टीआरपी। Chhath mahaparv : बिहार, झारखंड का प्रमुख छठ महापर्व राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के अनेक शहरों में श्रद्धा उल्लास से मनाया गया। सोमवार की शाम अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देने नदी, तालाब के किनारे हजारों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। ऐसा ही नजारा खारुन नदी के महादेवघाट तट पर दिखाई दिया। दोपहर से ही श्रद्धालु घाट के किनारे पहुंचने लगे थे। सूर्य की बहन छठी मइया की विधिवत पूजा अर्चना करने के पश्चात व्रती महिलाएं सूर्य के अस्त होने का इंतजार करतीं रहीं। जैसे ही सूर्य के अस्त होने का समय आया, महिलाओं ने विविध फल और सब्जियों से सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। हजारों लोग नदी में कमर तक डूबकर अर्घ्य देते नजर आए।
सूर्य की बहन है छठी मइया
ऐसी मान्यता है कि सूर्यदेव की बहन छठी मइया है। छठी माता को संतान की रक्षा करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है। संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत और सुखी जीवन के लिए छठ पर उपवास और पूजा की जाती है।
घाट किनारे गूंजते रहे छठी मइया के गीत
महादेवघाट के किनारे पूजा करने के दौरान महिलाओं ने भोजपुरी भाषा में छठी मइया के गीत गाए। परिवार के सदस्य पूजा में सहयोग करते रहे। छठ महापर्व समिति के नेतृत्व में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। शाम को अंतर्राष्ट्रीय लोक गायिका स्वाति मिश्रा (मुंबई) ने छठ गीतों की प्रस्तुति देकर समां बांधा। इनके अलावा लोकधारा के मशहूर कलाकार तिलक राजा साहू और केशरी साहू ने छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। प्रयागराज से आए सोनाली एवं तरुण चोपड़ा की टीम ने नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी।
मंगलवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ समापन
छठ महापर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय खाए परंपरा निभाने के साथ हुई थी। इसके पश्चात 26 को खरना की रस्म निभाई गई। खीर-रोटी का सेवन किया गया। 27 अक्टूबर को डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा निभाई। चार दिवसीय छठ महापर्व का समापन 28 अक्टूबर को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। छठी मइया को अर्पित ठेठुआ का प्रसाद ग्रहण कर निर्जला व्रत का पारणा किया जाएगा।



