टीआरपी डेस्क। लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी IAS दुर्गा शक्ति नागपाल से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आइएआरआइ) ने दिल्ली स्थित बंगले पर तीन वर्ष तक कब्जे के एवज में 1,63,57,550 रुपये हर्जाने की मांग की है।

वहीं इसी मामले में राज्य सरकार ने संस्थान के निदेशक को पत्र लिखकर हर्जाने की धनराशि वसूलने पर पुनर्विचार करते हुए पेनाल्टी को कम करने के लिए कहा है। हालांकि, वर्ष 2010 बैच की आइएएस दुर्गा शक्ति द्वारा संबंधित नोटिस को दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में चुनौती भी दी गई है।

बता दें कि नोएडा में वर्ष 2013 में तैनाती के दौरान वह बालू माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई और एक धार्मिक स्थल की दीवार तुड़वाने के मामले को लेकर चर्चा में आई थीं। तत्कालीन सपा सरकार ने उन्हें धार्मिक स्थल की दीवार तुड़वाने के आरोप में निलंबित कर दिया था।

बहाली के बाद वर्ष 2015 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में उनकी तैनाती तत्कालीन केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह की विशेष कार्य अधिकारी (ओएसडी) के तौर पर की गई थी। उन्हें अप्रैल 2015 में दिल्ली के आइएआरआइ के पूसा कैंपस स्थित बंगला नंबर बी-17 (टाइप-6) आवंटित किया गया था।

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वर्ष 2019 में तबादला वाणिज्य मंत्रालय में होने के बाद से आइएआरआइ दुर्गा शक्ति से बंगला वापस मांग रहा था लेकिन उन्होंने कब्जा बनाए रखते हुए फरवरी 2025 में बंगला खाली किया। इस पर आइएआरआइ ने मई 2022 से फरवरी 2025 तक बंगले के लिए हर्जाने के तौर पर 1,63,57,550 रुपये मांगे।

इस संबंध में संस्थान ने दुर्गा शक्ति के साथ ही राज्य सरकार को पत्र लिखा। दुर्गा शक्ति ने बताया कि यह बंगला उन्हें 6600 रुपये प्रतिमाह के किराये पर आवंटित किया गया था, लेकिन कब्जे की अवधि में आइएआरआइ ने इसका हर्जाना 92 हजार रुपये प्रतिमाह तय किया।

हर्जाने की यह राशि दूसरे माह बढ़कर 1.02 लाख, तीसरे माह में 1.10 लाख, चौथे माह में 1.28 लाख, पांचवे माह में 1.65, छठे माह में 2.39 और उसके बाद से 4.60 लाख रुपये प्रति माह तय की गई थी। ऐसे में आइएआरआइ उनसे 1,63,57,550 रुपये हर्जाने की मांग कर रहा है।

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इस बारे में दुर्गा शक्ति का कहना है कि यह मामला दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में लंबित है। उन्होंने आइएआरआइ के निर्णय को कोर्ट में चुनौती दी है। साथ ही राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर हर्जाने की रकम कम करने का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने 26 जून को उनकी सुरक्षा और माता-पिता के दिल्ली में चल रहे इलाज को देखते हुए संस्थान को पत्र लिखा है।

वह अपनी माता-पिता की इकलौती संतान हैं और दिल्ली में उनका इलाज करवा रही हैं। उनके अनुसार 70-80 हजार रुपये और बनते हैं। कोर्ट का निर्णय आने के बाद इसकी अदायगी कर दी जाएगी।