टीआरपी डेस्क। Cracking Tectonic Plate : पृथ्वी की सतह हमेशा हिलती-डुलती रहती है, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है। भारत की मुख्य टेक्टॉनिक प्लेट (इंडियन प्लेट) तिब्बत के नीचे 2 हिस्सों में फट रही है। इससे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और बड़े भूगर्भीय बदलाव हो सकते हैं। अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक नई स्टडी में यह बात सामने आई है। यदि यह जल्दी हुआ, तो हिमालय क्षेत्र में लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।

टेक्टॉनिक प्लेट टूटने की कहानी

पृथ्वी की ऊपरी सतह कई प्लेट्स (टेक्टॉनिक प्लेट्स) में बंटी है, जो धीरे-धीरे हिलती हैं। भारत की प्लेट अफ्रीका से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ रही है। अब नई रिसर्च बताती है कि यह प्लेट तिब्बत के नीचे 100 km गहराई पर 2 हिस्सों में बंट रही है। ऊपरी हिस्सा हिमालय की ओर बढ़ रहा है, जबकि निचला हिस्सा मंगोलिया की ओर खिसकता जा रहा है।

नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपी इस स्टडी के मुताबिक, यह प्रक्रिया 50 लाख साल पहले शुरू हुई थी लेकिन अब तेज हो गई है। वैज्ञानिकों ने सिस्मिक वेव्स (भूकंप की लहरों) का अध्ययन किया, जो दिखाता है कि प्लेट के बीच में एक रिफ्ट (दरार) बन रहा है। यह फटाव 200-300 km लंबा है। यदि यह बढ़ा तो तिब्बत का पठार और हिमालय की चोटियां बदल सकती हैं।

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वैज्ञानिकों ने बड़े खतरों की दी चेतावनी

स्टडी के प्रमुख वैज्ञानिक ब्रैडेन चाउ ने कहा कि यह प्लेट टूटना हिमालय के निर्माण का नया चरण हो सकता है। लेकिन इससे बड़े भूकंप आ सकते हैं, जो 8 या 9 तीव्रता के होंगे। कोलोराडो यूनिवर्सिटी की टीम ने 20 साल के डेटा का विश्लेषण किया। वे कहते हैं कि तिब्बत के नीचे प्लेट का निचला हिस्सा पिघल रहा है। इससे मैग्मा ऊपर आ सकता है, जो ज्वालामुखी पैदा करेगा।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के डॉ. आरके सिंह कहते हैं कि यह भारत के लिए खतरा है। हिमालय पहले ही भूकंप संवेदनशील है। 2005 का कश्मीर भूकंप (7.6 तीव्रता) इसी प्लेट की वजह से था। यदि दरार बढ़ी, तो दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों तक झटके महसूस होंगे। स्टडी के अनुसार यह बदलाव अगले 10-20 लाख साल में होगा, लेकिन छोटे-छोटे भूकंप अब ही बढ़ सकते हैं।

टेक्टॉनिक्स प्लेट का खेल

टेक्टॉनिक प्लेट्स पृथ्वी की बाहरी परत (क्रस्ट) के टुकड़े हैं, जो मैग्मा पर तैरते हैं। भारत की प्लेट हर साल 5 cm उत्तर की ओर बढ़ती है। तिब्बत के नीचे यह ‘सबडक्शन’ (नीचे धंसना) के बजाय ‘रिफ्टिंग’ (टूटना) कर रही है।

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कैसे पता लगी समस्या ?

भूकंप की लहरें प्लेट के अंदर से गुजरते हुए बदल जाती हैं। वैज्ञानिकों ने GPS डेटा और सैटेलाइट इमेज से देखा कि तिब्बत ऊंचा हो रहा है। जिससे वैज्ञानिकों को यह समझ में आया कि टेक्टॉनिक प्लेट्स में दरार आ रही है।

क्यों आ रही है टेक्टॉनिक प्लेट्स में दरार ?

प्लेट का दबाव ज्यादा हो गया है। ऊपरी हिस्सा हिमालय को ऊंचा कर रहा है (हर साल 5 mm), लेकिन निचला हिस्सा फिसल नहीं पा रहा है। जिससे फटाव की स्थिति पैदा हो रही है और नई प्लेट्स बन रही है, जो हिमालय को और ऊंचा या चपटा कर सकती हैं। यह प्रक्रिया धीमी है, लेकिन असर लंबा चलेगा।

टेक्टॉनिक प्लेट्स में दरार के संभावित प्रभाव

  • भूकंप का खतरा

हिमालय बेल्ट में 80% दुनिया के बड़े भूकंप आते हैं। भारत, नेपाल, चीन में लाखों घर ढह सकते हैं। 2015 नेपाल भूकंप से 9,000 मौतें हुईं हैं।

  • ज्वालामुखी और बाढ़

मैग्मा ऊपर आने से नए ज्वालामुखी, ग्लेशियर पिघलने से गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियों में बाढ़ की संभावनाएं बन सकती है।

  • मानव जीवन
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10 करोड़ से ज्यादा लोग हिमालय क्षेत्र में रहते हैं। दिल्ली-NCR तक भूकंप के झटके असर दिखाते हैं। ऐसी स्थिति में अर्थव्यवस्था को ₹1 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है।

  • पर्यावरण

हिमालय की जैव विविधता खतरे में है, जलवायु बदलाव तेजी से हो रहा है जिससे पार्यवरण में अप्रत्याशित बदलाव हो रहे हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्राकृतिक है, लेकिन हमें तैयार रहना होगा। भूकंपरोधी इमारतें बनाएं। मॉनिटरिंग बढ़ाएं।

भारत की तायारी कैसी ?

भारत सरकार ने GSI को और फंड दिए हैं। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) अब तिब्बत बॉर्डर पर 50 नए सेंसर लगाएगा। मामले को लेककर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हिमालय हमारा खजाना है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है। चीन के साथ डेटा शेयरिंग पर बात हो रही है, क्योंकि तिब्बत उनका क्षेत्र है।

आगे की स्थिति क्या ?

वैज्ञानिकों का कहना हैं कि यह बदलाव पृथ्वी का सामान्य चक्र है। लेकिन चेतावनी समय पर मिली है। यदि हम सतर्क रहे, तो नुकसान को कम कर सकते हैं। दुनिया के वैज्ञानिक अब इस पर नजर रखेंगे।