टीआरपी डेस्क। Congress District Presidents : छत्तीसगढ़ कांग्रेस संगठन में नए जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर पार्टी ने रायशुमारी की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह कवायद न सिर्फ संगठनात्मक मजबूती के लिए की जा रही है, बल्कि आगामी चुनावों के मद्देनजर स्थानीय नेतृत्व के पुनर्गठन की अहम रणनीति भी है। हालांकि, इस प्रक्रिया के पीछे गुटों के समीकरण, वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशें और सत्ता की दावेदारी जैसे तमाम अंतर्विरोधी पहलू भी उभरकर सामने आ रहे हैं।

दावेदारों की भरमार

एक ओर जहां रायपुर शहर में ही 50 से अधिक दावेदारों ने आवेदन किए हैं, वहीं दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए 31 और ग्रामीण अध्यक्ष पद के लिए 7 नाम सामने आ चुके हैं। जो कांग्रेस संगठन में भीतरघात या नेतृत्व के खालीपन की ओर इशारा कर रहा है।

इतनी बड़ी संख्या में दावेदारों का सामने आना कांग्रेस में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की सक्रियता को दर्शाता है लेकिन यह सवाल भी खड़ा करता है कि, क्या पार्टी के पास पर्याप्त स्वीकार्य और प्रभावी नेतृत्व नहीं बचा है, जो इतना बिखराव देखने को मिल रहा है ?

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नियुक्ति को लेकर खेमेबाजी चरम पर

दुर्ग में मौजूदा अध्यक्ष राकेश ठाकुर को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का समर्थन प्राप्त है। वहीं, पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू अपने करीबियों के पक्ष में माहौल बना रहे हैं। यह साफ संकेत है कि जिलाध्यक्षों की नियुक्ति भी कांग्रेस के भीतर शक्ति-संतुलन का हिस्सा है, जहां वरिष्ठ नेता अपने-अपने खेमों के लोगों को आगे बढ़ाना चाहते हैं।

संगठन ने अपनाया पारदर्शिता का ढांचा

AICC द्वारा निर्धारित आवेदन प्रक्रिया में उम्मीदवारों से संगठनात्मक और चुनावी अनुभव, पार्टी के साथ जुड़ाव की अवधि, अब तक निभाए गए कर्तव्यों और आपराधिक मामलों का विवरण सहित कई अन्य जानकारियां मांगी है। यह कदम संगठन में पारदर्शिता और योग्यता आधारित चयन की मंशा को दिखाता है। हालांकि, व्यवहारिक रूप से इसे कितना लागू किया जाएगा, यह देखना अभी बाकी है।

केन्द्रीय पर्यवेक्षक की भूमिका

दुर्ग के पर्यवेक्षक अजय कुमार लल्लू ने सभी दावेदारों से मुलाकात कर बातचीत की। वहीं रायपुर पर्यवेक्षक प्रफुल्ल गुदाधे 8 अक्टूबर को रायशुमारी के लिए पहुंचने वाले हैं । पर्यवेक्षकों की भूमिका अहम है, लेकिन यह सवाल बना रहेगा कि क्या वे स्थानीय नेताओं के दबाव और अनुशंसा से ऊपर उठकर वास्तविक जमीनी कार्यकर्ताओं को मौका देंगे ?

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कांग्रेस का यह आंतरिक चुनाव अहम क्यों ?

  • लोकसभा चुनाव 2029 और छत्तीसगढ़ में संभावित राजनीतिक बदलाव के लिए जिलाध्यक्षों का मजबूत होना आवश्यक है।
  • BJP से मिली हार के बाद कांग्रेस संगठन मनोबल और रणनीति, दोनों ही स्तर पर पीछे है, जिले में प्रभावशाली नेतृत्व ही आगामी कार्यप्रणाली को मजबूत सकता है।
  • नए अध्यक्षों के चयन से यह भी तय होगा कि पार्टी में नई पीढ़ी को कितना मौका मिलता है और क्या पुराने चेहरों पर ही भरोसा किया जाता है।

बड़ी संख्या में दावेदारों का उभरना पार्टी की अंतरिक सक्रियता का संकेत है लेकिन यह आंतरिक मतभेदों और गुटबाजी को भी उजागर करता है। संगठन का यह प्रयास तभी सफल होगा जब चयन में पारदर्शिता, क्षमता और जमीनी पकड़ को प्राथमिकता दी जाए, न कि सिफारिश और खेमेबादी को। यदि रायशुमारी एक औपचारिकता मात्र बनकर रह गई, तो इससे कार्यकर्ताओं में निराशा फैलेगी और स्थानीय स्तर पर संगठन कमजोर होता जाएगा।

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अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या कांग्रेस इस बार वास्तव में अपने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने में सफल हो पाएगी, या ये नियुक्तियां भी राजनीतिक समीकरणों का शिकार हो जाएंगी ?

प्रमुख दावेदारों की सूची

  • श्रीकुमार मेनन
  • कन्हैया अग्रवाल
  • राजू घनश्याम तिवारी
  • मनोज कंदोई
  • सुबोध हरितवाल
  • विनोद तिवारी
  • एजाज ढेबर
  • दीपक मिश्रा
  • शिव सिंह ठाकुर
  • श्रीनिवास ‘सीनू’
  • अमित शर्मा ‘मोंटा’
  • पंकज मिश्रा
  • सारिक रईस खान
  • अजीज ‘गोलू’ भिसरा
  • दिलीप सिंह चौहान
  • इंद्रजीत गहलोत
  • धनंजय ठाकुर
  • सुनील कुकरेजा
  • प्रीति कुणाल शुक्ला (एकमात्र महिला दावेदार)
  • सतनाम सिंह पनाग
  • अमित राजेंद्र तिवारी

Congress District Presidents : इनके अलावा भी अन्य 15 नाम हैं, जिनमें कुछ युवा कांग्रेस, NSUI, पार्षद और पूर्व पदाधिकारी शामिल हैं।