होगा। इस दौरान एक व्यक्ति ने फॉरेस्ट विभाग की वर्दी पहन रखी थी। उसने बताया कि वो फॉरेस्ट विभाग में ही काम करता है, इसलिए पट्टा बनाने में आसानी होगी। सुरेंद्र साहू के मुताबिक उसने भरोसा करते हुए कृष्ण कुमार कुर्रे नाम के व्यक्ति को 25 हजार रुपए सौंप दिए। जिसके बाद उन्हें एक पट्टा दिया गया।
अफसरों ने बताया- फर्जी है पट्टा
ग्रामीणों को दिए गए पट्टा को फॉरेस्ट विभाग में दिखाया गया तो अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि यह पट्टा नकली और फर्जी है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी बताया कि इसी तरह के फर्जी पट्टे कुछ अन्य लोगों को भी दिए गए हैं। इससे ना केवल आर्थिक नुकसान हुआ है बल्कि हमारे साथ छल भी किया गया है। अब हम चाहते हैं कि हमारा पैसा वापस दिलाया जाए और दोषियों पर कार्रवाई हो।
पट्टा जारी करने की होती है विधिवत प्रक्रिया
इस मामले पर कोरिया वनमण्डल के डीएफओ चन्द्रशेखर शंकर सिंह परदेशी ने कहा कि वन अधिकार से जुड़े जो प्रकरण होते हैं जिन्हें वन अधिकार पट्टा कहा जाता है, वे केवल जिला स्तर पर विशेष बैठक के बाद ही जारी किए जाते हैं।
वन अधिकार पट्टा जारी करने के लिए कलेक्टर, डीएफओ और दूसरे अधिकारी हस्ताक्षर करते हैं। उनके बिना कोई पट्टा मान्य नहीं होता। यदि किसी ने फर्जी तरीके से दस्तावेज बनाकर लोगों से पैसा लिया है तो यह गंभीर कानूनी अपराध है।
ठगने वालों पर की जाएगी सख्त कार्रवाई
डीएफओ ने इस मामले में कहा है कि यदि इस मामले में वन विभाग का कोई कर्मचारी शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही फर्जी पट्टा बनाने और लोगों से पैसे लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस घटना के सामने आने के बाद देवगढ़ रेंज क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई है और ग्रामीणों में रोष है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि किसने ग्रामीणों को ठगी शिकार बनाया है।



