0 शपथ पत्र से असंतुष्ट कोर्ट ने राज्य सरकार से छह हफ्ते में मांगा नया जवाब

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने प्रदेश में बिना मान्यता के संचालित हो रहे प्री-प्राइमरी और नर्सरी स्कूलों के मामले में नाराजगी जताते हुए कहा कि सरकार बताए कि आखिर उसने जनवरी 2013 के उस सर्कुलर को क्यों रद्द किया, जो इन स्कूलों पर कार्रवाई का आधार था।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शुक्रवार को हुई सुनवाई में शिक्षा सचिव के शपथ पत्र को असंतोषजनक बताते हुए नया हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए। अब मामले की अगली सुनवाई छह हफ्ते बाद होगी।

सरकार ने अपने शपथ पत्र में क्या कहा..?

सरकार ने बताया कि 23 सितंबर 2025 को 2013 वाला सर्कुलर इस कारण रद्द किया गया क्योंकि वह बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (आरटीई एक्ट) के अनुरूप नहीं था। आरटीई एक्ट केवल कक्षा 1 से 8 और 6 से 14 वर्ष के बच्चों पर लागू होता है, जबकि पुराना सर्कुलर प्री-नर्सरी स्तर के बच्चों से संबंधित था।

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याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि प्रदेश में 330 से अधिक स्कूल बिना किसी मान्यता के चल रहे हैं। अगस्त में हुई पिछली सुनवाई में हाई कोर्ट ने सवाल उठाया था कि जब 2013 के सर्कुलर के अनुसार नर्सरी स्कूलों को मान्यता लेना जरूरी था, तो पिछले 12 वर्षों तक ये संस्थान बिना अनुमति कैसे चलते रहे?

याचिकाकर्ता ने चेताया कि ऐसे स्कूलों से पढ़ाई पूरी करने वाले बच्चों के सामने क्लास-एक में प्रवेश के समय बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती है, क्योंकि उनके पास मान्य प्रमाणपत्र नहीं होंगे। इससे उनकी पढ़ाई और भविष्य दोनों पर असर पड़ सकता है।

सरकार ने कोर्ट को बताया कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सात सदस्यीय समिति गठित की गई है। यह समिति नई शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप निजी प्ले स्कूलों के लिए नियामक दिशा-निर्देश तैयार कर रही है। कोर्ट ने पूछा कि नए नियम कायदे कब तक बन जाएंगे, तब कहा गया कि इसमें छः सप्ताह का समय लग जाएगा।

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तो उन अफसरों पर करें कार्रवाई..

हाई कोर्ट ने साफ कहा कि यदि सर्कुलर वापस लेने से बच्चों की पढ़ाई या भविष्य प्रभावित होता है, तो राज्य सरकार उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करे जिन्होंने नियमों के विपरीत स्कूल संचालित होने दिए। साथ ही कोर्ट ने सरकार से जल्द नई नीति बनाकर छः सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

हाईकोर्ट में चल रहे इस मामले में याचिकाकर्ता कांग्रेस नेता विकास तिवारी हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के शिक्षा विभाग में चल रही भर्राशाही और निजी विद्यालयों की मनमानी को उजागर करते हुए तमाम दस्तावेज प्रस्तुत किए हैं। जिसके चलते निजी विद्यालयों की मान्यता को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं विभाग के जिन अफसरों की शह पर यह सब कुछ हो रहा था उन्हें अदालत में जवाब देते नहीं बन रहा है। बहरहाल सभी की नजर अदालत के फैसले पर टिकी हुई है। निजी स्कूलों को मोटी फीस देकर अपने बच्चों को पढ़ा रहे पालकों की कोर्ट से उम्मीदें बढ़ गई हैं। वहीं शिक्षा विभाग के अफसर नर्सरी स्कूलों के लिए नई नीति बनाने में जुटे हुए हैं।

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