टीआरपी डेस्क। ADGP Suicide Case : 7 अक्टूबरॉ को हरियाणा कैडर के वरिष्ठ IPS अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या की खबर ने देशभर में प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों को झकझोर कर रख दिया। यह सिर्फ एक अफसर की आत्महत्या की खबर नहीं, यह जातिगत भेदभाव, संस्थागत उत्पीड़न और प्रशासनिक असंवेदनशीलता की उस गहराई को उजागर करता है जिसे आज भी कई अधिकारी भुगत रहे हैं।

आत्महत्या के पहले लिखी वसीयत

पूरन कुमार ने आत्महत्या से ठीक 1 दिन पहले 6 अक्टूबर को वसीयत तैयार की, जिसमें उन्होंने अपनी संपत्ति पत्नी अमनीत पी. कुमार के नाम कर दी। उन्होंने 9 पन्नों का विस्तृत सुसाइड नोट भी लिखा, जिसमें न केवल अपनी पीड़ा साझा की, बल्कि 15 वरिष्ठ अधिकारियों के नाम भी लिए, जिनमें हरियाणा के मुख्य सचिव, डीजीपी, पूर्व गृह सचिव, पूर्व डीजीपी और अन्य वरिष्ठ IPS अधिकारी शामिल हैं।

उत्पीड़न के आरोप

पूरन कुमार ने सुसाइड नोट में जिन समस्याओं और अपमानों का जिक्र किया, वे प्रशासनिक व्यवस्था की गहरी खामियों की ओर इशारा करते हैं। बार-बार अपमानजनक पोस्टिंग, झूठे मामले गढ़ना और उनके खिलाफ झूठी शिकायतें करना। व्यक्तिगत आस्थाओं पर टिप्पणियां, जैसे मंदिर जाना। पिता की मृत्यु पर छुट्टी न देना, जिसे उन्होंने ‘अपूरणीय क्षति’ बताया। लंबित वेतन और सुविधाएं रोकना। जातिवादी टिप्पणियां और सामाजिक बहिष्कार समेत अंत में एक IPS अधिकारी द्वारा आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग, जिसे उन्होंने ‘अंतिम ट्रिगर’ बताया है।

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पत्नी ने जापान से किए 15 कॉल

जब वसीयत और सुसाइड नोट उनकी पत्नी IAS अमनीत पी. कुमार को भेजा गया, उस समय वह मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ जापान में एक सरकारी दौरे पर थीं, उन्होंने घबराकर अपने पति को 15 बार फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुआ। जिसके बाद उन्होंने तत्काल अपनी बेटी अमूल्या को घर भेजा, जिसने बेसमेंट में खून से लथपथ अपने पिता को देखा। यह दृश्य सिर्फ पारिवारिक त्रासदी नहीं, यह व्यवस्था की संवेदनहीनता का दस्तावेजी सबूत बन कर सामने आया है।

सिस्टम से जवाब मांग रहीं पत्नी

पूरन कुमार की पत्नी IAS अमनीत पी. कुमार ने लौटते ही चंडीगढ़ के सेक्टर 11 थाने में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि एक SC अधिकारी को योजनाबद्ध तरीके से मानसिक और जातिगत रूप से प्रताड़ित कर मौत की ओर धकेलने का मामला है। उन्होंने FIR में SC/ST एक्ट, IPC धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अन्य धाराएं लगाने की मांग की है।

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IAS अमनीत पी. कुमार का यह भी कहना है कि जब तक दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक वह पोस्टमार्टम की अनुमति नहीं देंगी।

प्रशासनिक हलकों में हड़कंप

ADGP Suicide Case : इस घटना ने हरियाणा ही नहीं, देशभर के सिविल सेवकों, दलित संगठनों और न्याय प्रणाली में समानता के दावों को चुनौती दी है। यह सवाल अब उठने लगे हैं कि क्या उच्च प्रशासनिक पदों पर भी जातिगत भेदभाव और सामाजिक बहिष्कार जैसी मानसिकताएं जीवित हैं ? क्या सिस्टम में शिकायतों की निष्पक्ष सुनवाई का कोई प्रभावी ढांचा नहीं है ? जब एक IPS अधिकारी को न्याय नहीं मिल पा रहा, तो आम नागरिक की स्थिति कितनी बदतर हो सकती है ?